पीपल को खेजड़ी बताने पर घिरे PM मोदी? कांग्रेस MLA हरीश चौधरी का तंज, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पीएम मोदी ने जिस पौधे को खेजड़ी बताया, उसे लेकर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए पूछा— "प्रधानमंत्री जी, क्या ये पौधा आपकी नजर में खेजड़ी है?" अब इस मुद्दे पर सियासत गरमा गई है। पढ़िए पूरी खबर।
पीपल को खेजड़ी बता बैठे पीएम मोदी? कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी का तंज, बोले- "संस्कृति की बात करने
वालों को पेड़ों की पहचान तो हो"
राजस्थान की राजनीति में एक बार फिर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इस बार मुद्दा किसी बड़ी योजना या चुनावी वादे का नहीं, बल्कि एक पौधे की पहचान को लेकर उठे विवाद का है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जब पचपदरा पहुंचे तो वहां की तस्वीर और वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बने हुए हैं। दावा किया जा रहा है कि प्रधानमंत्री ने जिस पौधे को खेजड़ी बताया, वह वास्तव में पीपल का पौधा था।
इसी मुद्दे पर कांग्रेस विधायक हरीश चौधरी ने सोशल मीडिया पर तीखा तंज कसते हुए लिखा कि जो लोग अपनी संस्कृति और परंपराओं में पूजनीय पीपल तथा खेजड़ी जैसे वृक्षों की सही पहचान तक नहीं कर पा रहे हैं, वे संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि थार की जनता दिखावे और वास्तविक समझ का फर्क अच्छी तरह जानती है। अपनी पोस्ट के अंत में उन्होंने सवाल भी पूछा, "प्रधानमंत्री जी, क्या यह पौधा आपकी नजर में खेजड़ी है?"
जो अपनी संस्कृति और परंपराओं में पूजनीय “पीपल तथा खेजड़ी” के वृक्षों की सही पहचान तक नहीं कर पा रहे हैं, वे संस्कृति की रक्षा के बड़े-बड़े दावे कर रहे हैं।
— Harish Chaudhary (@Barmer_Harish) July 4, 2026
थार की जनता दिखावे और वास्तविक समझ का फर्क अच्छी तरह समझ रही है।
प्रधानमंत्री जी क्या ये पौधा आपकी नजर में खेजड़ी है?… pic.twitter.com/piB8UnXUW5
हरीश चौधरी की इस पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कांग्रेस समर्थक इसे सरकार पर करारा तंज बता रहे हैं, जबकि भाजपा समर्थकों का कहना है कि विपक्ष विकास और जनहित के मुद्दों को छोड़कर प्रतीकात्मक विवादों को हवा दे रहा है।

राजस्थान में खेजड़ी का विशेष सांस्कृतिक और पर्यावरणीय महत्व माना जाता है। मरुस्थलीय क्षेत्रों में यह जीवनदायिनी वृक्ष के रूप में पहचानी जाती है, जबकि पीपल भी भारतीय परंपरा में अत्यंत पूजनीय माना जाता है। ऐसे में दोनों वृक्षों की पहचान को लेकर उठा यह विवाद राजनीतिक रंग ले चुका है।
हालांकि, इस मामले में प्रधानमंत्री कार्यालय या भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी को और तेज कर सकता है। फिलहाल, एक पौधे की पहचान ने राजस्थान की राजनीति में नया व्यंग्य और नया विवाद जरूर खड़ा कर दिया है।
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