मरने की बात कर रही हूं, मां-पापा माफ करना, टीम से बाहर होने पर भावुक हुई भारतीय खिलाड़ी, रोते हुए चयन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
राजस्थान की वुशु खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी ने एशियन गेम्स टीम से बाहर किए जाने पर चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। दिव्यांशी का दावा है कि चयन के बाद उन्हें टीम किट भी मिली थी, जबकि फेडरेशन ने SAI की मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर फिटनेस को कारण बताया है।
एशियन गेम्स के लिए भारतीय वुशु टीम में बदलाव के बाद राजस्थान की खिलाड़ी दिव्यांशी चौधरी ने चयन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं। टीम से बाहर किए जाने के बाद सामने आए एक वीडियो में दिव्यांशी बेहद भावुक नजर आईं। उन्होंने अपने माता-पिता से माफी मांगते हुए आत्महत्या से जुड़ी बातें भी कहीं, जिससे उनकी सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। दिव्यांशी का दावा है कि उनका चयन एशियन गेम्स के लिए हो चुका था, उन्हें भारतीय टीम की किट भी मिल गई थी, लेकिन अंतिम समय में उनका नाम हटाकर नाओरेम रोशिबीना देवी को टीम में शामिल कर लिया गया।
जून में हुआ था चयन, सितंबर में बदली टीम
जानकारी के मुताबिक भारतीय वुशु टीम की घोषणा 23 जून को की गई थी। इसके बाद 11 सितंबर को जारी अपडेट में दिव्यांशी की जगह रोशिबीना देवी को शामिल किया गया। दिव्यांशी का दावा है कि अंतिम चयन ट्रायल में उन्होंने 60 किलोग्राम वर्ग में रोशिबीना को हराया था। इसी आधार पर वह सवाल उठा रही हैं कि ट्रायल में बेहतर प्रदर्शन के बावजूद उन्हें टीम से क्यों हटाया गया।

फेडरेशन बोला- SAI की रिपोर्ट में पूरी तरह फिट नहीं
वुशु एसोसिएशन की ओर से दिव्यांशी को बाहर किए जाने की वजह उनकी फिटनेस बताई गई है।
एसोसिएशन के अध्यक्ष के मुताबिक दिव्यांशी जिस मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर खुद को खेलने के लिए फिट बता रही हैं, वह निजी डॉक्टर की रिपोर्ट है, जबकि स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) की मेडिकल रिपोर्ट अलग है। फेडरेशन का पक्ष है कि खिलाड़ी पूरी तरह फिट नहीं थीं और बड़े अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट में मेडल की संभावनाओं को देखते हुए यह फैसला किया गया।
दिव्यांशी का दावा- चोट से उबरकर इंटरनेशनल टूर्नामेंट खेला
दिव्यांशी ने स्वीकार किया है कि श्रीनगर में आयोजित कैंप के दौरान उनके कंधे में चोट लगी थी और इसके चलते उन्होंने कुछ दिन अभ्यास नहीं किया। हालांकि उनका कहना है कि बाद में वह रिकवर हो गईं और दोबारा खेलने लगीं। उन्होंने डॉक्टर की सलाह और अपनी मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देते हुए खुद को खेलने के लिए फिट बताया है। उनके पिता सुनील कुमार सुंडा का भी दावा है कि चोट लगने के बाद दिव्यांशी ने चीन में अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लिया और सिल्वर मेडल हासिल किया।
पिता बोले- किट मिली, तैयारी चल रही थी
दिव्यांशी के पिता के मुताबिक उनकी बेटी फाइनल ट्रायल में पहले स्थान पर रही और इसके बाद करीब तीन महीने तक भारतीय वुशु टीम के कैंप में तैयारी करती रही। परिवार का दावा है कि दिव्यांशी को भारतीय टीम की किट मिल चुकी थी और एशियन गेम्स में भागीदारी की तैयारियां भी पूरी हो रही थीं। ऐसे में अंतिम समय पर नाम बदलने से परिवार ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।
जानबूझकर चोट पहुंचाने के आरोप से एसोसिएशन का इनकार
दिव्यांशी और उनके पिता की ओर से कैंप के दौरान जानबूझकर चोट पहुंचाए जाने का आरोप भी लगाया गया है। संबंधित पक्ष ने इस आरोप से इनकार किया है। एसोसिएशन का कहना है कि वुशु एक कॉम्बैट स्पोर्ट है और मुकाबले के दौरान खिलाड़ियों को चोट लग सकती है। इसलिए चोट को जानबूझकर पहुंचाया गया बताना उचित नहीं होगा। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि भी सामने नहीं आई है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीत चुकी दिव्यांशी
60 किलोग्राम सांदा वर्ग में खेलने वाली दिव्यांशी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक उन्होंने 2024 जूनियर वर्ल्ड वुशु चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज और 2026 में चीन में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में सिल्वर मेडल जीता। दिव्यांशी लंबे समय से कोटा में वुशु की ट्रेनिंग कर रही हैं और राज्य स्तर पर भी कई पदक जीत चुकी हैं।

