बीकानेर में पंचायत चुनाव को लेकर सख्ती, 29 नवंबर तक धारा 163 लागू; रैली-जुलूस और विजय जुलूस पर रोक
बीकानेर की 15 पंचायत समितियों में धारा 163 लागू, रैली, लाउडस्पीकर, हथियार, सोशल मीडिया और मतदान केंद्रों को लेकर सख्त नियम।
राजस्थान में पंचायती राज आम चुनाव 2026 की प्रक्रिया के बीच बीकानेर प्रशासन ने कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त कदम उठाया है। जिले में स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव कराने के उद्देश्य से भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए गए हैं। यह आदेश जिले की सभी 15 पंचायत समिति क्षेत्रों में लागू रहेगा और 29 नवंबर तक प्रभावी रहेगा।
जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट निशांत जैन की ओर से जारी आदेश में हथियारों के प्रदर्शन से लेकर चुनावी रैलियों, लाउडस्पीकर, सोशल मीडिया प्रचार और मतदान केंद्रों के आसपास की गतिविधियों तक कई तरह की पाबंदियां लगाई गई हैं। प्रशासन ने साफ किया है कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह की ऐसी गतिविधि की अनुमति नहीं होगी, जिससे कानून-व्यवस्था, शांति या साम्प्रदायिक सौहार्द प्रभावित होने की आशंका हो।
हथियारों के प्रदर्शन और परिवहन पर रोक
धारा 163 के तहत जिले में आग्नेयास्त्र, धारदार हथियार, विस्फोटक और घातक रासायनिक पदार्थों के सार्वजनिक प्रदर्शन और परिवहन पर रोक रहेगी। यह प्रतिबंध बाहर से बीकानेर आने वाले लोगों पर भी लागू होगा।
हालांकि, सुरक्षा बलों, पुलिस और अधिकृत कर्मचारियों को उनके कर्तव्य के दौरान छूट रहेगी। सिख समुदाय के कृपाण धारकों, वृद्ध एवं दिव्यांग व्यक्तियों की लाठी तथा राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों को भी निर्धारित परिस्थितियों में इस प्रतिबंध से छूट दी गई है।
रैली और चुनावी सभा के लिए अनुमति जरूरी
चुनावी गतिविधियों के दौरान रैली, जुलूस, धरना या आमसभा आयोजित करने के लिए पुलिस की पूर्व अनुमति जरूरी होगी। बिना अनुमति ऐसी गतिविधियां आयोजित नहीं की जा सकेंगी। हालांकि, बारात और शव यात्रा को इस प्रतिबंध से अलग रखा गया है।
चुनावी सभाओं और वाहनों पर लाउडस्पीकर के इस्तेमाल के लिए संबंधित उपखंड मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। ध्वनि विस्तारक यंत्रों के इस्तेमाल को लेकर भी समय सीमा तय की गई है।
सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर और अन्य ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। अस्पताल, स्कूल और धार्मिक स्थलों के 100 मीटर के दायरे में भी इनके इस्तेमाल पर सख्ती रहेगी।
सोशल मीडिया पर भी प्रशासन की नजर
चुनाव के दौरान सोशल मीडिया और प्रचार सामग्री को लेकर भी प्रशासन ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। ऐसे किसी भी पोस्ट, संदेश या प्रचार सामग्री पर रोक रहेगी, जिससे साम्प्रदायिक सद्भाव बिगड़ने, जातिगत द्वेष फैलने या किसी व्यक्ति के खिलाफ आपत्तिजनक अथवा व्यक्तिगत आरोपों को बढ़ावा मिलने की आशंका हो।
धार्मिक स्थलों का इस्तेमाल भी चुनाव प्रचार के लिए नहीं किया जा सकेगा। प्रशासन का उद्देश्य चुनावी माहौल में किसी भी तरह के विवाद और तनाव की स्थिति को रोकना है।
मतदान केंद्र के 100 मीटर दायरे में कई पाबंदियां
मतदान और मतगणना केंद्रों के आसपास भी विशेष प्रतिबंध लागू रहेंगे। केंद्र के 100 मीटर के दायरे में मोबाइल फोन ले जाना प्रतिबंधित रहेगा। इसके अलावा अनधिकृत रूप से पांच या उससे अधिक लोगों की भीड़ जुटाने, मतदाताओं से वोट मांगने और चुनाव प्रचार करने पर रोक होगी।
प्रत्याशियों के लिए भी नियम सख्त किए गए हैं। वे अपने निजी या चुनावी वाहनों से मतदाताओं को मतदान केंद्र तक नहीं ला सकेंगे। प्रशासन ने मतदान प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली किसी भी गतिविधि को रोकने के लिए यह व्यवस्था लागू की है।
जीत के बाद भी नहीं निकलेगा विजय जुलूस
चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद प्रत्याशियों और समर्थकों को विजय जुलूस निकालने की अनुमति नहीं होगी। प्रशासन ने चुनाव के बाद भी कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह प्रतिबंध लगाया है।
सार्वजनिक स्थानों पर शराब का सेवन भी प्रतिबंधित रहेगा। प्रशासन ने चुनावी अवधि के दौरान शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए इन नियमों का पालन अनिवार्य किया है।
उल्लंघन पर होगी कानूनी कार्रवाई
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश की अवहेलना भारतीय न्याय संहिता की धारा 223 के तहत दंडनीय होगी।
पंचायती राज चुनाव के मद्देनजर बीकानेर प्रशासन की यह सख्ती इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि जिले के सभी 15 पंचायत समिति क्षेत्रों में चुनावी गतिविधियां चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ेंगी। प्रशासन ने लोगों और राजनीतिक दलों से चुनावी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील की है, ताकि मतदान और मतगणना शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हो सके।

