मेरी अंगुलियां गली, पैरों को काटने तक की नौबत आई, लेकिन एवरेस्ट किया विजय, रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

उदयपुर की पर्वतारोही डॉ. मनस्वी अग्रवाल ने मई 2026 में माउंट एवरेस्ट फतह किया। वापसी में फ्रॉस्टबाइट से लगा कि मैं छह अंगुलियां गंवा दूंगी साथ ही टीम के दो सदस्यों की मौत हो गई। नौ महीने में पांच महाद्वीपों की सबसे ऊंची चोटियां फतह करने वाली मनस्वी की संघर्षपूर्ण कहानी।

मेरी अंगुलियां गली, पैरों को काटने तक की नौबत आई, लेकिन एवरेस्ट किया विजय, रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी

दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराने वाली उदयपुर की डॉ. मनस्वी अग्रवाल के लिए यह अभियान जिंदगी का सबसे कठिन अनुभव बन गया। एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने के बाद जब वे वापस लौट रही थीं, तब अत्यधिक ठंड के कारण उनके पैरों की अंगुलियां सुन्न पड़ गईं। नसों में दर्द शुरू हो गया और हालत इतनी गंभीर हो गई कि दोनों पैर काटने तक की नौबत आ गई। 

मनस्वी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि एवरेस्ट पर सैकड़ों पर्वतारोहियों के शव देखकर एक पल के लिए उन्हें लगा कि कहीं वे भी इसी पहाड़ पर न रह जाएं। हालांकि उन्होंने अपने प्रशिक्षण पर भरोसा रखा और आगे बढ़ती रहीं।

मई 2026 में माउंट एवरेस्ट फतह करने वाली मनस्वी अग्रवाल राजस्थान की पहली सामान्य नागरिक श्रेणी की महिला पर्वतारोही बनीं। उनसे पहले राजस्थान की तीन महिलाएं एवरेस्ट पर पहुंच चुकी थीं, जो सेना, अर्धसैनिक बल या सरकारी संस्थानों से जुड़ी थीं।

21 मई को एवरेस्ट की चोटी पर फहराया तिरंगा

मनस्वी अग्रवाल ने मार्च के अंतिम सप्ताह में माउंट एवरेस्ट अभियान के लिए अपनी यात्रा शुरू की थी।

6 मई को वे एवरेस्ट बेस कैंप पहुंचीं और 15 मई को शिखर की ओर अंतिम चढ़ाई शुरू की। 21 मई 2026 को शाम करीब चार बजे उन्होंने माउंट एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचकर भारतीय तिरंगा फहराया। मनस्वी के अनुसार, चोटी पर पहुंचने के बाद वे अपनी सारी थकान भूल गई थीं। उन्हें लगा कि राजस्थान जैसे राज्य की लड़कियां भी पर्वतारोहण में बड़ी उपलब्धियां हासिल कर सकती हैं।

एवरेस्ट से उतरते वक्त शुरू हुई जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई

मनस्वी ने बताया कि एवरेस्ट की चोटी पर पहुंचने की खुशी के बाद उन्हें अंदाजा नहीं था कि वापसी कितनी खतरनाक होने वाली है। उतरते समय उनके पैरों की दसों अंगुलियों में संवेदना खत्म होने लगी। इसके बाद नसों में तेज दर्द शुरू हुआ। तब उन्हें फ्रॉस्टबाइट होने का अहसास हुआ। करीब 8,500 मीटर की ऊंचाई से उन्हें 6,200 मीटर पर स्थित कैंप-2 तक पहुंचना था। हेलिकॉप्टर से रेस्क्यू की सुविधा वहीं उपलब्ध थी। मनस्वी के अनुसार, गंभीर तकलीफ के बावजूद उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ा। काठमांडू के नॉर्विक अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उनके पैरों की स्थिति देखकर चिंता जताई। दोनों पैर काटने तक की नौबत आ गई थी। हालांकि इलाज के बाद उनके पैर ठीक होने लगे।

'एवरेस्ट पर शव देखकर लगा, कहीं मैं भी यहीं न रह जाऊं'

एवरेस्ट अभियान के दौरान मनस्वी ने अपने सबसे डरावने अनुभव के बारे में भी बताया। उनके अनुसार, एवरेस्ट पर 300 से 400 पर्वतारोहियों के शव पड़े होने की बात सामने आती है। मनस्वी ने बताया कि शव देखकर एक पल के लिए उनके मन में ख्याल आया कि कहीं वे भी इसी पहाड़ पर न रह जाएं। लेकिन अगले ही पल उन्हें अपनी ट्रेनिंग याद आई। उनका मानना है कि पर्वतारोहण में सबसे जरूरी बात सही समय पर वापस लौटने का निर्णय लेना है। 

अभियान में दो साथियों की मौत

मनस्वी के एवरेस्ट अभियान में आठ सदस्य शामिल थे। इनमें से दो सदस्यों की मौत हो गई, जबकि चार सदस्य शिखर तक नहीं पहुंच सके। मनस्वी और एक अन्य पर्वतारोही ने सफलतापूर्वक शिखर पर पहुंचकर तिरंगा फहराया। मनस्वी ने बताया कि हैदराबाद के अरुण और आंध्र प्रदेश के संदीप उनके साथ करीब 50 दिन तक रहे थे। दोनों उनका छोटी बहन की तरह ख्याल रखते थे। मनस्वी के अनुसार, अरुण शिखर के पास उनसे लगभग आधे घंटे की दूरी पर थे। बाद में उन्हें पता चला कि वे वापस नहीं लौट सके। वहीं संदीप की भी अभियान के दौरान मौत हो गई। इन दोनों साथियों को खोना मनस्वी के लिए बेहद दुखद अनुभव रहा।

नौ महीने में पांच महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियां फतह कीं

मनस्वी अग्रवाल ने अगस्त 2025 से मई 2026 के बीच नौ महीनों में पांच महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर सफल आरोहण किया। इनमें यूरोप की माउंट एल्ब्रुस, अफ्रीका की माउंट किलिमंजारो, अंटार्कटिका की माउंट विन्सन मैसिफ, दक्षिण अमेरिका की माउंट अकोंकागुआ और एशिया की माउंट एवरेस्ट शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वे अंटार्कटिका के माउंट विन्सन मैसिफ पर पहुंचने वाली राजस्थान की पहली पर्वतारोही भी हैं। मनस्वी ने बताया कि पांचों अभियानों की योजना पहले से एक साथ तैयार नहीं की गई थी। अलग-अलग पर्वतारोहण अभियानों के लिए अनुकूल मौसम मिलने के कारण वे लगातार आगे बढ़ती गईं। 

अंटार्कटिका में माइनस 50 डिग्री तापमान का सामना किया

माउंट विन्सन मैसिफ अभियान के दौरान मनस्वी को अत्यधिक ठंड और कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार, अंटार्कटिका में तापमान माइनस 40 से माइनस 50 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था। वहां भारी सामान के साथ बर्फीले रास्तों पर आगे बढ़ना चुनौतीपूर्ण था। इसके बाद उन्होंने दक्षिण अमेरिका के माउंट अकोंकागुआ अभियान की तैयारी जारी रखी।

माउंट आबू से शुरू की पर्वतारोहण की ट्रेनिंग

मनस्वी ने पर्वतारोहण का प्रशिक्षण माउंट आबू में रॉक क्लाइंबिंग से शुरू किया। इसके बाद उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में बेसिक माउंटेनियरिंग की ट्रेनिंग ली। दार्जिलिंग के हिमालयन माउंटेनियरिंग इंस्टीट्यूट में ऊंचाई वाले क्षेत्रों के लिए विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। एवरेस्ट अभियान से पहले मनाली और लेह-लद्दाख में भी अभ्यास किया। मनस्वी के अनुसार, प्रशिक्षकों ने उनकी तैयारी का आकलन करने के बाद ही उन्हें एवरेस्ट अभियान के लिए आगे बढ़ने की अनुमति दी।

एवरेस्ट अभियान पर खर्च हुए करीब 35 लाख रुपए

मनस्वी ने बताया कि एवरेस्ट अभियान पर करीब 35 लाख रुपए खर्च हुए। इस खर्च को पूरा करने में उनके परिवार और रिश्तेदारों ने सहयोग किया। उदयपुर में उनके पिता के माध्यम से कुछ प्रायोजकों का भी सहयोग मिला। मनस्वी के अनुसार, पर्वतारोहण में खराब मौसम के साथ आर्थिक संसाधनों की व्यवस्था भी बड़ी चुनौती होती है।

कानून की प्रोफेसर, निशानेबाज और घुड़सवार भी हैं मनस्वी

मनस्वी अग्रवाल ने गुजरात नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से विधि की पढ़ाई की है। उन्होंने पर्यावरण कानून विषय पर शोध किया है और विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की सहायक आचार्य पात्रता परीक्षा में 99.2 पर्सेंटाइल प्राप्त किए हैं। वे सिंघानिया लॉ कॉलेज में सहायक आचार्य के रूप में अध्यापन कार्य से भी जुड़ी हैं। इसके अतिरिक्त मनस्वी निशानेबाजी और घुड़सवारी में भी सक्रिय रही हैं। उनका मानना है कि पर्वतारोहण, घुड़सवारी और निशानेबाजी तीनों में आत्मनियंत्रण, अनुशासन और एकाग्रता महत्वपूर्ण हैं।

मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किया सम्मानित

15 अगस्त 2026 को बीकानेर में आयोजित राज्य स्तरीय समारोह में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने मनस्वी अग्रवाल को सम्मानित किया। मनस्वी ने इस सम्मान पर खुशी जताते हुए कहा कि वे चाहती हैं कि राजस्थान की दूसरी लड़कियां भी पर्वतारोहण सहित अलग-अलग क्षेत्रों में आगे बढ़ें।

अब डेनाली और ऑस्ट्रेलिया की चोटी पर नजर

एवरेस्ट अभियान के दौरान फ्रॉस्टबाइट से प्रभावित होने के बावजूद मनस्वी पर्वतारोहण जारी रखना चाहती हैं। उनका अगला लक्ष्य उत्तरी अमेरिका के माउंट डेनाली और ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी पर सफल आरोहण करना है। इन दोनों चोटियों को फतह करने के बाद वे प्रतिष्ठित 'सेवन समिट्स' अभियान पूरा करना चाहती हैं। मनस्वी ने बताया कि फ्रॉस्टबाइट के कारण उन्हें अभी सामान्य जूते पहनने में परेशानी होती है और सैंडल पहनने में अधिक आराम मिलता है। वे भविष्य में पर्वतारोहियों के रेस्क्यू से जुड़े नियमों और व्यवस्थाओं में सुधार की भी उम्मीद रखती हैं, ताकि किसी दूसरे पर्वतारोही को ऐसी कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

'सबसे बड़ा पहाड़ अपने मन का होता है'

मनस्वी अग्रवाल का मानना है कि हर इंसान के मन में एक पहाड़ होता है। यदि इंसान अपने मन की चुनौतियों पर विजय प्राप्त कर ले, तो वह बड़े से बड़ा लक्ष्य हासिल कर सकता है। एवरेस्ट अभियान में दो साथियों को खोने, गंभीर फ्रॉस्टबाइट और लंबे इलाज जैसी कठिनाइयों के बावजूद मनस्वी का अगला लक्ष्य स्पष्ट है। वे दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों पर तिरंगा फहराने का अपना सपना पूरा करना चाहती हैं।