देवनानी के गढ़ में बगावत, BJP के सामने बड़ा सवाल! पूर्व मेयर ने पत्नी को उतारा मैदान में

अजमेर निकाय चुनाव में वासुदेव देवनानी के प्रभाव वाले वार्ड नंबर 4 में बीजेपी के सामने उनके पुराने साथी धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनौती पेश कर रही हैं। कांग्रेस के उम्मीदवार नहीं उतारने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है।

देवनानी के गढ़ में बगावत, BJP के सामने बड़ा सवाल! पूर्व मेयर ने पत्नी को उतारा मैदान में

अजमेर में निकाय चुनाव से पहले बीजेपी की अंदरूनी सियासत ने नया मोड़ ले लिया है। विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी के प्रभाव वाले वार्ड नंबर 4 में अब बीजेपी के सामने उनके ही पुराने साथी की चुनौती खड़ी हो गई है। बीजेपी के दो बार मेयर रह चुके धर्मेंद्र गहलोत ने अपनी पत्नी हेमा गहलोत को निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतार दिया है। ऐसे में चुनावी मुकाबले के साथ-साथ बीजेपी के भीतर चल रही खींचतान भी चर्चा का विषय बन गई है।

धर्मेंद्र गहलोत और वासुदेव देवनानी के बीच पिछले कई महीनों से राजनीतिक मतभेद की खबरें सामने आती रही हैं। अब गहलोत की पत्नी के निर्दलीय चुनाव लड़ने से यह विवाद सीधे चुनावी मैदान में दिखाई देने लगा है। खास बात यह है कि कांग्रेस ने भी इस वार्ड से अपना उम्मीदवार नहीं उतारा है। ऐसे में वार्ड नंबर 4 में मुकाबला बीजेपी प्रत्याशी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच होने की संभावना है।

 देवनानी के वार्ड में ही चुनौती क्यों?

हेमा गहलोत को वार्ड नंबर 4 से निर्दलीय उतारना इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि यह वासुदेव देवनानी का वार्ड है। गहलोत के समर्थकों का आरोप है कि उनकी पत्नी को बीजेपी से टिकट दिलाने में देवनानी के प्रभाव के कारण अड़चन आई। पार्टी ने यहां मोनिका जैन को टिकट दिया है, जिन्हें देवनानी समर्थक माना जाता है।

यानी चुनावी मैदान में अब सिर्फ दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि इसे बीजेपी के अंदर चल रही खींचतान की अग्निपरीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। सवाल यह है कि क्या देवनानी अपने प्रभाव वाले वार्ड में बीजेपी प्रत्याशी को जीत दिला पाएंगे या धर्मेंद्र गहलोत की बगावत पार्टी के समीकरण बिगाड़ सकती है?

बीजेपी प्रत्याशी को लेकर भी चर्चा

वार्ड नंबर 4 से बीजेपी ने मोनिका जैन को उम्मीदवार बनाया है। जैन पहले कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ चुकी हैं। पिछले चुनाव में उन्हें बीजेपी के जिलाध्यक्ष रमेश सोनी ने हराया था। इस बार वही मोनिका जैन बीजेपी के टिकट पर मैदान में हैं।

मोनिका जैन का वार्ड की निवासी नहीं होना भी स्थानीय राजनीति में चर्चा का मुद्दा बना हुआ है। दूसरी तरफ हेमा गहलोत के मैदान में उतरने से बीजेपी के सामने अपने वोट बैंक को एकजुट रखने की चुनौती बढ़ गई है।

पहले इस्तीफा, अब चुनावी चुनौती

धर्मेंद्र गहलोत ने पिछले महीने ही बीजेपी से इस्तीफा दिया था। उन्होंने वासुदेव देवनानी पर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया था। उस समय से दोनों नेताओं के बीच विवाद को लेकर अजमेर की राजनीति में चर्चाएं तेज थीं।

अब गहलोत ने अपनी पत्नी को देवनानी के वार्ड से निर्दलीय उम्मीदवार बनाकर इस राजनीतिक लड़ाई को चुनावी मैदान में ला दिया है। यही वजह है कि वार्ड नंबर 4 का चुनाव पूरे अजमेर निकाय चुनाव में खास चर्चा में आ गया है।

क्या देवनानी के लिए आसान होगा इम्तिहान?

इस विवाद के बावजूद बीजेपी के लिए अजमेर में संगठनात्मक मजबूती एक बड़ा फैक्टर है। माना जा रहा है कि वासुदेव देवनानी और पूर्व मंत्री व विधायक अनीता भदेल के प्रभाव के चलते बीजेपी के लिए पूरे चुनाव में मुकाबला आसान रह सकता है। लेकिन वार्ड नंबर 4 का समीकरण अलग नजर आ रहा है।

यहां पार्टी उम्मीदवार के सामने बीजेपी से अलग हुए पुराने नेता की चुनौती है। ऐसे में चुनाव परिणाम यह भी बताएगा कि स्थानीय स्तर पर संगठन और नेतृत्व का प्रभाव कितना मजबूत है।

कांग्रेस की कमजोर मौजूदगी से बदला समीकरण

इस वार्ड में कांग्रेस के प्रत्याशी नहीं उतारने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। कांग्रेस के पास अजमेर में प्रभाव रखने वाले कई नेता हैं, लेकिन वार्ड नंबर 4 में पार्टी की गैरमौजूदगी ने बीजेपी और निर्दलीय उम्मीदवार के बीच सीधा मुकाबला बना दिया है।

कांग्रेस की कमान जिला अध्यक्ष राजकुमार जयपाल, प्रदेश कांग्रेस सचिव रूबी खान, डेयरी चेयरमैन रामचंद्र चौधरी और श्रीगोपाल बाहेती जैसे नेताओं के हाथ में है। पूर्व आरटीडीसी चेयरमैन धर्मेंद्र राठौड़ भी चुनावी गतिविधियों में सक्रिय हैं।

अब नजर वार्ड नंबर 4 के नतीजे पर

अजमेर निकाय चुनाव में वार्ड नंबर 4 अब सिर्फ एक सामान्य वार्ड का चुनाव नहीं रह गया है। एक तरफ बीजेपी के टिकट पर मोनिका जैन हैं तो दूसरी तरफ धर्मेंद्र गहलोत की पत्नी हेमा गहलोत निर्दलीय मैदान में हैं।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है—**क्या देवनानी के गढ़ में बीजेपी अपनी पकड़ कायम रख पाएगी या गहलोत की बगावत चुनावी नतीजों के जरिए बड़ा सियासी संदेश देगी?** इस वार्ड का परिणाम अजमेर की स्थानीय राजनीति में बीजेपी के भीतर की ताकत और नाराजगी, दोनों का संकेत दे सकता है।