कभी जर्जर था सरकारी स्कूल, अब बना मॉडल स्कूल: ग्रामीणों-शिक्षकों ने जुटाए 1 करोड़, बच्चों ने भी रिजल्ट से बढ़ाया मान

सीकर के दादिया गांव के सरकारी स्कूल की तस्वीर सामूहिक प्रयासों से बदल गई। करीब 1 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के साथ डिजिटल शिक्षा, खेल सुविधाएं और बेहतर रिजल्ट इसकी नई पहचान बने।

कभी जर्जर था सरकारी स्कूल, अब बना मॉडल स्कूल: ग्रामीणों-शिक्षकों ने जुटाए 1 करोड़, बच्चों ने भी रिजल्ट से बढ़ाया मान

राजस्थान में सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच सीकर जिले के दादिया गांव के एक सरकारी स्कूल ने अपनी बदली तस्वीर से अलग मिसाल पेश की है। कभी जर्जर भवन और सीमित सुविधाओं से जूझने वाला यह विद्यालय आज आधुनिक संसाधनों, डिजिटल शिक्षा और खेल सुविधाओं से लैस हो चुका है।

इस बदलाव के पीछे किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि पूरे गांव की सामूहिक कोशिश है। शिक्षकों ने पहल की, ग्रामीणों ने साथ दिया, भामाशाहों और जनप्रतिनिधियों ने सहयोग किया और अभिभावक भी स्कूल के विकास अभियान से जुड़े। इन सामूहिक प्रयासों से करीब 1 करोड़ रुपए के विकास कार्य कराए गए। अब स्कूल की बदली सूरत के साथ यहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों के परिणाम भी लगातार बेहतर हो रहे हैं।

 जर्जर भवन देखकर शुरू हुआ बदलाव का अभियान

स्कूल के कायाकल्प की कहानी अक्टूबर 2021 से शुरू हुई, जब राजेंद्र कुमार ने विद्यालय के प्रधानाचार्य का कार्यभार संभाला। उस समय स्कूल गांव के बीच स्थित पुराने भवन में संचालित हो रहा था और बच्चों की संख्या के मुकाबले सुविधाएं पर्याप्त नहीं थीं।

प्रधानाचार्य और शिक्षकों ने मिलकर स्कूल को बेहतर परिसर में संचालित करने की योजना बनाई। गांव में एक पुराना भवन बंद पड़ा था, लेकिन उसकी हालत भी काफी खराब थी। इसके बावजूद उसे विकसित कर स्कूल के नए परिसर के रूप में तैयार करने का विचार सामने आया।

26 जनवरी 2022 को ग्रामीणों के साथ बैठक हुई। चर्चा के बाद सर्वसम्मति से तय किया गया कि बंद पड़े भवन को नया रूप देकर वहीं स्कूल संचालित किया जाएगा। यहीं से गांव, स्कूल स्टाफ और समाज के सहयोग से एक बड़े बदलाव की शुरुआत हुई।

शिक्षकों ने पहले खुद जुटाए साढ़े तीन लाख रुपए

स्कूल को नया स्वरूप देने के लिए शुरुआत में शिक्षकों ने खुद आर्थिक सहयोग करने का फैसला किया। स्टाफ की ओर से करीब साढ़े तीन लाख रुपए जुटाए गए। इसके बाद ग्रामीणों और भामाशाहों ने भी इस अभियान में योगदान देना शुरू किया।

धीरे-धीरे जनप्रतिनिधियों, अभिभावकों और समाज के अन्य लोगों का सहयोग मिलता गया। अलग-अलग माध्यमों से संसाधन जुटे और स्कूल परिसर में विकास कार्यों की श्रृंखला शुरू हो गई। सामूहिक सहयोग से करीब 1 करोड़ रुपए के काम कराए गए।

 चार नए कमरे से लेकर डिजिटल सुविधाओं तक बदली तस्वीर

विद्यालय परिसर में विभिन्न योजनाओं और जनसहयोग से कई विकास कार्य पूरे किए गए। एमजेएसवाई योजना के तहत चार कमरों का निर्माण कराया गया। विधायक कोटे से दो अतिरिक्त कमरे बनाए गए, जबकि सांसद कोटे से बास्केटबॉल ग्राउंड विकसित किया गया।

इसके अलावा स्कूल की चारदीवारी की मरम्मत, रंग-रोगन और सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए गए। परिसर में मंच, टिन शेड, मां सरस्वती मंदिर, रसोईघर, भोजनशाला, मुख्य द्वार और शौचालय जैसी सुविधाएं भी विकसित की गईं।

आज विद्यालय में आधुनिक शिक्षण सुविधाओं के लिए दो IFPD पैनल और ICT लैब भी उपलब्ध है। डिजिटल संसाधनों के जरिए विद्यार्थियों को पढ़ाई से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

स्कूल की नई पहचान, रिजल्ट में भी दिखा बदलाव

बुनियादी ढांचे के विकास के साथ विद्यालय का शैक्षणिक प्रदर्शन भी बेहतर हुआ है। वर्ष 2022 से अब तक 21 से अधिक विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाओं में 90 प्रतिशत से ज्यादा अंक हासिल किए हैं।

इस वर्ष कक्षा 12 के एक विद्यार्थी ने 96 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। वहीं इतिहास विषय में एक विद्यार्थी ने 100 में से 100 अंक हासिल कर विशेष उपलब्धि दर्ज की। कक्षा 10 के एक विद्यार्थी ने संस्कृत विषय में शत-प्रतिशत अंक प्राप्त किए।

विद्यालय में बच्चों को बोर्ड परीक्षाओं के लिए विशेष तैयारी भी कराई जाती है। अर्धवार्षिक परीक्षाओं के बाद प्री-बोर्ड परीक्षा आयोजित कर विद्यार्थियों को मुख्य परीक्षा के माहौल और तैयारी के लिए तैयार किया जाता है।

 छात्रवृत्ति परीक्षाओं में भी बेहतर प्रदर्शन

विद्यालय के विद्यार्थियों ने केवल बोर्ड परीक्षाओं में ही नहीं, बल्कि छात्रवृत्ति परीक्षाओं में भी अपनी पहचान बनाई है। अब तक 12 विद्यार्थियों का चयन NMMS परीक्षा में हो चुका है। चयनित विद्यार्थियों को 48-48 हजार रुपए की छात्रवृत्ति दी जाती है।

इसके अलावा STSC परीक्षा में विद्यालय की एक छात्रा का चयन हुआ है। छात्रा को डेढ़ लाख रुपए की छात्रवृत्ति मिलने की बात कही गई है।

खेलकूद में भी राज्य स्तर तक पहुंच चुके हैं विद्यार्थी

विद्यालय में फिलहाल 200 से अधिक विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। यहां पढ़ाई के साथ खेलकूद और अन्य गतिविधियों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। स्कूल के खिलाड़ी राज्य स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं तक पहुंचकर हिस्सा ले चुके हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की सफलता के पीछे प्रधानाचार्य और शिक्षकों का लगातार संवाद अहम रहा। ग्रामीण लक्की, बृजसुंदर आर्य और आनंदलाल के अनुसार, स्कूल के विकास अभियान में पूरे गांव और भामाशाहों ने अपनी भूमिका निभाई।

ग्रामीणों ने माना कि कुछ अनुभवी शिक्षकों के तबादले के बाद उनकी कमी जरूर महसूस हुई, लेकिन नए स्टाफ के साथ भी विद्यालय की शिक्षा व्यवस्था और बेहतर बनाने के प्रयास जारी हैं।

सामूहिक प्रयास से बदली सरकारी स्कूल की तस्वीर

दादिया का यह सरकारी स्कूल अब इस बात की मिसाल बन रहा है कि जब स्कूल प्रशासन, शिक्षक, ग्रामीण, अभिभावक, भामाशाह और जनप्रतिनिधि एक लक्ष्य के लिए साथ आते हैं, तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़ा बदलाव संभव है।

करीब 1 करोड़ रुपए के विकास कार्यों से स्कूल का ढांचा बदला, लेकिन उससे भी महत्वपूर्ण बदलाव विद्यार्थियों के आत्मविश्वास और प्रदर्शन में दिखाई दिया। जर्जर भवन से शुरू हुई यह यात्रा अब एक ऐसे आधुनिक सरकारी स्कूल तक पहुंच गई है, जहां डिजिटल शिक्षा, खेल सुविधाएं और बेहतर शैक्षणिक परिणाम इसकी नई पहचान बन चुके हैं।