नोट लेते वीडियो वायरल हुआ तो गई कुर्सी: पदमपुर तहसील का पेशकार कृष्ण कुमार निलंबित, श्रीगंगानगर में एक महीने में दूसरा पेशकार गिरी गाज

श्रीगंगानगर की पदमपुर तहसील के पेशकार कृष्ण कुमार बारहठ का कथित रिश्वत वीडियो वायरल होने पर जिला कलक्टर ने किया निलंबित। जैतसर में लगाया गया, जांच जारी।

नोट लेते वीडियो वायरल हुआ तो गई कुर्सी: पदमपुर तहसील का पेशकार कृष्ण कुमार निलंबित, श्रीगंगानगर में एक महीने में दूसरा पेशकार गिरी गाज

सरकारी दफ्तरों में जायज काम के लिए भी रिश्वत देनी पड़े तो सिस्टम पर सवाल उठना तय है। श्रीगंगानगर जिले में अब पदमपुर तहसील के पेशकार पर कार्रवाई हुई है। कथित तौर पर रिश्वत लेते हुए उनका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिला कलक्टर ने उन्हें निलंबित कर दिया।

तीन-चार दिन से घूम रहा था वीडियो

पदमपुर तहसील कार्यालय में तैनात पेशकार कृष्ण कुमार बारहठ का वीडियो बीते तीन-चार दिन से सोशल मीडिया पर चल रहा था। दावा है कि इसमें वे किसी परिवादी का काम करने के बदले रकम लेते दिख रहे हैं। इसी वीडियो के आधार पर जिला कलक्टर डॉ. अमित यादव ने उन्हें निलंबित किया।

तहसीलदार ने की पुष्टि

पदमपुर तहसीलदार सूर्यदेव स्वामी ने निलंबन की पुष्टि करते हुए बताया कि कार्रवाई वायरल वीडियो के आधार पर हुई है। निलंबन अवधि में बारहठ को उप तहसील जैतसर में लगाया गया है और उनके खिलाफ मामले की जांच विचाराधीन है। वायरल वीडियो की सत्यता की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पहले भी गिर चुकी है गाज

इससे पहले श्रीगंगानगर के उपखंड अधिकारी कार्यालय में तैनात पेशकार दीपक रहेजा पर भी तारीख देने और दूसरे कामों के बदले रिश्वत मांगने के आरोप लगे थे। मामला तब खुला जब रिश्वत की मांग से परेशान एक बुजुर्ग ने जिला कलक्टर को अपनी पीड़ा बताई।

कलक्टर ने बुजुर्ग को अपने हस्ताक्षर वाला एक नोट दिया और वही नोट पेशकार को देने को कहा। बुजुर्ग ने ऐसा ही किया। नोट पेशकार की जेब में पहुंचते ही कार्रवाई हुई और नोट बरामद कर लिया गया। इसके बाद रहेजा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर घड़साना भेज दिया गया।

व्यवस्था पर उठे सवाल

दो अलग-अलग दफ्तरों में पेशकार जैसे पदों पर बैठे कर्मचारियों पर रिश्वत के आरोप सामने आने से राजस्व और उपखंड कार्यालयों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। तारीख पेशी से लेकर परिवादियों के कामकाज तक की प्रक्रिया आम आदमी के लिए बेहद अहम है। ऐसे में सवाल यही है कि कार्रवाई के साथ-साथ ऐसी व्यवस्था कब बनेगी जिसमें लोगों को जायज काम के लिए रिश्वत देने की नौबत ही न आए।