एक ऑटो ड्राइवर, ऐसे बन गया शातिर कातिल..South India के Auto Shankar के Crime की कहानी...
चेन्नई के कुख्यात सीरियल किलर और गैंगस्टर ऑटो शंकर ने 1970-80 के दशक में अवैध शराब, वेश्यावृत्ति और कई सनसनीखेज हत्याओं से दहशत फैलाई। कई हत्याओं का खुलासा होने के बाद उसे गिरफ्तार किया गया और अंततः 27 अप्रैल 1995 को फांसी दे दी गई।
CASE DIARY: आज कहानी उस अपराधी की, जिसने 1970 और 1980 के दशक में चेन्नई की अपराध दुनिया में दहशत फैला दी। उसका नाम था ऑटो शंकर। शुरुआत में शंकर अवैध शराब की तस्करी करता था, लेकिन जल्द ही उसने वेश्यावृत्ति के धंधे में कदम रखा। राजनीतिक संरक्षण और अपराध जगत से जुड़े नेटवर्क ने उसे लगातार ताकतवर बना दिया। पैसों और रसूख के दम पर वह कानून से बचता रहा। उसकी जिंदगी का सबसे चर्चित मोड़ तब आया, जब उसकी तीसरी पत्नी ललिता उसे छोड़कर उसके ही साथी सुदलाईमुथु के साथ चली गई। बदला लेने के लिए शंकर ने दोनों को अलग-अलग बहाने से बुलाया। पहले ललिता की हत्या कर उसे दफना दिया, फिर सुदलाईमुथु का गला घोंटकर शव जला दिया और राख समुद्र में फेंक दी। इसके बाद अपने राज छिपाने के लिए उसने रवि नाम के एक शख्स की भी हत्या कर दी। 29 मई 1988 को शंकर और उसके गिरोह ने तीन प्रतिद्वंद्वियों की हत्या कर उनके शव दफना दिए। लापता लोगों की शिकायतों के बाद पुलिस ने जांच तेज की। गिरफ्तारी के बाद शंकर ने कई हत्याओं का कबूलनामा किया। हालांकि वह एक बार जेल से फरार भी हुआ, लेकिन ज्यादा समय तक बच नहीं सका। चेंगलपट्टू सेशन कोर्ट ने उसे मौत की सजा सुनाई और 27 अप्रैल 1995 को सलेम सेंट्रल जेल में उसे फांसी दे दी गई। ऑटो शंकर की कहानी इस बात की मिसाल है कि अपराध चाहे कितना भी बड़ा क्यों न हो, कानून की पकड़ से आखिरकार कोई नहीं बचता।
वीडियो में देखिए पूरी कहानी::

