जौहर यूनिवर्सिटी पर ED का एक्शन, अब रडार पर ट्रस्ट को बड़ा चंदा देने वाले लोग; आजम खान के करीबियों की बढ़ सकती हैं मुश्किलें
जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट मामले में ED की कार्रवाई के बाद बड़े दानदाताओं के वित्तीय लेनदेन की जांच के संकेत मिले हैं। जानिए जांच का दायरा और आगे क्या हो सकता है।
जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के बाद जांच का दायरा आगे बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। छापेमारी के दौरान सामने आए वित्तीय लेनदेन और दस्तावेजों की पड़ताल के बीच अब उन लोगों की जानकारी भी जांच एजेंसी के पास पहुंच गई है, जिन्होंने जौहर ट्रस्ट में दान के नाम पर बड़ी रकम जमा कराई थी।
बताया जा रहा है कि इन दानदाताओं में कुछ लोगों ने लाखों रुपये से लेकर करोड़ों रुपये तक की राशि ट्रस्ट में जमा कराई थी। ऐसे में जांच एजेंसी इन लेनदेन के स्रोत और उद्देश्य की जांच कर सकती है। हालांकि, फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि इन सभी लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई तय है। आगे की प्रक्रिया जांच में सामने आने वाले तथ्यों पर निर्भर करेगी।
छापेमारी के बाद क्यों बढ़ी हलचल?
जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े वित्तीय मामलों को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। हालिया ED कार्रवाई के बाद एक बार फिर जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियां जांच के केंद्र में आ गई हैं।
जांच एजेंसी कथित तौर पर यह समझने की कोशिश कर रही है कि ट्रस्ट में जमा हुई बड़ी रकम का स्रोत क्या था, पैसा किन माध्यमों से आया और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया गया। इसी क्रम में बड़े दानदाताओं से जुड़े रिकॉर्ड भी जांच का हिस्सा बन सकते हैं।
बड़े दान देने वालों की हो सकती है जांच
ED की जांच में अगर किसी व्यक्ति द्वारा ट्रस्ट को दी गई बड़ी रकम के स्रोत या लेनदेन में कोई संदेहास्पद तथ्य सामने आता है, तो संबंधित व्यक्ति से पूछताछ की संभावना हो सकती है।
ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां आमतौर पर बैंकिंग रिकॉर्ड, आय के स्रोत, टैक्स से जुड़े दस्तावेज और दान से संबंधित कागजात का मिलान करती हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह स्पष्ट नहीं है कि जिन लोगों की जानकारी जांच एजेंसी ने जुटाई है, उनके खिलाफ कोई आपराधिक कार्रवाई तय की गई है।
यानी इस समय इन लोगों का जांच के दायरे में आना और उनके खिलाफ आरोप साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं।
2019 में सामने आया था वित्तीय अनियमितताओं का मामला
जौहर ट्रस्ट और जौहर यूनिवर्सिटी की वित्तीय गतिविधियों को लेकर वर्ष 2019 में शिकायत सामने आई थी। यह शिकायत तत्कालीन भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने की थी।
शिकायत में विश्वविद्यालय और ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों को लेकर सवाल उठाए गए थे। आरोपों में कथित तौर पर बड़ी रकम के इस्तेमाल और वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की गई थी।
इसके बाद यह मामला अलग-अलग स्तरों पर जांच एजेंसियों और प्रशासनिक कार्रवाई का हिस्सा बनता रहा।
जांच एजेंसियों को दस्तावेज और वित्तीय जानकारी दी गई
आकाश सक्सेना की ओर से जौहर ट्रस्ट और विश्वविद्यालय से संबंधित वित्तीय गतिविधियों की जानकारी जांच एजेंसियों के साथ साझा किए जाने की बात कही गई है।
उनकी शिकायतों में ट्रस्ट के जरिए विश्वविद्यालय के निर्माण और उससे जुड़ी कथित वित्तीय गतिविधियों की जांच की मांग प्रमुख रही। अब ED की कार्रवाई के बाद पुराने आरोप और वित्तीय रिकॉर्ड एक बार फिर चर्चा में हैं।
आजम खान से जुड़े लोगों पर भी नजर?
ED की कार्रवाई के बाद समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान के करीबियों को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। जांच यदि जौहर ट्रस्ट में हुए बड़े वित्तीय लेनदेन तक आगे बढ़ती है, तो उन लोगों से पूछताछ हो सकती है जिनके नाम बड़े दान या अन्य वित्तीय लेनदेन में सामने आए हैं।
हालांकि, किसी व्यक्ति का आजम खान से करीबी संबंध होना अपने आप में अपराध का प्रमाण नहीं है। जांच एजेंसी को यदि कोई वित्तीय अनियमितता मिलती है, तभी आगे की कार्रवाई का आधार बन सकता है।
700-800 करोड़ रुपये की देनदारी का भी जिक्र
शिकायतकर्ता आकाश सक्सेना की ओर से आयकर विभाग की एक पूर्व कार्रवाई का भी जिक्र किया गया है। उनके अनुसार वर्ष 2023 में आयकर विभाग की कार्रवाई के दौरान आजम खान से जुड़ी बड़ी कर देनदारी निर्धारित किए जाने का दावा किया गया था।
इस दावे को लेकर अलग-अलग स्तरों पर कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं चलती रही हैं। ऐसे में जौहर ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों की मौजूदा जांच के संदर्भ में पुराने रिकॉर्ड भी महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
अब आगे क्या हो सकता है?
ED की जांच अभी जारी है। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंकिंग रिकॉर्ड और अन्य वित्तीय जानकारी से क्या तथ्य सामने आते हैं।
यदि किसी लेनदेन में गड़बड़ी या मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित लोगों को पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। वहीं यदि लेनदेन वैध और दस्तावेजों से समर्थित पाए जाते हैं, तो केवल बड़ी रकम का दान देना अपने आप में किसी अपराध का प्रमाण नहीं माना जा सकता।
फिलहाल जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मामले में ED की कार्रवाई ने जांच का फोकस ट्रस्ट की वित्तीय गतिविधियों और बड़े दानदाताओं तक पहुंचा दिया है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसी के अगले कदम से साफ होगा कि यह मामला किस दिशा में आगे बढ़ता है।

