Bikaner News: स्कूल की व्यवस्था सुधारने की मांग को लेकर छठे दिन खत्म हुआ धरना, विधायक ने दिया निर्माण का आश्वासन
बीकानेर के खाजूवाला में सरकारी स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर छह दिन से चल रहा ग्रामीणों का धरना समाप्त हो गया। विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल की ओर से दो नए कमरे और टीन शेड के निर्माण के आश्वासन के बाद आंदोलन खत्म किया गया।
बीकानेर के खाजूवाला में सरकारी स्कूल की व्यवस्थाओं में सुधार की मांग को लेकर चल रहा ग्रामीणों का धरना छठे दिन समाप्त हो गया। ग्रामीणों ने स्कूल में तालाबंदी कर रखी थी, जबकि पिछले तीन दिनों से पांच युवक पानी की टंकी पर चढ़कर आंदोलन कर रहे थे।
मामला सामने आने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग हरकत में आया। वहीं खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल ने भी स्कूल में निर्माण कार्य के लिए अपने कोटे से राशि आवंटित करने का आश्वासन दिया।
दो कमरे और टीन शेड बनाने का आश्वासन
जानकारी के अनुसार, खाजूवाला विधायक डॉ. विश्वनाथ मेघवाल की अनुशंसा पर स्कूल में दो नए कमरों और टीन शेड के निर्माण का आश्वासन दिया गया है। इसके बाद ग्रामीणों और आंदोलन कर रहे युवाओं ने धरना समाप्त कर दिया।
हालांकि, ग्रामीणों की मूल मांग स्कूल में चार नए कमरे और एक प्रार्थना शेड बनवाने की थी। ग्रामीणों का कहना था कि स्कूल में विद्यार्थियों के लिए पर्याप्त कक्ष और सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं।
उच्च स्तर पर वार्ता नहीं होने से नाराज थे ग्रामीण
आंदोलन कर रहे ग्रामीणों और युवाओं का आरोप था कि प्रशासन की ओर से लंबे समय तक उच्च स्तर पर कोई वार्ता नहीं की गई। इससे आंदोलनकारियों में नाराजगी बढ़ती जा रही थी।
युवा नेता राजपाल सहारण ने आरोप लगाया कि शिक्षा विभाग और पुलिस-प्रशासन आंदोलन को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उनका कहना था कि विद्यार्थियों की समस्याओं को लेकर ग्रामीण कई दिनों से आंदोलन कर रहे थे, लेकिन लंबे समय तक कोई जिम्मेदार अधिकारी मौके पर नहीं पहुंचा।
टंकी से कूदने की दी थी चेतावनी
आंदोलन के दौरान राजपाल सहारण ने चेतावनी दी थी कि यदि जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचकर जल्द समस्या का समाधान नहीं करते हैं, तो वह विद्यार्थियों के हित में टंकी से कूदने जैसा कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे।
पांच युवकों के तीन दिन तक पानी की टंकी पर चढ़े रहने के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने मामले को गंभीरता से लिया। विधायक के निर्माण कार्य के आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त कर दिया गया।

