फलोदी बोरवेल हादसा: 640 फीट गहराई में फंसा 9 साल का भोमाराम, कैमरे में नहीं दिख रहा मूवमेंट

राजस्थान के फलोदी में 9 वर्षीय भोमाराम 640 फीट गहरे बोरवेल में फंसा है। पत्थर के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा आ रही है और बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं।

फलोदी बोरवेल हादसा: 640 फीट गहराई में फंसा 9 साल का भोमाराम, कैमरे में नहीं दिख रहा मूवमेंट

राजस्थान के फलोदी जिले में बोरवेल में गिरे 9 वर्षीय भोमाराम को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।** पूनिया की ढाणी में हुए इस हादसे के बाद बच्चे को निकालने के कई प्रयास किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है। रेस्क्यू टीम को बोरवेल के भीतर फंसे पत्थर के कारण परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, कैमरे में बच्चे का मूवमेंट दिखाई नहीं देने से चिंता बढ़ गई है। हालांकि, कैमरे में हलचल नजर नहीं आने से बच्चे की स्थिति की पुष्टि नहीं होती है।

640 फीट की गहराई में फंसा है बच्चा

जानकारी के अनुसार, भोमाराम गुरुवार, 15 अक्टूबर को फलोदी जिले के पूनिया की ढाणी में 1050 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया था। बच्चा करीब 640 फीट की गहराई में फंसा हुआ है। हादसे के बाद से ही उसे सुरक्षित बाहर निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं।

रेस्क्यू ऑपरेशन में पहले एसडीआरएफ और फिर एनडीआरएफ की मदद ली गई। कई प्रयासों के बावजूद बच्चे को बाहर नहीं निकाला जा सका है। शुक्रवार सुबह बोरवेल में कैमरा डालकर बच्चे की स्थिति देखने की कोशिश की गई, लेकिन कैमरा करीब 30 फीट से आगे नहीं बढ़ पा रहा है।

पत्थर बना रेस्क्यू ऑपरेशन में बाधा

बच्चे को बाहर निकालने के प्रयासों के दौरान बोरवेल के अंदर फंसा पत्थर बड़ी बाधा बन गया है। इसे हटाने के लिए देसी जुगाड़ की मदद से लोहे का जाल तैयार कर बोरवेल में डाला गया, लेकिन यह कोशिश भी सफल नहीं हुई।

शुक्रवार को पत्थर निकालने के लिए दूसरा प्रयास भी विफल रहा। इसके बाद कैमरे की मदद से पत्थर के आकार और उसकी स्थिति का पता लगाकर नए उपकरण तैयार करने की कोशिश की जा रही है, ताकि अगला प्रयास अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सके।

मौके पर पहुंचे स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह

बोरवेल हादसे की जानकारी मिलने के बाद स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर मौके पर पहुंचे। उन्होंने घटनास्थल पर पहुंचकर हालात का जायजा लिया और रेस्क्यू अभियान की जानकारी ली।

बच्चे को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव दल लगातार प्रयास कर रहे हैं। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन के सामने सबसे बड़ी चुनौती पत्थर को हटाकर बच्चे तक पहुंच बनाना है।