अलवर में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, एक ही CHC से रेफर हुईं 2 गर्भवती; एंबुलेंस में हुई डिलीवरी

प्रतापगढ़ CHC से जयपुर रेफर की गईं दो गर्भवती महिलाओं का रास्ते में 108 एंबुलेंस के अंदर प्रसव कराना पड़ा। एंबुलेंस कर्मचारियों की मदद से दोनों जच्चा-बच्चा सुरक्षित रहे, लेकिन CHC की प्रसूति सुविधाओं और रेफरल व्यवस्था पर सवाल उठे।

अलवर में स्वास्थ्य व्यवस्था की खुली पोल, एक ही CHC से रेफर हुईं 2 गर्भवती; एंबुलेंस में हुई डिलीवरी

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की तस्वीर उस वक्त सवालों के घेरे में आ गई, जब प्रतापगढ़ के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से जयपुर रेफर की गईं दो गर्भवती महिलाओं को रास्ते में ही 108 एंबुलेंस के अंदर प्रसव कराना पड़ा। दोनों मामलों में एंबुलेंस कर्मचारियों की सूझबूझ से जच्चा और बच्चे सुरक्षित रहे, लेकिन एक ही स्वास्थ्य केंद्र से जुड़े दो मामलों ने प्रसूति सेवाओं और मरीजों को रेफर करने की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहला मामला पडाकछापली गांव की 33 वर्षीय उषा का है। प्रसव पीड़ा के बाद उन्हें प्रतापगढ़ CHC लाया गया, जहां से जयपुर के गणगौरी अस्पताल के लिए रेफर कर दिया गया। रास्ते में सड़वा मोड़ के पास प्रसव पीड़ा बढ़ने पर एंबुलेंस रोकनी पड़ी। 108 के EMT अमित कुमार सैनी और पायलट मनोज कुमार शर्मा की मदद से एंबुलेंस में ही प्रसव कराया गया। उषा ने बेटी को जन्म दिया। यह उनकी सातवीं संतान है।

दूसरा मामला गुवाड़ा गुगली निवासी 30 वर्षीय धौली देवी का है। उन्हें भी प्रसव के लिए प्रतापगढ़ CHC लाया गया था, लेकिन जयपुर रेफर कर दिया गया। जयपुर से करीब 30 किलोमीटर पहले भानपुर मोड़ के पास उनकी हालत ऐसी हो गई कि एंबुलेंस रोककर वहीं प्रसव कराना पड़ा। धौली देवी ने बेटे को जन्म दिया। यह उनकी सातवीं डिलीवरी बताई गई है।

इन दोनों घटनाओं के बाद सबसे बड़ा सवाल प्रतापगढ़ CHC की प्रसूति सेवाओं को लेकर उठ रहा है। यदि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के लिए पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पा रही थीं, तो उन्हें इतनी दूरी तक रेफर करने की स्थिति क्यों बनी? वहीं, अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. मोहिनी बलाई ने भी प्रसूति वार्ड में सुविधाओं की कमी की बात स्वीकार की है। ऐसे में सवाल सिर्फ दो सुरक्षित डिलीवरी का नहीं, बल्कि ग्रामीण क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को समय पर और पर्याप्त चिकित्सा सुविधा मिलने का भी है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि दोनों महिलाओं और नवजात बच्चों की स्थिति सुरक्षित बताई गई है। लेकिन एक ही CHC से दो गर्भवती महिलाओं का रास्ते में प्रसव होना स्वास्थ्य व्यवस्था की तैयारियों पर गंभीर सवाल जरूर छोड़ गया है।