पैर गंवाया, हौसला नहीं… 19 साल के रुद्रांश को मिलेगा अर्जुन अवॉर्ड, 4 बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़कर रचा इतिहास
भरतपुर के 19 वर्षीय पैरा शूटर रुद्रांश खंडेलवाल का नाम अर्जुन अवॉर्ड की अंतिम सूची में शामिल हुआ है। जानें हादसे से लेकर वर्ल्ड रिकॉर्ड और 25 से ज्यादा इंटरनेशनल मेडल तक का सफर।
मुश्किल हालात कई बार इंसान की राह रोक देते हैं, लेकिन कुछ लोग उन्हीं मुश्किलों को अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते हैं। राजस्थान के भरतपुर के 19 वर्षीय पैरा शूटर रुद्रांश खंडेलवाल ऐसी ही मिसाल हैं। बचपन में एक हादसे में पैर गंवाने के बावजूद उन्होंने निशानेबाजी को अपना लक्ष्य बनाया और महज कुछ वर्षों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का नाम रोशन कर दिया।
भारत सरकार की ओर से घोषित नेशनल स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स की फाइनल सूची में रुद्रांश खंडेलवाल का नाम अर्जुन अवॉर्ड के लिए शामिल किया गया है। इसके साथ ही वे इस साल यह प्रतिष्ठित सम्मान पाने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ियों में शामिल हो गए हैं। रुद्रांश के नाम की घोषणा के बाद भरतपुर स्थित उनके परिवार में खुशी का माहौल है।
8 साल की उम्र में हादसा, फिर शुरू हुई नई जिंदगी
रुद्रांश के चाचा आशुतोष खंडेलवाल के मुताबिक, करीब 8 साल की उम्र में एक शादी समारोह के दौरान आतिशबाजी की चपेट में आने से रुद्रांश को अपना पैर गंवाना पड़ा था। इस हादसे का असर उनकी जिंदगी पर गहरा पड़ा। शारीरिक और मानसिक तौर पर इस मुश्किल दौर से बाहर निकलने में उन्हें करीब तीन साल का समय लगा।
लेकिन रुद्रांश ने परिस्थितियों के आगे हार मानने के बजाय आगे बढ़ने का फैसला किया। परिवार के सहयोग से उन्होंने शूटिंग को अपना लक्ष्य बनाया और धीरे-धीरे यही खेल उनकी पहचान बन गया। आज वही बच्चा अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुका है और देश के प्रतिष्ठित खेल पुरस्कार तक पहुंच गया है।
तीन साल के करियर में चार बार वर्ल्ड रिकॉर्ड
रुद्रांश की उपलब्धियों की सबसे खास बात यह है कि उन्होंने बेहद कम समय में पैरा शूटिंग की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। वे अपने करियर में अब तक चार बार वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं।
साल 2023 में उन्होंने 50 मीटर शूटिंग इवेंट में दुनिया के नंबर-1 खिलाड़ी का स्थान हासिल किया था। इसके अलावा वे पेरिस पैरालंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।
आमतौर पर अर्जुन अवॉर्ड के लिए खिलाड़ी के पिछले चार वर्षों के अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन को प्रमुख आधार माना जाता है। रुद्रांश का अंतरराष्ट्रीय अनुभव करीब तीन वर्ष का ही है, लेकिन उनके रिकॉर्ड और लगातार शानदार प्रदर्शन को देखते हुए चयन समिति ने उनके नाम की सिफारिश की।
25 से ज्यादा इंटरनेशनल मेडल
रुद्रांश की उपलब्धियों का सिलसिला सिर्फ रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। उनके नाम 25 से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पदक दर्ज हैं। अर्जुन अवॉर्ड के चयन में जिन 10 प्रमुख पदकों को आधार बनाया गया, उनमें 6 गोल्ड और 4 सिल्वर मेडल शामिल हैं।
उनकी प्रमुख उपलब्धियों में एशियन गेम्स 2023 के दो सिल्वर मेडल, लीमा वर्ल्ड शूटिंग चैंपियनशिप के दो सिल्वर मेडल शामिल हैं। इसके अलावा ओसिजेक शूटिंग वर्ल्ड कप 2023, नई दिल्ली शूटिंग वर्ल्ड कप 2024 और चांगवोन शूटिंग वर्ल्ड कप 2025 में उन्होंने दो-दो गोल्ड मेडल अपने नाम किए।
इन उपलब्धियों ने रुद्रांश को भारतीय पैरा शूटिंग के प्रमुख युवा खिलाड़ियों में स्थापित किया है।
मां ने बताया- करीब 8 महीने पहले हुई थी सिफारिश
रुद्रांश की मां विनीता खंडेलवाल ने बताया कि करीब आठ महीने पहले अर्जुन अवॉर्ड के लिए उनके बेटे के नाम की सिफारिश की गई थी। उस समय परिवार ने मिठाई खिलाकर खुशी मनाई थी। अब भारत सरकार की ओर से फाइनल सूची में नाम आने के बाद परिवार की खुशी और बढ़ गई है।
फिलहाल रुद्रांश दिल्ली में हैं। अर्जुन अवॉर्ड समारोह की तारीख की आधिकारिक घोषणा होना अभी बाकी है।
गगन नारंग समेत चयन समिति ने की सिफारिश
रुद्रांश के नाम की सिफारिश चयन समिति की ओर से की गई। समिति में भारतीय ओलंपिक संघ के उपाध्यक्ष और पूर्व ओलंपिक निशानेबाज गगन नारंग, पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी अपर्णा पोपट और पूर्व हॉकी खिलाड़ी एम.एम. सोमाया शामिल थे।
इसके बाद केंद्र सरकार के खेल मंत्रालय ने मंगलवार को नेशनल स्पोर्ट्स अवॉर्ड्स की अंतिम सूची जारी की, जिसमें रुद्रांश खंडेलवाल को अर्जुन अवॉर्ड के लिए चुना गया।
राजस्थान के लिए गौरव का पल
रुद्रांश की कहानी सिर्फ एक खिलाड़ी की सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह हौसले, परिवार के सहयोग और लक्ष्य के प्रति समर्पण की मिसाल भी है। बचपन में हुए हादसे ने उनकी जिंदगी की दिशा जरूर बदली, लेकिन उनके सपनों को नहीं रोक सका।
महज 19 साल की उम्र में अर्जुन अवॉर्ड के लिए चयन और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रिकॉर्ड व पदकों की लंबी सूची यह बताती है कि खेल के मैदान में परिस्थितियों से ज्यादा मायने जुनून और मेहनत रखते हैं। रुद्रांश की उपलब्धि राजस्थान के साथ-साथ पूरे देश के युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणा बनकर सामने आई है।

