जयपुर में BJP की बढ़त के बीच बड़ा उलटफेर, मेयर की रेस वाली ज्योति खंडेलवाल चुनाव हारीं

बीजेपी के टिकट पर वार्ड 110 से चुनाव लड़ रहीं पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल को हार का सामना करना पड़ा। उनकी हार के साथ जयपुर मेयर पद की संभावित दावेदारी का समीकरण भी बदल गया है।

जयपुर में BJP की बढ़त के बीच बड़ा उलटफेर, मेयर की रेस वाली ज्योति खंडेलवाल चुनाव हारीं

राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों के बीच जयपुर से एक ऐसा परिणाम सामने आया है, जिसने राजनीतिक गलियारों में चर्चा बढ़ा दी है। जयपुर नगर निगम में बीजेपी के मजबूत प्रदर्शन के बीच पार्टी की संभावित मेयर दावेदार मानी जा रही ज्योति खंडेलवाल खुद पार्षद का चुनाव हार गईं। वार्ड नंबर 110 से चुनाव मैदान में उतरीं ज्योति खंडेलवाल की हार के साथ ही अब मेयर पद की संभावित दावेदारी से उनका नाम बाहर हो गया है।

ज्योति खंडेलवाल जयपुर की राजनीति का जाना-पहचाना चेहरा हैं। वह पहले जयपुर की महापौर रह चुकी हैं और एक समय कांग्रेस की प्रमुख महिला नेताओं में उनकी गिनती होती थी। इस बार उन्होंने बीजेपी के टिकट पर नगर निगम चुनाव लड़ा था। ऐसे में उनकी हार को जयपुर के चुनावी नतीजों के सबसे चर्चित परिणामों में से एक माना जा रहा है।

वार्ड 110 में हार ने बदला पूरा समीकरण

ज्योति खंडेलवाल को बीजेपी ने वार्ड 110 से अपना प्रत्याशी बनाया था। यह सीट सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित थी। चुनाव से पहले उनके अनुभव और पूर्व महापौर के तौर पर राजनीतिक पहचान को देखते हुए उन्हें जयपुर नगर निगम के मेयर पद के लिए मजबूत दावेदार माना जा रहा था।

लेकिन चुनाव परिणाम ने पूरा समीकरण बदल दिया। ज्योति खंडेलवाल पार्षद का चुनाव ही नहीं जीत सकीं। ऐसे में अब बीजेपी के लिए मेयर पद के चेहरे को लेकर नए नामों पर विचार करना होगा।

यानी जयपुर नगर निगम में बीजेपी की जीत की तस्वीर के बीच पार्टी के लिए ज्योति खंडेलवाल की हार एक अलग और चौंकाने वाला घटनाक्रम बनकर सामने आई है।

2009 में रचा था इतिहास

ज्योति खंडेलवाल का राजनीतिक सफर भी काफी चर्चित रहा है। वर्ष 2009 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर जयपुर महापौर का चुनाव जीता था। उस चुनाव में उन्होंने बीजेपी की सुमन शर्मा को हराया था। इसके साथ ही वह जयपुर की पहली महिला महापौर बनी थीं।

वर्ष 2009 से 2014 तक वह जयपुर की महापौर रहीं। महापौर के तौर पर उनका कार्यकाल जयपुर की स्थानीय राजनीति में काफी महत्वपूर्ण रहा। इसके बाद कांग्रेस ने 2019 के लोकसभा चुनाव में उन्हें जयपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन वह चुनाव जीतने में सफल नहीं हो सकीं।

कांग्रेस छोड़कर BJP में हुई थीं शामिल

राजनीतिक सफर में बड़ा बदलाव अक्टूबर 2023 में आया, जब ज्योति खंडेलवाल ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया। इसके बाद से वह बीजेपी के साथ सक्रिय राजनीति में नजर आईं।

2026 के जयपुर नगर निगम चुनाव में बीजेपी ने उन्हें वार्ड 110 से मैदान में उतारा। पार्टी के टिकट पर उनकी वापसी को उनके राजनीतिक अनुभव और जयपुर में पुराने जनाधार को देखते हुए अहम माना गया था।

चुनाव से पहले यह चर्चा भी थी कि अगर बीजेपी नगर निगम में मजबूत स्थिति बनाती है तो पूर्व महापौर होने के कारण ज्योति खंडेलवाल मेयर पद की दौड़ में प्रमुख नाम हो सकती हैं। लेकिन वार्ड चुनाव का परिणाम आने के साथ ही यह संभावना फिलहाल खत्म हो गई है।

BJP की जीत के बीच क्यों अहम है ज्योति की हार?

जयपुर नगर निगम में बीजेपी के पक्ष में परिणाम आने के बावजूद ज्योति खंडेलवाल का चुनाव हारना इसलिए खास है क्योंकि वह सिर्फ एक सामान्य पार्षद प्रत्याशी नहीं थीं। उनके पास महापौर पद का अनुभव है और वह जयपुर की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय रही हैं।

एक तरफ बीजेपी नगर निगम में अपनी स्थिति मजबूत करने की ओर बढ़ रही है, वहीं दूसरी तरफ मेयर पद की संभावित दावेदार का अपने वार्ड से हार जाना पार्टी के लिए अप्रत्याशित स्थिति है। अब बीजेपी के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि नगर निगम की कमान किस चेहरे को सौंपी जाए।

अब नए चेहरे पर टिकी निगाहें

ज्योति खंडेलवाल के चुनाव हारने के बाद जयपुर के नए महापौर को लेकर राजनीतिक हलचल बढ़ना तय माना जा रहा है। बीजेपी के पास अब पार्षदों में से किसी नए चेहरे को आगे करने का विकल्प होगा।

इस नतीजे ने एक बात साफ कर दी है कि जयपुर नगर निगम चुनाव में पार्टी की जीत और व्यक्तिगत उम्मीदवारों का प्रदर्शन हर जगह एक जैसा नहीं रहा। बीजेपी के लिए जहां निगम में बढ़त राहत की खबर है, वहीं ज्योति खंडेलवाल की हार ने मेयर पद के समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है।