गोडावण को जंगल में छोड़ने की मुहिम को झटका, 4 दिन बाद लोमड़ी ने किया शिकार; 7 पक्षियों की रिहाई टली
जैसलमेर के डेजर्ट नेशनल पार्क में जंगल में छोड़े गए छह महीने के नर गोडावण को मरू लोमड़ी ने शिकार बना लिया। घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान ने सात अन्य गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना फिलहाल टाल दी है।
राजस्थान के जैसलमेर में दुर्लभ गोडावण को जंगल में फिर से बसाने की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए छह महीने के एक नर गोडावण को जंगल में छोड़े जाने के महज चार दिन बाद मरू लोमड़ी ने अपना शिकार बना लिया। इस घटना का पता सैटेलाइट ट्रैकिंग के जरिए चला। गोडावण के अवशेष मिलने के बाद वन्यजीव विशेषज्ञों ने बाकी पक्षियों को जंगल में छोड़ने की योजना फिलहाल रोक दी है। अब रिलीज प्रोटोकॉल और सुरक्षा इंतजामों की समीक्षा की जाएगी।
सैटेलाइट सिग्नल रुका, मौके पर पहुंची टीम
घटना जैसलमेर के सम इलाके में डेजर्ट नेशनल पार्क (DNP) के भीतर हुई। जानकारी के मुताबिक, सम स्थित ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए नर गोडावण को 14 अक्टूबर को जंगल में छोड़ा गया था। 18 अक्टूबर को यह पक्षी पानी पीने के लिए एक कुंड यानी गाजलर के पास पहुंचा। इसी दौरान झाड़ियों में छिपी मरू लोमड़ी ने उस पर हमला कर दिया।
गोडावण की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सैटेलाइट ट्रैकिंग डिवाइस लगाई गई थी। जब उसका सिग्नल मिलना बंद हुआ, तो फील्ड स्टाफ मौके पर पहुंचा। वहां गोडावण के पंख और अन्य अवशेष मिले, जबकि लोमड़ी वहां से जा चुकी थी। टीम ने ट्रैकिंग डिवाइस बरामद कर ली है। घटनास्थल से मिले खून के नमूने जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं।
7 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना टली
इस घटना के बाद भारतीय वन्यजीव संस्थान (WII) ने बाकी सात गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना फिलहाल टाल दी है। संस्थान अब यह समीक्षा कर रहा है कि पक्षियों को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया और उनकी सुरक्षा व्यवस्था में किन सुधारों की जरूरत है।
यह फैसला इसलिए भी अहम है, क्योंकि गोडावण जैसे दुर्लभ पक्षी को प्राकृतिक आवास में दोबारा स्थापित करना संरक्षण की लंबी प्रक्रिया का हिस्सा है। ऐसे में एक पक्षी की मौत के बाद आगे की रणनीति पर नए सिरे से विचार किया जा रहा है।
11 गोडावणों को जंगल में बसाने की थी योजना
जैसलमेर के सम स्थित ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए कुल 11 गोडावणों को जंगल में छोड़ने की योजना बनाई गई थी। चार अक्टूबर को केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने दो गोडावणों को जंगल में छोड़ा था। इसके बाद 14 अक्टूबर को दो और नर गोडावणों को छोड़ा गया।
अब तक छोड़े गए पक्षियों में से एक का लोमड़ी के हमले में शिकार होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, बाकी तीन गोडावण सुरक्षित बताए जा रहे हैं। शेष सात पक्षियों को फिलहाल ब्रीडिंग सेंटर में ही रखा जाएगा और आगे का फैसला सुरक्षा उपायों की समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
गोडावण संरक्षण के सामने नई चुनौती
गोडावण राजस्थान की पहचान और मरुस्थलीय जैव विविधता का अहम हिस्सा है। इसकी संख्या बेहद कम होने के कारण इसे बचाने के लिए प्रजनन केंद्रों में संरक्षण और फिर प्राकृतिक आवास में बसाने जैसे प्रयास किए जा रहे हैं।
जैसलमेर की यह घटना बताती है कि ब्रीडिंग सेंटर में पाले गए पक्षियों को जंगल में छोड़ने के बाद उनकी निगरानी और सुरक्षा कितनी महत्वपूर्ण है। अब सवाल है कि भविष्य में ऐसे हमलों से बचाव के लिए क्या अतिरिक्त इंतजाम किए जाएंगे और बाकी गोडावणों को जंगल में छोड़ने की प्रक्रिया कब दोबारा शुरू होगी।

