सांवलिया सेठ को अनोखी भेंट, चांदी का सीमेंट प्लांट लेकर 40 KM पैदल आया परिवार

चित्तौड़गढ़ के सांवलियाजी मंदिर में निम्बाहेड़ा के कारोबारी धर्मराज बंजारा ने मन्नत पूरी होने पर 1.2 किलो चांदी से बना जेके सीमेंट प्लांट का मॉडल भेंट किया। परिवार और परिचितों के साथ उन्होंने करीब 40 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंचकर यह भेंट अर्पित की।

सांवलिया सेठ को अनोखी भेंट, चांदी का सीमेंट प्लांट लेकर 40 KM पैदल आया परिवार

चित्तौड़गढ़ के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में एक कारोबारी ने अपनी मन्नत पूरी होने पर अनोखी भेंट चढ़ाई। निम्बाहेड़ा निवासी धर्मराज बंजारा ने 1 किलो 200 ग्राम चांदी से तैयार जेके सीमेंट प्लांट का मॉडल सांवलिया सेठ को अर्पित किया। खास बात यह रही कि कारोबारी अपने परिवार, रिश्तेदारों और दोस्तों के साथ करीब 40 किलोमीटर की पैदल यात्रा करके मंदिर पहुंचा।

धर्मराज बंजारा की फर्म वेदांश एंटरप्राइजेज वर्ष 2017 से जेके सीमेंट कंपनी के लिए ठेके का काम करती है। कारोबार में सफलता मिलने के बाद उन्होंने अपनी मन्नत के मुताबिक ऐसी भेंट तैयार करवाने का फैसला किया, जिसका सीधा संबंध उनके व्यवसाय से हो। इसी सोच के तहत चांदी से सीमेंट प्लांट की प्रतिकृति तैयार करवाई गई।

40 किलोमीटर पैदल चलकर मंदिर पहुंचे

धर्मराज शुक्रवार देर रात परिवार और परिचितों के साथ निम्बाहेड़ा से सांवलियाजी के लिए पैदल रवाना हुए। करीब 40 किलोमीटर की यात्रा पूरी करने के बाद शनिवार सुबह लगभग 11 बजे सभी मंदिर पहुंचे। यात्रा के दौरान भक्ति गीतों के साथ सांवलिया सेठ के जयकारे लगाए गए।

परिवार के लिए यह यात्रा केवल एक धार्मिक संकल्प पूरा करने का जरिया नहीं थी, बल्कि कारोबार में मिली सफलता के लिए भगवान के प्रति आभार जताने का अवसर भी थी। यात्रा के दौरान परिवार के सदस्यों ने भक्ति गीतों पर उत्साह के साथ भाग लिया।

कारोबार से जुड़ी भेंट का लिया संकल्प

धर्मराज ने बताया कि उन्होंने मन में संकल्प लिया था कि अगर कारोबार अच्छी तरह चलता रहा और उनकी मनोकामना पूरी हुई तो वे सांवलिया सेठ को ऐसी भेंट अर्पित करेंगे, जो उनके काम से जुड़ी हो। काफी विचार के बाद उन्होंने जेके सीमेंट प्लांट की चांदी की प्रतिकृति बनवाने का निर्णय लिया।

राजस्थान सर्राफा संघ के प्रदेश महामंत्री किशन पिछोलिया के अनुसार, 1 किलो 200 ग्राम चांदी से बने इस मॉडल की अनुमानित कीमत करीब 2 लाख 40 हजार रुपए है।

‘मेहनत के साथ सांवलिया सेठ का आशीर्वाद’

धर्मराज का कहना है कि कारोबार में आगे बढ़ने के पीछे उनकी मेहनत के साथ सांवलिया सेठ का आशीर्वाद भी है। उन्होंने बताया कि बचपन से ही वे माता-पिता के साथ मंदिर आते रहे हैं और तभी से सांवलिया सेठ उनके आराध्य रहे हैं।

कारोबार शुरू होने और जिम्मेदारियां बढ़ने के बाद भी उनकी आस्था में बदलाव नहीं आया। धर्मराज के मुताबिक, किसी नए काम की शुरुआत हो या कोई बड़ा कारोबारी फैसला, वे सबसे पहले सांवलिया सेठ के दर्शन करना पसंद करते हैं।

उनका मानना है कि मुश्किल समय में आस्था इंसान को हिम्मत देती है और आगे बढ़ने का रास्ता दिखाती है। इसी विश्वास के कारण वे अपने व्यापार को भी भगवान के आशीर्वाद से जोड़कर देखते हैं।

‘मॉडल की कीमत नहीं, भावना मायने रखती है’

धर्मराज ने कहा कि उनके लिए चांदी के मॉडल की कीमत से ज्यादा महत्वपूर्ण उसके पीछे जुड़ी भावना है। उनका कहना है कि यह भेंट वर्षों से चली आ रही आस्था और उस संकल्प का प्रतीक है, जिसे उन्होंने कारोबार में सफलता के बाद पूरा किया।

उन्होंने बताया कि भगवान से उन्होंने केवल आर्थिक लाभ की कामना नहीं की, बल्कि सही दिशा और अपने काम में सफलता की प्रार्थना की। उनके अनुसार कमाई में से भगवान के नाम पर कुछ अर्पित करना उनके लिए आस्था का हिस्सा है।

धर्मराज के पिता भी जेके सीमेंट कंपनी में नौकरी कर चुके हैं। ऐसे में सीमेंट प्लांट का मॉडल उनके लिए सिर्फ कारोबारी पहचान नहीं, बल्कि परिवार और व्यवसाय से जुड़ी भावनाओं को भी दर्शाता है।

सांवलियाजी मंदिर में चढ़ाई गई यह अनोखी भेंट अब श्रद्धालुओं के बीच भी चर्चा का विषय बनी हुई है। 1.2 किलो चांदी से तैयार सीमेंट प्लांट का मॉडल और उसे अर्पित करने के लिए 40 किलोमीटर की पैदल यात्रा—इस पूरे संकल्प में कारोबारी सफलता के साथ आस्था और कृतज्ञता की कहानी भी जुड़ी है।