पायलट के हाथों में आई पंजाब की ‘चाबी’, आते ही चन्नी-वड़िंग एक मंच पर, क्या 2027 के लिए खुल गया कांग्रेस का ताला?

सचिन पायलट को पंजाब कांग्रेस का प्रभारी बनाए जाने के बाद 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में गुटबाजी खत्म कर संगठन को मजबूत करने की चुनौती है। चन्नी और राजा वड़िंग के एक मंच पर आने से कांग्रेस को नई उम्मीद मिली है, लेकिन असली परीक्षा टिकट वितरण में होगी।

पायलट के हाथों में आई पंजाब की ‘चाबी’, आते ही चन्नी-वड़िंग एक मंच पर, क्या 2027 के लिए खुल गया कांग्रेस का ताला?

पंजाब कांग्रेस का राजनीतिक ताला लंबे समय से गुटबाजी में फंसा हुआ था। अब कांग्रेस हाईकमान ने इसकी “चाबी” राजस्थान के पूर्व उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के हाथ में सौंप दी है। 5 सितंबर को कांग्रेस ने पायलट को AICC महासचिव और पंजाब प्रभारी नियुक्त किया। उन्होंने भूपेश बघेल की जगह ली। लेकिन उनकी नियुक्ति को सामान्य संगठनात्मक बदलाव के बजाय 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस की रणनीतिक कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

पहले कांग्रेस को कांग्रेस से मिलाना होगा

पायलट के सामने सबसे बड़ी चुनौती सत्ताधारी AAP नहीं बल्कि शुरुआत में अपनी ही पार्टी के अलग-अलग गुट हैं। पंजाब कांग्रेस में प्रदेशाध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के खेमों के बीच मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं। पायलट की नियुक्ति के कुछ दिनों बाद भी चन्नी खेमे से जुड़े कई वरिष्ठ नेता वड़िंग के नेतृत्व वाले एक प्रदर्शन से दूर रहे थे। यानी कांग्रेस हाईकमान ने पायलट को ऐसे राज्य की जिम्मेदारी दी है जहां चुनावी रणनीति बनाने से पहले संगठन के अंदर विश्वास कायम करना जरूरी है।

पायलट के आते ही बदली तस्वीर? 

अब कांग्रेस के लिए एक सकारात्मक तस्वीर सामने आई है। पायलट की पंजाब में सक्रियता के दौरान चन्नी और वड़िंग एक मंच पर दिखाई दिए। दोनों खेमों को एक साथ लाना पायलट के सामने सबसे शुरुआती चुनौतियों में से एक माना जा रहा था। हालांकि एक कार्यक्रम में साथ दिखाई देना गुटबाजी खत्म होने का प्रमाण नहीं है। असली परीक्षा टिकट वितरण और चुनावी नेतृत्व तय करते समय होगी।

फिर भी कांग्रेस के लिए यह तस्वीर राजनीतिक संदेश जरूर देती है कि हाईकमान 2027 से पहले पंजाब इकाई को एकजुट दिखाना चाहता है।

वड़िंग ने कहा- पायलट से पार्टी मजबूत होगी

पायलट की नियुक्ति के बाद राजा वड़िंग ने उनका स्वागत करते हुए भरोसा जताया कि उनके आने से कांग्रेस को मजबूती मिलेगी। वड़िंग ने यह भी कहा कि पार्टी के सभी नेता एक मंच पर आकर मिलकर लड़ेंगे। इस बयान के राजनीतिक मायने इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि पायलट को किसी एक खेमे के प्रतिनिधि के बजाय हाईकमान के मध्यस्थ और चुनावी रणनीतिकार के रूप में अपनी भूमिका स्थापित करनी होगी।

CM चेहरे पर पायलट ने साफ की रणनीति

पायलट ने एक और बड़ा संकेत देते हुए कहा है कि कांग्रेस 2027 विधानसभा चुनाव से पहले मुख्यमंत्री का चेहरा घोषित नहीं करेगी। पार्टी सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ेगी और बहुमत मिलने के बाद मुख्यमंत्री का फैसला किया जाएगा। इस रणनीति को पंजाब कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से जोड़कर भी देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ को फिलहाल पीछे रखने से पार्टी अलग-अलग महत्वाकांक्षी नेताओं को चुनाव तक एक मंच पर रखने की कोशिश कर सकती है।

अंदर एकता, बाहर AAP पर हमला

पायलट की शुरुआती रणनीति के दो हिस्से दिखाई दे रहे हैं। पहला - कांग्रेस के अलग-अलग खेमों को साथ लाना। दूसरा - AAP सरकार के खिलाफ पार्टी को सड़क पर सक्रिय करना। पंजाब में कांग्रेस के प्रदर्शन में पायलट खुद शामिल हुए और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ सरकार को घेरने उतरे। यानी संदेश यह है कि कांग्रेस 2027 की तैयारी सिर्फ संगठनात्मक बैठकों तक सीमित नहीं रखना चाहती।

असली परीक्षा टिकट वितरण में

पायलट की पंजाब में शुरुआती एंट्री प्रभावशाली दिखाई दे सकती है, लेकिन असली चुनौती अभी बाकी है। पंजाब में कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं की अपनी-अपनी राजनीतिक जमीन और महत्वाकांक्षाएं हैं। चुनाव नजदीक आने के साथ टिकट वितरण सबसे बड़ा टकराव बन सकता है। अगर पायलट टिकट बंटवारे और चुनाव अभियान के दौरान अलग-अलग गुटों को साथ रखने में सफल होते हैं, तभी उनकी रणनीति की वास्तविक सफलता मानी जाएगी।

पंजाब के साथ पायलट का भी बड़ा टेस्ट

यह जिम्मेदारी सिर्फ पंजाब कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण नहीं है। पायलट के लिए भी यह राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संगठनात्मक परीक्षा है। अगर वह गुटों में बंटी पंजाब कांग्रेस को एकजुट करके 2027 में मजबूत चुनावी मुकाबले तक ले जाते हैं तो कांग्रेस संगठन में उनका राजनीतिक कद और बढ़ सकता है। फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है। पंजाब की चाबी पायलट के हाथों में आ गई है। पहला ताला खोलने की कोशिश भी शुरू हो चुकी है, लेकिन असली दरवाजा 2027 विधानसभा चुनाव में ही खुलेगा।