सड़क का नाम बदला तो इतिहास, पहचान और राजनीति पर छिड़ गई बहस....शुभेंदु के फैसले पर कांग्रेस का बड़ा सवाल

पश्चिम बंगाल में एक सड़क के नाम बदलने पर सियासत गर्म हो गई, कांग्रेस इसे गलती बता रही है और जल्दबाजी का फैसला बता रही है तो बीजेपी का इस पर अलग कहना है।

सड़क का नाम बदला तो इतिहास, पहचान और राजनीति पर छिड़ गई बहस....शुभेंदु के फैसले पर कांग्रेस का बड़ा सवाल

पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों एक सड़क सबसे ज्यादा चर्चा में है। कोलकाता नगर निगम ने सुहरावर्दी एवेन्यू का नाम बदलकर गोपाल मुखर्जी रोड करने का फैसला किया, लेकिन यह महज नाम परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा। देखते ही देखते मामला इतिहास, राजनीति और पहचान की बहस में बदल गया।

"पश्चिमबंग दिवस पर एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा"
विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि पश्चिमबंग दिवस पर एक ऐतिहासिक गलती को सुधारा गया है। उनके मुताबिक शहर की एक प्रमुख सड़क का नाम ऐसे व्यक्ति से जुड़ा था, जिस पर बेगुनाह लोगों के नरसंहार के आरोप लगते रहे हैं। अब उस सड़क को गोपाल मुखर्जी का नाम देकर उन लोगों को सम्मान दिया गया है, जिन्होंने कठिन समय में हजारों लोगों की जान बचाने का काम किया।

शुभेंदु अधिकारी ने इसे "ऐतिहासिक न्याय" बताते हुए कहा कि बंगाल को अब अपने असली नायकों को याद करना चाहिए। उनका दावा है कि यह फैसला केवल एक सड़क का नाम बदलने का नहीं, बल्कि इतिहास को सही नजरिए से देखने का प्रयास है।

बंगाल सीएम सुहरावर्दी में कंफ्यूज: पवन खेड़ा
लेकिन कहानी में ट्विस्ट तब आया, जब कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने इस फैसले पर सवाल खड़े कर दिए। शुभेंदु अधिकारी की पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस सांसद और मीडिया प्रमुख पवन खेड़ा ने लिखा शुभेंदु दा, आपने यह क्या कर दिया. उन्होंने लिखा, 'देवियों और सज्जनों, ये पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री हैं. वे और उनकी पूरी सरकार पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करने का दावा करती है, लेकिन वे हसन शाहिद सुहरावर्दी- जो एक विद्वान, शिक्षाविद, कला समीक्षक और कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति थे. हुसैन सुहरावर्दी- जिन्हें 'बंगाल का कसाई' कहा जाता है, उनके बीच भ्रमित हो गए. इसी भ्रम में उन्होंने हसन शाहिद सुहरावर्दी के नाम पर रखी गई सड़क का नाम बदल दिया'

"हसन शाहिद सुहरावर्दी के नाम पर थी रोड"
कांग्रेस का कहना है कि जिस सड़क का नाम बदला गया, वह हसन शाहिद सुहरावर्दी के नाम पर थी, जो एक प्रसिद्ध शिक्षाविद, कला समीक्षक और कलकत्ता विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति थे। जबकि शुभेंदु अधिकारी जिस व्यक्ति का जिक्र कर रहे हैं, वह हुसैन शहीद सुहरावर्दी हैं, जिनका नाम विभाजन काल की राजनीति और सांप्रदायिक हिंसा से जोड़ा जाता है।

यही वजह है कि सड़क के नाम से शुरू हुआ यह मामला अब राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का केंद्र बन गया है। भाजपा इसे इतिहास सुधारने का कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे तथ्यों की गलत व्याख्या और राजनीतिक ध्रुवीकरण की कोशिश करार दे रही है।

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