नेपाल बाढ़ त्रासदी: मृतकों की संख्या 1,252 पहुंची, 4,216 लोग अब भी लापता

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ से भारी तबाही हुई है। अब तक 1,252 शव बरामद किए जा चुके हैं, 4,216 लोग लापता हैं और 11,993 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। हाइड्रोपावर सुरंगों में लापता लोगों की तलाश जारी है।

नेपाल बाढ़ त्रासदी: मृतकों की संख्या 1,252 पहुंची, 4,216 लोग अब भी लापता

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचाई है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक अब तक 1,252 लोगों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 4,216 लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान के दौरान अब तक 11,993 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है।

26 अगस्त को भोटेकोशी नदी क्षेत्र में आई इस आपदा ने कई गांवों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को बुरी तरह प्रभावित किया। पहाड़ों से अचानक आए पानी, बर्फ, चट्टानों और मलबे के तेज बहाव ने कई बस्तियों को कुछ ही समय में अपनी चपेट में ले लिया।

नेपाल सरकार के साथ अंतरराष्ट्रीय बचाव दल भी प्रभावित क्षेत्रों में लगातार तलाश और राहत अभियान चला रहे हैं।

4 हजार से ज्यादा लोगों का अब भी पता नहीं

आपदा के एक सप्ताह से ज्यादा समय बाद भी हजारों परिवार अपने परिजनों की तलाश में जुटे हैं।

नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार 4,216 लोग अभी भी लापता हैं। कई ऐसे इलाके हैं जहां भारी मलबे, टूटी सड़कों और खराब मौसम के कारण राहत दलों को पहुंचने में परेशानी हो रही है।

लापता लोगों में स्थानीय नागरिकों के अलावा विदेशी नागरिक और जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी भी शामिल हैं।

हाइड्रोपावर सुरंगों पर सबसे ज्यादा फोकस

रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों तक पहुंचने की है।

कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बाढ़ और मलबे से क्षतिग्रस्त हुए हैं। अलग-अलग रिपोर्ट्स के अनुसार लगभग 900 कर्मचारी इन परियोजनाओं और सुरंगों के आसपास लापता बताए जा रहे हैं।

बचाव टीमों को उम्मीद है कि कुछ लोग सुरंगों के अंदर सुरक्षित हिस्सों या एयर पॉकेट में फंसे हो सकते हैं। इसी संभावना को देखते हुए विशेषज्ञ टीमों को सुरंगों में भेजा जा रहा है।

भारत समेत कई देशों की टीमें मदद में जुटीं

नेपाल के बचाव अभियान में अंतरराष्ट्रीय सहायता भी ली जा रही है।

भारत की विशेष टनल रेस्क्यू टीमों को भी नेपाल भेजा गया है, जो प्रभावित हाइड्रोपावर सुरंगों में तलाश अभियान में मदद कर रही हैं। चीन, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों से भी तकनीकी और राहत सहायता पहुंचाई गई है।

नेपाल की सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के हजारों जवान भी राहत कार्यों में लगे हुए हैं।

करीब 12 हजार लोगों को सुरक्षित निकाला

बाढ़ के बाद अलग-अलग इलाकों से अब तक 11,993 लोगों का रेस्क्यू किया गया है।

कई प्रभावित क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया, जबकि जहां सड़क संपर्क पूरी तरह टूट गया है वहां अस्थायी रास्ते और वैकल्पिक साधन तैयार किए जा रहे हैं।

दूरदराज के इलाकों में खाने, पीने के पानी, दवाइयों और दूसरी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति भी चुनौती बनी हुई है।

सड़कें और पुल बहने से राहत अभियान मुश्किल

बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचाया है।

कई पुल टूट गए हैं और सड़कें मलबे से बंद हो गई हैं। नदी किनारे की बस्तियों में घर और व्यापारिक प्रतिष्ठान भी बह गए हैं।

कुछ इलाकों में नदी पार करने के लिए अस्थायी जिपलाइन जैसी व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया जा रहा है। राहत शिविरों में हजारों विस्थापित लोगों को रखा गया है।

हजारों परिवार बेघर, राहत शिविरों में शरण

बाढ़ के कारण बड़ी संख्या में मकान पूरी तरह नष्ट हो गए हैं या रहने योग्य नहीं बचे हैं।

सरकार के सामने अब केवल लापता लोगों को तलाशने की चुनौती नहीं है, बल्कि विस्थापित परिवारों के पुनर्वास की भी बड़ी जिम्मेदारी है।

राहत शिविरों में भोजन, पानी और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। कई स्थानों पर स्वास्थ्य शिविर भी लगाए गए हैं ताकि दूषित पानी और गंदगी के कारण बीमारियां फैलने से रोकी जा सकें।

ग्लेशियर और चट्टानों के टूटने से आई थी विनाशकारी बाढ़

शुरुआती वैज्ञानिक आकलन के मुताबिक हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के पास बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटने के बाद अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा नीचे आया।

इससे भोटेकोशी और उससे जुड़े नदी क्षेत्रों में बेहद तेज फ्लैश फ्लड की स्थिति पैदा हो गई।

नेपाल सरकार इस आपदा को हिमालयी क्षेत्रों में बढ़ रहे जलवायु जोखिमों से भी जोड़ रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लेशियर क्षेत्रों में होने वाले बदलाव भविष्य में ऐसी आपदाओं का खतरा बढ़ा सकते हैं।

लापता लोगों की तलाश अभी जारी

आपदा के कई दिन बीतने के बाद जीवित लोगों के मिलने की संभावना लगातार कम हो रही है, लेकिन बचाव एजेंसियों ने अभियान बंद नहीं किया है।

सबसे ज्यादा ध्यान मलबे से दबे इलाकों, नदी किनारे के क्षेत्रों और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की सुरंगों पर है।

अधिकारियों का कहना है कि शवों की बरामदगी और लापता लोगों की पहचान जारी रहने के कारण मृतकों और लापता लोगों की संख्या में आगे भी बदलाव हो सकता है।