सांवलिया सेठ के भंडार में दुनिया भर की करेंसी! 60 देशों से आया चढ़ावा, विदेशी नोटों की कीमत करीब ₹59 लाख

चित्तौड़गढ़ के सांवलिया सेठ मंदिर के भंडार में पिछले आठ महीनों में करीब 60 देशों की विदेशी मुद्राएं मिली हैं। इनकी अनुमानित कीमत 62,800 अमेरिकी डॉलर यानी करीब 59 लाख रुपये आंकी गई है।

सांवलिया सेठ के भंडार में दुनिया भर की करेंसी! 60 देशों से आया चढ़ावा, विदेशी नोटों की कीमत करीब ₹59 लाख

राजस्थान के चित्तौड़गढ़ स्थित प्रसिद्ध श्री सांवलिया सेठ मंदिर में भगवान के प्रति देश ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था देखने को मिल रही है। इसका एक अनोखा उदाहरण मंदिर के भंडार की हालिया गणना में सामने आया है। पिछले आठ महीनों में यहां करीब 60 देशों की विदेशी मुद्राएं मिली हैं। अमेरिकी डॉलर से लेकर यूएई के दिरहम, कुवैती दिनार और ईरानी रियाल तक कई देशों की करेंसी भक्तों ने भगवान सांवलिया सेठ के चरणों में अर्पित की है।

मंदिर प्रशासन के मुताबिक, भंडार में मिली विदेशी मुद्रा की कुल कीमत करीब 62,800 अमेरिकी डॉलर आंकी गई है। भारतीय मुद्रा में इसकी अनुमानित कीमत लगभग 59 लाख रुपये है। यह आंकड़ा सिर्फ विदेशी करेंसी का है, जबकि मंदिर में देशी मुद्रा, सोना-चांदी और अन्य चढ़ावे की गणना अलग से की जाती है।

अमेरिका से UAE तक, इन देशों की करेंसी पहुंची

सांवलिया सेठ मंदिर के भंडार में मिली विदेशी मुद्राओं में सबसे ज्यादा चर्चा अमेरिकी डॉलर और यूएई दिरहम की है। पिछले आठ महीनों की गणना में अमेरिका की करेंसी के रूप में 45,351 डॉलर मिले हैं।

वहीं संयुक्त अरब अमीरात से 21,485 दिरहम मंदिर के भंडार में पहुंचे। इसके अलावा कुवैत, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की करेंसी भी बड़ी मात्रा में मिली है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार प्रमुख विदेशी मुद्राओं में कुवैत के 1,310.25 दिनार, ऑस्ट्रेलिया के 1,367 डॉलर और कनाडा के 1,630 डॉलर भी शामिल हैं।

 खाड़ी देशों के भक्तों की आस्था भी दिखी

सांवलिया सेठ के दरबार में सिर्फ पश्चिमी देशों की करेंसी ही नहीं पहुंची, बल्कि खाड़ी और मुस्लिम बहुल देशों की मुद्राएं भी भंडार में मिली हैं।

यूएई के दिरहम के अलावा ईरान की करेंसी और इंडोनेशिया की मुद्रा भी चढ़ावे में शामिल रही। गणना के दौरान ईरान के 4,68,500 रियाल और इंडोनेशिया के 1,63,000 रुपया मिलने की जानकारी सामने आई है।

इसके अलावा ओमान, बहरीन, कतर, सऊदी अरब, पाकिस्तान और बांग्लादेश जैसे देशों की करेंसी भी मंदिर के भंडार से प्राप्त हुई है।

 एक ही दिन में मिले थे 21 हजार से ज्यादा डॉलर

विदेशी करेंसी किस मात्रा में मंदिर तक पहुंच रही है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 16 अप्रैल को हुई गणना के दौरान अकेले एक बार में 21,127 अमेरिकी डॉलर मिले थे।

इसी तरह 11 अगस्त की गणना में 8,955 यूएई दिरहम प्राप्त हुए। फरवरी और मार्च के दौरान भी बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भंडार से मिली थी। इसमें ईरान के 4,63,500 रियाल और वियतनाम के 2,29,000 डोंग शामिल थे।

यानी मंदिर के भंडार में विदेशी करेंसी का आना कोई एक-दो बार की घटना नहीं है, बल्कि अलग-अलग गणनाओं में लगातार कई देशों की मुद्राएं सामने आती रही हैं।

आखिर विदेशी करेंसी का क्या होता है?

मंदिर में आने वाली विदेशी मुद्रा को सीधे खर्च नहीं किया जाता। मंदिर प्रशासन के अनुसार, विदेशी नोटों को भारतीय मुद्रा में बदलने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से अधिकृत बैंकों की सेवाएं ली जाती हैं।

मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी दिनेश चंद्र धाकड़ के अनुसार, भंडार में प्राप्त विदेशी करेंसी को अधिकृत बैंक के माध्यम से भारतीय रुपये में परिवर्तित कराया जाता है। इसके बाद प्राप्त राशि का इस्तेमाल मंदिर से जुड़े विकास कार्यों और विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक सेवा गतिविधियों में किया जाता है।

सांवलिया सेठ की लोकप्रियता का दिखता है ग्लोबल कनेक्शन

सांवलिया सेठ को राजस्थान ही नहीं, देश के अलग-अलग हिस्सों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मानते हैं। अब मंदिर के भंडार में लगातार अलग-अलग देशों की करेंसी मिलने से यह भी सामने आता है कि विदेशों में रहने वाले भारतीय और अन्य श्रद्धालु भी सांवलिया सेठ के प्रति अपनी आस्था रखते हैं।

विदेश से लौटने वाले भक्तों द्वारा वहां की मुद्रा को भगवान के चरणों में अर्पित करना इस धार्मिक जुड़ाव की एक अनोखी तस्वीर पेश करता है। भंडार से निकलने वाली अलग-अलग देशों की करेंसी सांवलिया सेठ के दरबार की अंतरराष्ट्रीय पहुंच की कहानी भी बयां करती है।

करोड़ों के चढ़ावे के बीच विदेशी करेंसी भी बनी चर्चा का विषय

सांवलिया सेठ मंदिर में चढ़ावे की गणना हमेशा श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रहती है। इस बार विदेशी मुद्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा है। 60 देशों की करेंसी का एक ही मंदिर के भंडार तक पहुंचना इस बात को दर्शाता है कि सांवलिया सेठ के प्रति श्रद्धा की सीमाएं सिर्फ भारत तक सीमित नहीं हैं।

अब इन विदेशी नोटों को भारतीय मुद्रा में बदलने के बाद मंदिर प्रशासन द्वारा तय नियमों के अनुसार धार्मिक, सामाजिक और विकास कार्यों में उपयोग किया जाएगा।