मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला, ट्रंप के दावों के बीच बढ़ा तनाव

अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक केशम द्वीप पर हमला किया है। होर्मुज जलडमरूमध्य के पास हुई इस कार्रवाई से ट्रंप के बयान और अमेरिका-ईरान तनाव पर सवाल उठे हैं।

मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले ईरान के केशम द्वीप पर अमेरिकी हमला, ट्रंप के दावों के बीच बढ़ा तनाव

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच एक बार फिर सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई है। अमेरिकी सेना ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण केशम द्वीप पर हमला किया है। यह कार्रवाई अमेरिका के मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले सोमवार को हुई। अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने इस हमले की पुष्टि की है। वहीं ईरानी सरकारी मीडिया ने भी द्वीप पर कई धमाकों की जानकारी दी। इस घटनाक्रम ने दोनों देशों के बीच पहले से जारी तनाव को फिर चर्चा में ला दिया है।

केशम द्वीप पर क्यों हुई कार्रवाई?

केशम द्वीप होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रवेश द्वार के पास स्थित है। इसकी रणनीतिक अहमियत काफी ज्यादा है। यहां मिसाइल से जुड़ी सैन्य सुविधाएं और नौसैनिक ठिकाना मौजूद हैं। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया अमेरिकी कार्रवाई सीमित हमलों की श्रृंखला का हिस्सा थी। अमेरिकी अधिकारियों ने इन्हें क्षेत्र में समुद्री जहाजों के लिए खतरा पैदा करने वाली ईरानी क्षमताओं को सीमित करने के उद्देश्य से की गई रक्षात्मक कार्रवाई बताया है।

हालांकि, हमले में कितना नुकसान हुआ और किन ठिकानों को निशाना बनाया गया, इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से भी तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया।

ट्रंप के बयान और सैन्य कार्रवाई के बीच विरोधाभास

इस घटनाक्रम को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अक्टूबर में कहा था कि अमेरिका 3 नवंबर के मिडटर्म चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। उन्होंने दोनों देशों के बीच बातचीत को सकारात्मक बताया था। लेकिन केशम द्वीप पर सोमवार को हुई कार्रवाई की खबर ने उनके सार्वजनिक बयान और अमेरिकी सैन्य गतिविधियों के बीच सवाल खड़े कर दिए हैं।

हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक यह हमला सीमित सैन्य कार्रवाइयों की श्रृंखला का हिस्सा था, जिसे अमेरिका ने सार्वजनिक रूप से प्रमुखता नहीं दी थी। ट्रंप ने हालिया बयानों में ईरान के साथ समझौते की संभावना भी जताई थी।

सीजफायर की स्थिति क्या है?

अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ अंतरिम समझौता कुछ ही सप्ताह में लड़ाई और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर विवादों के बीच कमजोर पड़ गया था। बाद में यह समझौता औपचारिक रूप से अगस्त में समाप्त हो गया। ऐसे में केशम द्वीप पर हुई कार्रवाई को किसी नए सीजफायर के तत्काल टूटने के रूप में पेश करना सही नहीं होगा।

फिलहाल इस हमले के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है। दुनिया की नजर इस बात पर है कि ईरान की ओर से क्या प्रतिक्रिया आती है और क्या दोनों देश बातचीत के जरिए तनाव कम करने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।