वार्ड चुनावों में सचिन पायलट ने बचाया अपना गढ़, जादूगर गहलोत से कहां हुई चूक!
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के नतीजों में BJP भले कांग्रेस से आगे रही, लेकिन टोंक, जोधपुर, झालावाड़ और बारां के परिणामों ने सियासी समीकरणों को दिलचस्प बना दिया। टोंक में कांग्रेस को बहुमत मिला, जबकि जोधपुर में BJP-कांग्रेस 44-44 सीटों पर रहीं।
राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के नतीजों ने कई राजनीतिक दिग्गजों को चौंकाया है। प्रदेश स्तर पर BJP कांग्रेस से आगे रही, लेकिन कुछ हाई-प्रोफाइल क्षेत्रों के परिणामों ने भविष्य की राजनीति के लिए दिलचस्प संकेत दिए हैं। कांग्रेस के अंदर सबसे ज्यादा चर्चा सचिन पायलट के टोंक और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के जोधपुर के प्रदर्शन की हो सकती है।
टोंक में पायलट का दबदबा, कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत
सचिन पायलट के विधानसभा क्षेत्र टोंक में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन किया। नगर परिषद के 60 वार्डों में से एक वार्ड में मतदान नहीं हुआ। घोषित 59 परिणामों में कांग्रेस ने 32, BJP ने 19 और निर्दलीयों ने 8 सीटें जीतीं। 32 पार्षदों के साथ कांग्रेस अपने दम पर बोर्ड बनाने की स्थिति में है। यह जीत इसलिए भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि पायलट राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी जिम्मेदारियां संभालने के बावजूद टोंक से विधायक हैं। ऐसे में उनके निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस का स्पष्ट बहुमत उनके स्थानीय राजनीतिक प्रभाव को मजबूत करने वाले नतीजे के तौर पर देखा जा सकता है।
गहलोत के जोधपुर में फंस गया मुकाबला
इसके उलट अशोक गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर में मुकाबला बेहद करीबी रहा। 100 वार्ड वाले नगर निगम में BJP और कांग्रेस 44-44 सीटों पर पहुंच गईं। अन्य और निर्दलीय उम्मीदवारों की जीत ने बोर्ड गठन का गणित और दिलचस्प बना दिया। सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड 88 की रही, जिसे अशोक गहलोत से जोड़कर देखा जाता है। यहां BJP उम्मीदवार अशोक कुमार खींची ने जीत दर्ज की। हालांकि जोधपुर के नतीजे को अकेले गहलोत की हार कहना उचित नहीं होगा। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से जुड़े वार्ड में भी BJP को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस ने जीत दर्ज की।
वसुंधरा के गढ़ में भी कांग्रेस का बड़ा उलटफेर
निकाय चुनाव में कांग्रेस को एक और बड़ी सफलता झालावाड़ में मिली। पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के मजबूत राजनीतिक क्षेत्र झालावाड़ नगर परिषद में कांग्रेस ने 45 में से 29 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यह परिणाम BJP के लिए प्रतीकात्मक रूप से बड़ा झटका माना जा रहा है।
बारां में AAP ने BJP-कांग्रेस दोनों का गणित बिगाड़ा
बारां नगर परिषद ने राजस्थान की राजनीति को एक नया संकेत दिया। यहां AAP ने 60 में से 31 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस 18 और BJP 9 सीटों पर रही। इस जीत के बाद AAP पहली बार राजस्थान में किसी नगर परिषद में स्पष्ट बहुमत के साथ अपना चेयरमैन बनाने की स्थिति में है।
क्या कांग्रेस के अंदर बढ़ेगा पायलट का वजन?
पूरे राजस्थान की बात करें तो BJP ने कांग्रेस से अधिक वार्ड जीते हैं। इसलिए राज्यव्यापी परिणाम को पायलट बनाम गहलोत की लड़ाई के रूप में देखना सही नहीं होगा। लेकिन कांग्रेस की आंतरिक राजनीति में टोंक का परिणाम महत्वपूर्ण जरूर है। एक तरफ पायलट के विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस स्पष्ट बहुमत लेकर आई है। दूसरी तरफ गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर में पार्टी को बोर्ड बनाने के लिए दूसरे पार्षदों के समर्थन की जरूरत पड़ सकती है। स्थानीय चुनावों में प्रत्याशी, वार्ड के मुद्दे और व्यक्तिगत समीकरण भी निर्णायक होते हैं, इसलिए जीत-हार का पूरा श्रेय किसी एक बड़े नेता को नहीं दिया जा सकता। इसके बावजूद राजनीति में नतीजों के साथ नैरेटिव भी चलता है। और इस बार कांग्रेस के अंदर बनने वाला नैरेटिव दिलचस्प हो सकता है। टोंक में पायलट का किला मजबूत रहा, जबकि गहलोत के जोधपुर में सत्ता की चाबी दूसरों के हाथ में पहुंच गई।

