कोटा में पहली बार महिलाओं के हाथ होगी शहरी और ग्रामीण सरकार की कमान, महापौर और जिला प्रमुख पद महिला के लिए आरक्षित

कोटा नगर निगम महापौर पद OBC महिला और जिला प्रमुख पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुआ। जानिए आरक्षण के बाद BJP-कांग्रेस की रणनीति और संभावित उम्मीदवारों की पूरी जानकारी।

कोटा में पहली बार महिलाओं के हाथ होगी शहरी और ग्रामीण सरकार की कमान, महापौर और जिला प्रमुख पद महिला के लिए आरक्षित

कोटा की स्थानीय राजनीति में इस बार बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। आने वाले निकाय और पंचायती राज चुनाव के बाद शहर और ग्रामीण क्षेत्र की कमान महिलाओं के हाथों में जाने का रास्ता साफ हो गया है। जयपुर में गुरुवार को निकाली गई आरक्षण लॉटरी में कोटा नगर निगम का महापौर पद ओबीसी महिला और जिला प्रमुख का पद महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है।

आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही दलों में संभावित महिला उम्मीदवारों के नामों पर मंथन शुरू हो गया है। खास बात यह है कि कोटा में पहली बार महापौर और जिला प्रमुख दोनों महत्वपूर्ण पदों पर महिलाओं के पहुंचने की संभावना बनी है।

ओबीसी महिला के लिए आरक्षित हुआ महापौर पद

कोटा नगर निगम के महापौर पद को इस बार ओबीसी महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। आरक्षण सामने आते ही दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों ने संभावित उम्मीदवारों की तलाश शुरू कर दी है।

भाजपा और कांग्रेस में ओबीसी वर्ग से जुड़ी कई महिला कार्यकर्ताओं और पूर्व पार्षदों के नाम चर्चा में आने लगे हैं। हालांकि, अभी तक किसी नाम पर आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है। दोनों दल स्थानीय समीकरणों और संगठन में सक्रिय महिला नेताओं की राजनीतिक स्थिति को देखते हुए उम्मीदवार तय करने की तैयारी में हैं।

कोटा नगर निगम के इतिहास में सुमन शृंगी पहली महिला महापौर रह चुकी हैं। अब ओबीसी महिला के लिए सीट आरक्षित होने के बाद एक बार फिर महिला नेतृत्व को नगर निगम की कमान मिलने की संभावना है।

नए बोर्ड में कोटा दक्षिण का रहेगा प्रभाव

कोटा नगर निगम में कुल 100 वार्ड हैं। इनमें सबसे ज्यादा 40 वार्ड कोटा दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में आते हैं। ऐसे में आगामी नगर निगम बोर्ड में कोटा दक्षिण क्षेत्र से चुने जाने वाले पार्षदों की भूमिका अहम रहने की संभावना है।

इसके बाद कोटा उत्तर विधानसभा क्षेत्र में 30 वार्ड हैं। लाडपुरा विधानसभा क्षेत्र में 24 और रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र में 6 वार्ड शामिल हैं। इन क्षेत्रों के राजनीतिक समीकरणों का असर महापौर के चुनाव पर भी पड़ सकता है।

भाजपा-कांग्रेस में संभावित चेहरों पर मंथन

महापौर पद का आरक्षण ओबीसी महिला के लिए होने के बाद भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने अब उम्मीदवार चयन की चुनौती है। दोनों दलों में संभावित महिला चेहरों को लेकर अंदरूनी स्तर पर चर्चा शुरू हो गई है।

स्थानीय संगठन में सक्रियता, पार्षद के तौर पर अनुभव और पार्टी के भीतर पकड़ जैसे कई पहलुओं को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार का चयन किया जा सकता है। आने वाले दिनों में राजनीतिक दलों की गतिविधियां और तेज होने की संभावना है।

जिला प्रमुख का पद भी महिला के लिए आरक्षित

कोटा जिले में जिला प्रमुख का पद भी इस बार महिला वर्ग के लिए आरक्षित किया गया है। इसके साथ ही ग्रामीण राजनीति में भी महिला नेतृत्व की भूमिका बढ़ने वाली है।

कोटा का पंचायती राज व्यवस्था के इतिहास में विशेष स्थान रहा है। वर्ष 1960 में देश में पंचायती राज व्यवस्था लागू होने के बाद कोटा की नगेन्द्र बाला पहली महिला जिला प्रमुख बनी थीं। अब एक बार फिर जिला प्रमुख की कुर्सी महिला के खाते में गई है।

अब तक कोटा में चार महिलाएं जिला प्रमुख का पद संभाल चुकी हैं। वहीं, पूर्व मंत्री और कोटा उत्तर विधायक शांति धारीवाल समेत कई दिग्गज नेता भी इस पद पर रह चुके हैं।

25 जिला परिषद सदस्य चुनेंगे जिला प्रमुख

कोटा जिला परिषद में कुल 25 वार्ड हैं। चुनाव के बाद चुने गए 25 जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख का चुनाव करेंगे। ऐसे में जिला प्रमुख पद के लिए राजनीतिक दलों की रणनीति और सदस्य संख्या काफी महत्वपूर्ण होगी।

महिला आरक्षण के बाद अब भाजपा और कांग्रेस दोनों ही ग्रामीण क्षेत्र में मजबूत महिला उम्मीदवारों की तलाश में जुटेंगे। स्थानीय समीकरणों और पार्टी की स्थिति के आधार पर जिला प्रमुख पद के लिए मुकाबला दिलचस्प होने की उम्मीद है।

कोटा की राजनीति में बढ़ेगी महिला भागीदारी

महापौर और जिला प्रमुख दोनों पदों के महिला वर्ग के लिए आरक्षित होने से कोटा की स्थानीय राजनीति में महिलाओं की भागीदारी बढ़ने की संभावना है। आने वाले निकाय और पंचायती राज चुनावों में महिला उम्मीदवारों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि भाजपा और कांग्रेस किसे महापौर और जिला प्रमुख पद के लिए मैदान में उतारती हैं। उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद कोटा की स्थानीय राजनीति के समीकरण और स्पष्ट होंगे।