Janmashtami 2026: आज रात 11:57 बजे से जन्माष्टमी की पूजा, जानें निशीथ काल से व्रत पारण तक का पूरा समय

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई जाएगी। निशीथ काल में पूजा का शुभ मुहूर्त रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा, जबकि व्रत पारण 5 सितंबर को सुबह 6:01 बजे के बाद किया जा सकेगा।

Janmashtami 2026: आज रात 11:57 बजे से जन्माष्टमी की पूजा, जानें निशीथ काल से व्रत पारण तक का पूरा समय

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव यानी जन्माष्टमी का पर्व इस बार 4 सितंबर 2026 को मनाया जा रहा है। कृष्ण भक्तों के लिए यह दिन विशेष महत्व रखता है, क्योंकि मान्यता के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण का जन्म भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मध्यरात्रि में हुआ था। इसी वजह से जन्माष्टमी की पूजा में निशीथ काल का विशेष महत्व माना जाता है।

इस वर्ष जन्माष्टमी पर आधी रात में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने के लिए विशेष पूजा का मुहूर्त करीब 45 मिनट का रहेगा। इस दौरान श्रद्धालु विधि-विधान से लड्डू गोपाल की पूजा और अभिषेक कर सकेंगे।

रात 11:57 बजे से शुरू होगा पूजा का शुभ समय

जन्माष्टमी 2026 में श्रीकृष्ण जन्म की मुख्य पूजा के लिए निशीथ काल रात 11:57 बजे से शुरू होगा। यह शुभ समय रात 12:43 बजे तक रहेगा। यानी भक्तों को कृष्ण जन्मोत्सव की पूजा के लिए करीब 45 मिनट का विशेष समय मिलेगा।

इस अवधि में भगवान श्रीकृष्ण का पूजन, अभिषेक, आरती और भोग आदि किया जा सकता है। कई स्थानों पर मध्यरात्रि में भगवान के जन्म की झांकी सजाकर उत्सव मनाया जाएगा।

कब शुरू और कब खत्म होगी अष्टमी तिथि?

जन्माष्टमी के लिए अष्टमी तिथि का समय भी महत्वपूर्ण है। इस वर्ष अष्टमी तिथि 4 सितंबर 2026 की रात 2:25 बजे से शुरू होगी। वहीं अष्टमी तिथि का समापन 5 सितंबर 2026 की रात 12:13 बजे होगा।

ऐसे में जन्माष्टमी के व्रत और पूजा को लेकर तिथि के समय का विशेष ध्यान रखना जरूरी माना जाता है। अलग-अलग स्थानों पर पंचांग और स्थानीय परंपराओं के अनुसार पूजा एवं व्रत से जुड़े समय में मामूली अंतर हो सकता है।

5 सितंबर की सुबह होगा व्रत पारण

जन्माष्टमी का व्रत रखने वाले श्रद्धालुओं के लिए पारण का समय भी महत्वपूर्ण है। दिए गए मुहूर्त के अनुसार 5 सितंबर 2026 को सुबह 6:01 बजे के बाद व्रत पारण किया जा सकता है।

हालांकि, व्रत पारण की विधि और समय का निर्धारण कई परिवारों और धार्मिक परंपराओं में अलग-अलग तरीके से किया जाता है। इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना उचित रहेगा।

जन्माष्टमी पर बन रहे कई शुभ संयोग

ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस बार जन्माष्टमी पर कई शुभ योग बनने की बात कही जा रही है। इनमें जयंती योग, सर्वार्थ सिद्धि योग और बुधादित्य राजयोग प्रमुख बताए जा रहे हैं। धार्मिक दृष्टि से इन शुभ संयोगों को पूजा-पाठ और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है।

पंचामृत से करें लड्डू गोपाल का अभिषेक

जन्माष्टमी की मध्यरात्रि पूजा में भगवान श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप यानी लड्डू गोपाल का अभिषेक करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यता के अनुसार रात में पंचामृत से अभिषेक करना शुभ माना जाता है।

अभिषेक के बाद भगवान को नए वस्त्र और आभूषण पहनाकर उनका श्रृंगार किया जाता है। इसके बाद भोग लगाकर आरती की जाती है। कई घरों और मंदिरों में मध्यरात्रि के समय शंख-घंटियों के साथ श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाया जाता है।

जन्माष्टमी पर रखें इन समयों का ध्यान

जन्माष्टमी 2026 के प्रमुख समयों की बात करें तो अष्टमी तिथि 4 सितंबर की रात 2:25 बजे से शुरू होगी। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की मुख्य पूजा के लिए निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। अष्टमी तिथि 5 सितंबर की रात 12:13 बजे समाप्त होगी, जबकि व्रत पारण सुबह 6:01 बजे के बाद किया जा सकता है।

धार्मिक अनुष्ठान करने वाले श्रद्धालु अपने शहर के स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि जरूर कर लें, क्योंकि सूर्योदय और स्थानीय गणना के कारण मुहूर्त में थोड़ा अंतर संभव है।