लड़ेंगे या मरेंगे', पुलिस की रोक के बावजूद धरने पर बैठीं ममता बनर्जी, अभिषेक पर हमले को लेकर BJP पर साधा निशाना

पश्चिम बंगाल में चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी कोलकाता के Y-चैनल पर धरने पर बैठीं। अभिषेक बनर्जी पर हमले का मुद्दा उठाते हुए उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधा और लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की बात कही। TMC की अंदरूनी राजनीति और बंगाल के सियासी हालात पर पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

लड़ेंगे या मरेंगे', पुलिस की रोक के बावजूद धरने पर बैठीं ममता बनर्जी, अभिषेक पर हमले को लेकर BJP पर साधा निशाना
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Mamata Banerjee Protest: पश्चिम बंगाल की राजनीति में विधानसभा चुनाव के बाद सियासी तनाव लगातार बढ़ता नजर आ रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नेताओं पर कथित हमलों और पार्टी के भीतर बढ़ती असंतोष की खबरों के बीच पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी सोमवार को कोलकाता के एस्प्लेनेड स्थित Y-चैनल धरना स्थल पर विरोध प्रदर्शन करने पहुंचीं। उनके साथ सांसद अभिषेक बनर्जी, कई विधायक और बड़ी संख्या में समर्थक मौजूद रहे।

पुलिस की अनुमति नहीं, फिर भी धरने पर पहुंचीं ममता

कोलकाता पुलिस ने 1 जून को प्रस्तावित इस प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। इसके बावजूद ममता बनर्जी धरना स्थल पर पहुंचीं और राज्य में लोकतांत्रिक अधिकारों पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस टीएमसी नेताओं और कार्यकर्ताओं को डराने-धमकाने का काम कर रही है।

धरने को संबोधित करते हुए ममता ने कहा, "मैं हमेशा हर उस व्यक्ति के साथ खड़ी रही हूं, जिसकी आवाज दबाने की कोशिश की गई, चाहे उसकी विचारधारा मेरी पार्टी से अलग ही क्यों न हो।" उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा, "हम लड़ेंगे या मरेंगे, लेकिन पीछे नहीं हटेंगे।"

अभिषेक बनर्जी पर हमले का मुद्दा उठाया

ममता बनर्जी ने अपने भतीजे और टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी पर हुए कथित हमले का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने कभी उनसे राजनीतिक और व्यक्तिगत मदद मांगी थी, वही लोग कठिन समय में चुप रहे।

उन्होंने कहा, "बीजेपी के कई नेताओं ने अलग-अलग मौकों पर मुझसे मदद मांगी थी। मैंने कभी उन बातों को सार्वजनिक नहीं किया। जब भी किसी ने सहायता मांगी, मैंने मदद की। लेकिन जब अभिषेक पर हमला हुआ, तब वही लोग सामने नहीं आए।"

गिरफ्तारी की चुनौती, दिल्ली जाने की चेतावनी

ममता बनर्जी ने कहा कि अगर सरकार चाहे तो उन्हें गिरफ्तार कर सकती है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि कोलकाता में उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से विरोध प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं दी गई, तो वह अपना विरोध दिल्ली में दर्ज कराएंगी।

उन्होंने कहा, "अगर बंगाल में हमें अपनी बात रखने का अधिकार नहीं मिलेगा, तो हम दिल्ली जाएंगे। लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन करना हमारा अधिकार है।"

चुनावी हार के बाद पहली बार सड़क पर उतरीं ममता

हाल ही में संपन्न विधानसभा चुनावों में टीएमसी को करारी हार का सामना करना पड़ा था। चुनाव परिणामों के बाद यह पहला बड़ा सार्वजनिक प्रदर्शन है, जिसमें ममता बनर्जी स्वयं सड़कों पर उतरी हैं। ऐसे में इस कार्यक्रम को पार्टी के भीतर उनकी पकड़ और संगठनात्मक ताकत की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है।

इस बीच, पार्टी के दो विधायकों को निष्कासित किए जाने के बाद टीएमसी के अंदरूनी हालात को लेकर भी चर्चाएं तेज हैं। राजनीतिक विश्लेषकों की नजर इस बात पर टिकी हुई है कि चुनावी झटके के बाद ममता बनर्जी के साथ पार्टी के कितने विधायक और नेता मजबूती से खड़े दिखाई देते हैं।

क्या बंगाल में बढ़ेगा सियासी संघर्ष?

टीएमसी नेताओं पर कथित हमलों, पार्टी के भीतर बढ़ती खींचतान और चुनावी हार के बाद ममता बनर्जी का यह धरना बंगाल की राजनीति में नए संघर्ष का संकेत माना जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह आंदोलन केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित रहता है या फिर राज्य की राजनीति में किसी बड़े बदलाव की भूमिका तैयार करता है।