उदयपुर में हनुमान मंदिर पर चला बुलडोजर, लोगों में आक्रोश: सुबह 6 बजे UDA ने गिराया निर्माण, विधायक फूलसिंह मीणा मौके पर पहुंचे

उदयपुर के जोगी तालाब स्थित वैदेही विहार में UDA ने हनुमान मंदिर का पक्का निर्माण हटाया। प्राधिकरण ने सरकारी जमीन पर निर्माण का हवाला दिया, स्थानीय लोगों ने विरोध जताया।

उदयपुर में हनुमान मंदिर पर चला बुलडोजर, लोगों में आक्रोश: सुबह 6 बजे UDA ने गिराया निर्माण, विधायक फूलसिंह मीणा मौके पर पहुंचे

राजस्थान के उदयपुर में शनिवार सुबह हनुमान मंदिर के निर्माण पर बुलडोजर चलाए जाने का मामला सामने आया है। शहर के जोगी तालाब स्थित वैदेही विहार इलाके में उदयपुर विकास प्राधिकरण (UDA) की कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में नाराजगी फैल गई। मंदिर के निर्माण को तोड़े जाने की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर पहुंचने लगे और प्रशासन की कार्रवाई का विरोध जताया।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, शनिवार सुबह करीब 6 बजे UDA की टीम ने जेसीबी की मदद से हनुमान मंदिर के पक्के निर्माण और दीवारों को ध्वस्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब उन्हें कार्रवाई की जानकारी मिली और वे मौके पर पहुंचे, तब तक निर्माण को काफी हद तक गिराया जा चुका था।

घटना की जानकारी मिलने के बाद ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने स्थानीय लोगों से बातचीत की, उनकी शिकायतें सुनीं और मामले में हरसंभव मदद करने का आश्वासन दिया।

 

जानकारी के मुताबिक, जोगी तालाब क्षेत्र की वैदेही विहार कॉलोनी में हनुमान मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था। मंदिर की दीवारें और अन्य पक्का निर्माण तैयार हो चुका था, जबकि छत डालने का काम बाकी बताया गया है।

इसी बीच शनिवार सुबह करीब 6 बजे उदयपुर विकास प्राधिकरण की टीम ने मौके पर पहुंचकर निर्माण हटाने की कार्रवाई शुरू कर दी। जेसीबी की मदद से मंदिर की दीवारों और पक्के ढांचे को गिरा दिया गया।

सुबह हुई इस कार्रवाई की जानकारी जैसे ही आसपास रहने वाले लोगों को मिली, वे घटनास्थल की ओर पहुंचने लगे। मंदिर के निर्माण को गिराए जाने पर लोगों ने नाराजगी जताई और प्रशासन के फैसले पर सवाल उठाए।

UDA का दावा: सरकारी जमीन पर किया गया था निर्माण

मंदिर के निर्माण को हटाने के मामले में उदयपुर विकास प्राधिकरण ने अपना पक्ष रखा है।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि मंदिर का पक्का निर्माण आरक्षित सरकारी भूमि पर किया गया था। इसके संबंध में आसपास रहने वाले कुछ लोगों ने लिखित शिकायत दर्ज कराई थी।

अधिकारियों के मुताबिक, शिकायत मिलने के बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी किया गया था। नोटिस में निर्माण को स्वेच्छा से हटाने या मंदिर को दूसरी जगह स्थानांतरित करने के लिए कहा गया था।

UDA का कहना है कि निर्धारित निर्देशों का पालन नहीं किए जाने के कारण सरकारी जमीन से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई।

हालांकि, संबंधित नोटिस, जमीन के राजस्व रिकॉर्ड और कार्रवाई से जुड़े आदेशों का स्वतंत्र सत्यापन होना बाकी है।

स्थानीय लोगों ने कहा- एक साल पहले स्थापित की थी हनुमान जी की मूर्ति

दूसरी ओर, वैदेही विहार के स्थानीय लोगों ने प्रशासन की कार्रवाई पर नाराजगी जताई है।

क्षेत्रवासी मोहन दशोरा और अन्य लोगों के अनुसार, करीब एक साल पहले इस स्थान पर हनुमान जी की मूर्ति स्थापित की गई थी। उनका कहना है कि आसपास कोई अन्य मंदिर नहीं होने के कारण स्थानीय लोगों ने यहां मंदिर बनाने का निर्णय लिया था।

लोगों के मुताबिक, मंदिर का पक्का निर्माण कराया जा चुका था और दीवारें भी खड़ी हो गई थीं। निर्माण का अधिकांश कार्य पूरा होने के बाद केवल छत डालने का काम शेष था।

स्थानीय लोगों का कहना है कि मंदिर के निर्माण को गिराए जाने से उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं। उन्होंने कार्रवाई के तरीके पर सवाल उठाते हुए अपनी नाराजगी व्यक्त की है।

विरोध के बीच मौके पर पहुंचे विधायक फूलसिंह मीणा

मंदिर का निर्माण गिराए जाने की सूचना मिलने के बाद उदयपुर ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा घटनास्थल पर पहुंचे।

विधायक ने मौके पर मौजूद लोगों से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली और उनकी शिकायतों को सुना। स्थानीय लोगों ने उन्हें मंदिर के निर्माण और प्रशासन की कार्रवाई के बारे में बताया।

विधायक फूलसिंह मीणा ने नाराज लोगों को मामले में हरसंभव सहयोग करने का आश्वासन दिया।

विधायक के घटनास्थल पर पहुंचने के बाद स्थानीय लोगों ने उनके सामने भी अपनी बात रखी।

 जमीन के उपयोग और मंदिर निर्माण को लेकर विवाद

इस पूरे मामले में विवाद का प्रमुख विषय उस जमीन की स्थिति है, जहां हनुमान मंदिर का निर्माण कराया जा रहा था।

एक ओर UDA का कहना है कि निर्माण आरक्षित सरकारी भूमि पर किया गया था और संबंधित पक्ष को पहले ही नोटिस दिया गया था। दूसरी ओर स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्होंने आसपास मंदिर नहीं होने के कारण यहां हनुमान जी की मूर्ति स्थापित कर मंदिर निर्माण शुरू किया था।

फिलहाल संबंधित जमीन के स्वामित्व, आरक्षण की स्थिति और नोटिस की प्रक्रिया से जुड़े आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सत्यापित नहीं हो सके हैं।

प्रशासन की कार्रवाई के बाद उठे कई सवाल

मंदिर का निर्माण गिराए जाने के बाद स्थानीय स्तर पर प्रशासन की कार्रवाई और मंदिर के भविष्य को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

स्थानीय लोगों की नाराजगी के बीच अब यह देखना होगा कि मंदिर निर्माण को लेकर संबंधित पक्षों के बीच क्या समाधान निकलता है।

विधायक फूलसिंह मीणा के मामले में सहयोग के आश्वासन के बाद स्थानीय लोगों को आगे की कार्रवाई का इंतजार है।

फिलहाल इस मामले में प्रशासन के अगले कदम और मंदिर के निर्माण को लेकर किसी अंतिम समाधान की पुष्टि नहीं हुई है।