सभापति चुनाव के बीच हनुमानगढ़ में बड़ा घटनाक्रम, विधायक गणेशराज बंसल गिरफ्तार; 4 दिन के रिमांड पर
हनुमानगढ़ नगर परिषद सभापति चुनाव से पहले निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की कथित फर्जी पट्टा मामले में CID-CB द्वारा गिरफ्तारी से स्थानीय राजनीति गरमा गई है। बंसल गुट के निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर भी निगाहें टिकी हैं।
हनुमानगढ़ में नगर परिषद सभापति चुनाव के बीच निर्दलीय विधायक गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी ने स्थानीय राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। कथित फर्जी पट्टा मामले में गिरफ्तार विधायक को सोमवार सुबह संगरिया की MJM कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 4 दिन के रिमांड पर भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। CID-CB की टीम सुबह करीब 6 बजे कड़ी सुरक्षा के बीच विधायक को कोर्ट लेकर पहुंची थी।
गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी ऐसे समय हुई है, जब हनुमानगढ़ नगर परिषद के सभापति पद के लिए सोमवार को ही चुनाव होना है। यही वजह है कि इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। हालांकि, गिरफ्तारी का आधार जांच एजेंसी की कार्रवाई और दर्ज मामले हैं, जबकि इसके चुनाव पर असर को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
कोर्ट में पेशी के बाद 4 दिन का रिमांड
CID-CB की टीम विधायक गणेशराज बंसल को सुबह करीब 6 बजे संगरिया की MJM कोर्ट लेकर पहुंची। कोर्ट में जांच एजेंसी की ओर से पूछताछ के लिए रिमांड मांगा गया। इसके बाद विधायक को 4 दिन के रिमांड पर भेजे जाने की जानकारी सामने आई। कोर्ट की प्रक्रिया पूरी होने के बाद CID-CB टीम उन्हें कुछ समय के लिए संगरिया थाने भी लेकर गई।
रिमांड के दौरान जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य तथ्यों को लेकर पूछताछ कर सकती है। यह मामला करीब 23 साल पुराने कथित फर्जी पट्टे प्रकरण से जुड़ा बताया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस मामले में विधायक और उनके परिवार से जुड़े लोगों समेत अन्य के खिलाफ प्रकरण दर्ज होने की जानकारी सामने आई है।
2003 के पुराने मामले में हुई कार्रवाई
गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी जिस मामले में हुई है, वह वर्ष 2003 से जुड़ा बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक मामला कथित तौर पर जमीन के पट्टे जारी करने में गड़बड़ी और उससे जुड़े आरोपों का है। CID-CB और पुलिस की विशेष टीम ने विधायक को पहले हिरासत में लिया और पूछताछ के बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की।
मामले में आरोपों की अंतिम स्थिति जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी। विधायक की ओर से गिरफ्तारी को लेकर राजनीतिक सवाल भी उठाए गए हैं, जबकि जांच एजेंसी की कार्रवाई मामले की जांच से जुड़ी बताई गई है।
सभापति चुनाव से ठीक पहले गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
इस पूरे घटनाक्रम का सबसे अहम पहलू हनुमानगढ़ नगर परिषद का सभापति चुनाव है। 60 वार्ड वाली नगर परिषद के चुनाव परिणामों में भाजपा के 15, कांग्रेस के 10 और माकपा के एक पार्षद के अलावा बंसल समर्थित निर्दलीय पार्षदों की बड़ी संख्या सामने आई थी। अलग-अलग रिपोर्टों में बंसल गुट के निर्दलीय पार्षदों की संख्या 32 से 34 बताई गई है।
ऐसे में सभापति चुनाव से ठीक पहले विधायक की गिरफ्तारी के बाद अब निगाहें इस बात पर हैं कि उनके समर्थक पार्षद मतदान के दौरान किस तरह आगे बढ़ते हैं। बंसल खेमे की ओर से मंजू रणवां को सभापति पद का उम्मीदवार बनाए जाने की भी रिपोर्ट सामने आई है।
## गिरफ्तारी के विरोध में समर्थकों का प्रदर्शन
विधायक की गिरफ्तारी की सूचना के बाद उनके समर्थकों और समर्थक पार्षदों की ओर से विरोध प्रदर्शन किया गया। स्थानीय रिपोर्टों के अनुसार समर्थकों ने पुलिस थाने के बाहर प्रदर्शन और घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए और इसे निकाय चुनाव के घटनाक्रम से जोड़कर आरोप लगाए।
प्रशासन की ओर से चुनाव प्रक्रिया को शांतिपूर्ण और निष्पक्ष तरीके से कराने का भरोसा दिए जाने के बाद प्रदर्शन समाप्त होने की जानकारी भी सामने आई है।
अब दो मोर्चों पर नजर
हनुमानगढ़ में फिलहाल पूरा घटनाक्रम दो स्तरों पर देखा जा रहा है। एक तरफ CID-CB की जांच और विधायक का 4 दिन का रिमांड है, वहीं दूसरी तरफ नगर परिषद सभापति चुनाव है। विधायक की गिरफ्तारी के बाद उनके समर्थक पार्षदों की भूमिका और मतदान के दौरान सामने आने वाला राजनीतिक समीकरण स्थानीय राजनीति के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
अब देखना होगा कि सभापति चुनाव में मतदान का अंतिम गणित क्या रहता है और जांच एजेंसी की कार्रवाई आगे किस दिशा में बढ़ती है। फिलहाल गणेशराज बंसल की गिरफ्तारी और सभापति चुनाव का एक ही समय पर होना हनुमानगढ़ के स्थानीय राजनीतिक घटनाक्रम का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।

