राजस्थान में 200 बांधों का होगा कायाकल्प, 300 करोड़ की कार्ययोजना मंजूर
राजस्थान सरकार ने 2026-27 बजट में 200 जर्जर बांधों के पुनरुद्धार के लिए 300 करोड़ रुपये मंजूर किए। DRIP प्रोजेक्ट के तहत सिंचाई क्षमता और बांध सुरक्षा को मिलेगा बढ़ावा।
राजस्थान सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में प्रदेश के करीब 200 पुराने और जर्जर बांधों के पुनरुद्धार के लिए बड़ी कार्ययोजना तैयार की है। इस योजना के तहत 300 करोड़ रुपये मंजूर किए गए हैं, जिससे इन बांधों को नया जीवन मिलेगा और सिंचाई व्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
पहले चरण में उदयपुर संभाग के जलाशय शामिल
प्रथम चरण में उदयपुर संभाग के कई प्रमुख जलाशयों को शामिल किया गया है। योजना के तहत बांधों की कमजोर पाल को मजबूत किया जाएगा, नहरों की मरम्मत होगी और गाद निकासी का कार्य किया जाएगा, जिससे जल भंडारण क्षमता बढ़ सके।
जल संसाधन मंत्री सुरेश सिंह रावत ने बताया कि इस अभियान का उद्देश्य बांधों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और सिंचाई तंत्र को सुदृढ़ बनाना है।
वर्ल्ड बैंक समर्थित DRIP प्रोजेक्ट के तहत होगा काम
यह कार्य वर्ल्ड बैंक समर्थित DRIP (Dam Rehabilitation and Improvement Project) के तहत किया जाएगा। राज्य सरकार ने अगले 10 वर्षों में 736 बांधों के पुनर्विकास का लक्ष्य रखा है।
इसमें बीसलपुर बांध, जवाई बांध और माही बजाज सागर बांध जैसे बड़े बांधों को भी शामिल किया गया है।
इसके अलावा टोंक जिले के 140 वर्ष पुराने टोरड़ी सागर बांध के लिए ईआरसीपी के तहत अलग से 100 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।
सदियों पुरानी झीलें आज भी मजबूती का उदाहरण
राजस्थान, विशेषकर उदयपुर संभाग की ऐतिहासिक झीलें आज भी मजबूती का प्रतीक हैं। राजसमंद झील, जयसमंद झील और फतहसागर झील जैसी संरचनाएं 300 से 400 वर्षों से सुरक्षित खड़ी हैं।
संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत के 1,115 बड़े बांध 2025 तक अपनी 50 वर्ष की आयु पूरी कर लेंगे। ऐसे में मेवाड़ की ऐतिहासिक झीलों की मजबूती दुनिया के लिए एक मिसाल बनकर सामने आई है।
Saloni Kushwaha 
