वार्ड 62 में निर्दलीय शंकरलाल शर्मा ने बढ़ाई BJP-कांग्रेस की टेंशन, समर्थक बोले- विकास देखकर फिर मैदान में उतारा

जयपुर नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 62 से निर्दलीय प्रत्याशी शंकरलाल शर्मा ने मुकाबला रोचक बना दिया है। समर्थक उनके पुराने विकास कार्यों और स्थानीय संपर्क को ताकत बता रहे हैं, जबकि सीवरेज और CCTV को उन्होंने प्रमुख प्राथमिकता बताया है।

वार्ड 62 में निर्दलीय शंकरलाल शर्मा ने बढ़ाई BJP-कांग्रेस की टेंशन, समर्थक बोले- विकास देखकर फिर मैदान में उतारा

नगर निगम चुनाव की तारीख नजदीक आने के साथ जयपुर के अलग-अलग वार्डों में चुनावी मुकाबला तेज होता जा रहा है। वार्ड नंबर 62 में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के बीच एक निर्दलीय उम्मीदवार ने भी चुनावी समीकरण को दिलचस्प बना दिया है। यहां शंकरलाल शर्मा निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं। उनके समर्थकों का दावा है कि शर्मा को इस बार चुनाव लड़ने के लिए स्थानीय लोगों ने ही आगे किया है और पिछले कार्यकाल में हुए विकास कार्यों के कारण उन्हें वार्ड में समर्थन मिल रहा है।

हालांकि समर्थकों के जीत और एकतरफा माहौल के दावे चुनावी राय हैं। इनकी वास्तविक परीक्षा मतदान और नतीजों में होगी।

समर्थकों का नारा- 'जनता की एक पुकार, शंकरलाल'

प्रचार के दौरान शंकरलाल शर्मा के समर्थकों ने “जनता की है एक पुकार, शंकरलाल” और “संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं” जैसे नारे लगाए। स्थानीय लोगों से हुई बातचीत में कई समर्थकों ने दावा किया कि शर्मा लगातार जनता के संपर्क में रहते हैं और लोगों की समस्याओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हैं। कुछ समर्थकों का कहना था कि आधी रात को भी किसी समस्या के लिए फोन किया जाए तो वे उपलब्ध रहते हैं। यही व्यक्तिगत संपर्क उनके चुनावी अभियान की सबसे बड़ी ताकत बताया जा रहा है।

पूर्व पार्षद रामा शर्मा के कार्यकाल का जिक्र

शंकरलाल शर्मा के समर्थन में सबसे ज्यादा चर्चा पूर्व पार्षद रामा शर्मा के कार्यकाल की हुई। स्थानीय समर्थकों के अनुसार उस समय यह इलाका पुराने वार्ड नंबर 47 का हिस्सा था और क्षेत्र काफी बड़ा था। उनका दावा है कि उस दौरान सड़क, पार्क, लाइट, सीवरेज और दूसरे विकास कार्य करवाए गए।

कुछ समर्थकों ने यह भी कहा कि खराब हालत में पड़े कई पार्कों को विकसित कराया गया, उनमें मिट्टी भरवाई गई, बाउंड्री बनवाई गई और खेल सुविधाएं विकसित की गईं। ये स्थानीय समर्थकों के दावे हैं और विकास कार्यों के आधिकारिक रिकॉर्ड से इनकी अलग से पुष्टि की जा सकती है।

'टिकट मिले या नहीं, चुनाव लड़ना होगा'

समर्थकों के मुताबिक शंकरलाल शर्मा शुरुआत में निर्दलीय चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं थे।

लेकिन पार्टी टिकट की स्थिति स्पष्ट होने से पहले ही बड़ी संख्या में स्थानीय लोग उनके घर पहुंचे और चुनाव लड़ने का आग्रह किया। समर्थकों का दावा है कि पिछले पांच वर्षों की स्थानीय समस्याओं और शर्मा के पुराने कार्यकाल की तुलना के बाद लोगों ने उन्हें फिर मैदान में उतारने का फैसला किया।

इस तरह उनकी चुनावी कहानी को समर्थक “पार्टी से ज्यादा जनता का प्रत्याशी” बताने की कोशिश कर रहे हैं।

सीवरेज बना सबसे बड़ा मुद्दा

वार्ड नंबर 62 के अलग-अलग हिस्सों में सीवरेज को बड़ी समस्या बताया गया है। विशेष तौर पर सेक्टर 17 और आसपास के क्षेत्रों के लोगों ने सीवरेज, सड़क और सफाई को लेकर शिकायतें सामने रखीं।

शंकरलाल शर्मा ने भी इसे अपनी पहली प्राथमिकता बताया। उन्होंने कहा कि अगर जनता उन्हें मौका देती है तो प्रताप नगर क्षेत्र की सीवरेज समस्या का समाधान सबसे पहले किया जाएगा।

महिलाओं की सुरक्षा के लिए CCTV का वादा

शर्मा ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर वार्ड में CCTV कैमरे लगवाने की योजना का भी जिक्र किया।

उनका कहना है कि कैमरों के जरिए सुरक्षा व्यवस्था बेहतर करने और आपराधिक गतिविधियों पर नजर रखने में मदद मिलेगी। हालांकि इस योजना के लिए नगर निगम, पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों के सहयोग की जरूरत पड़ सकती है।

पहले 100 दिन में सीवरेज और CCTV पर फोकस

शंकरलाल शर्मा ने अपनी शुरुआती प्राथमिकताओं में दो काम सबसे ऊपर बताए हैं। पहला- सीवरेज व्यवस्था सुधारना। दूसरा- सुरक्षा के लिए CCTV कैमरों की व्यवस्था। इसके अलावा सड़क, पार्क, नाली, स्ट्रीट लाइट और अन्य मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कामों को भी प्राथमिकता देने की बात कही गई है।

युवाओं के लिए भी काम करने का दावा

युवाओं के लिए अपनी योजनाओं पर शर्मा ने कहा कि वे वार्ड की जरूरत के अनुसार उनके लिए भी काम करेंगे। हालांकि युवाओं के लिए रोजगार, कौशल विकास या खेल सुविधाओं से संबंधित विस्तृत योजना अभी सामने नहीं रखी गई है। उनका कहना है कि वार्ड में जो भी जरूरी काम होंगे, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।

समर्थकों ने पिछले पांच साल पर उठाए सवाल

ग्राउंड बातचीत में कुछ स्थानीय लोगों ने पिछले पांच वर्षों में सीवरेज, सड़क और सफाई की समस्याओं के समाधान नहीं होने की शिकायत की। कुछ समर्थकों ने पूर्व पार्षद की कार्यशैली से भी नाराजगी जताई और दावा किया कि लोगों से पर्याप्त संपर्क नहीं रखा गया। ये स्थानीय निवासियों के व्यक्तिगत अनुभव और राजनीतिक राय हैं। संबंधित पूर्व पार्षद या राजनीतिक दल का पक्ष सामने आने पर उसे भी शामिल करना जरूरी होगा।

BJP से जुड़े लोग भी शर्मा के साथ होने का दावा

दिलचस्प बात यह रही कि बातचीत के दौरान कुछ लोगों ने खुद को भाजपा से लंबे समय से जुड़ा हुआ बताते हुए भी शंकरलाल शर्मा के समर्थन की बात कही। ऐसे लोगों का कहना था कि वे इस बार पार्टी से ज्यादा स्थानीय उम्मीदवार और उसके काम को प्राथमिकता दे रहे हैं। अगर यह रुझान व्यापक स्तर पर दिखाई देता है तो निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश कर सकता है।

हालांकि इसका वास्तविक असर मतदान के बाद ही साफ होगा। 

निर्दलीय प्रत्याशी बिगाड़ सकता है पूरा गणित

स्थानीय निकाय चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार कई बार भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौती बन जाते हैं। वार्ड स्तर के चुनाव में पार्टी के साथ उम्मीदवार की व्यक्तिगत पहचान, स्थानीय नेटवर्क और पिछले काम का असर भी महत्वपूर्ण होता है। वार्ड नंबर 62 में शंकरलाल शर्मा इसी मॉडल पर चुनाव लड़ते दिखाई दे रहे हैं। उनकी चुनावी रणनीति साफ है। पुराने विकास कार्य + व्यक्तिगत उपलब्धता + स्थानीय समस्याओं का समाधान।

शर्मा बोले- जनता का विश्वास नहीं टूटने दूंगा

शंकरलाल शर्मा ने कहा कि लोगों ने उन पर विश्वास जताया है और वे उस भरोसे को टूटने नहीं देंगे।

उन्होंने दावा किया कि अपने पहले कार्यकाल से जुड़े अनुभव के आधार पर वे वार्ड की समस्याओं को जानते हैं और मौका मिलने पर प्राथमिकता के साथ समाधान करेंगे। फिलहाल समर्थक उन्हें मजबूत दावेदार बता रहे हैं, लेकिन चुनाव का असली फैसला मतदाता करेंगे। वार्ड नंबर 62 में अब मुकाबला केवल भाजपा बनाम कांग्रेस नहीं रह गया है। शंकरलाल शर्मा की निर्दलीय एंट्री ने इसे त्रिकोणीय मुकाबले में बदलने की कोशिश जरूर कर दी है।