Barmer News: फर्जी 8वीं की टीसी से सरपंच चुनाव लड़ना पड़ा भारी, महिला को 3 साल की सजा

बाड़मेर के शिव क्षेत्र में फर्जी आठवीं पास टीसी के आधार पर सरपंच चुनाव लड़ने के मामले में रेखा को कोर्ट ने दोषी ठहराया। धारा 420 और 471 के तहत तीन साल की सजा और 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया।

Barmer News: फर्जी 8वीं की टीसी से सरपंच चुनाव लड़ना पड़ा भारी, महिला को 3 साल की सजा

जिले के शिव विधानसभा क्षेत्र की गूंगा ग्राम पंचायत में सरपंच पद का चुनाव फर्जी आठवीं पास टीसी के आधार पर लड़ना एक महिला को भारी पड़ गया। अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट संख्या-02, बाड़मेर की पीठासीन अधिकारी शिल्पी बंसल ने अभियुक्ता रेखा पत्नी कैलाश कुमार को भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 471 के तहत दोषी ठहराते हुए तीन वर्ष के साधारण कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर कुल 10 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

दोनों धाराओं में सुनाई गई मूल सजा साथ-साथ चलेगी। वहीं, धारा 467 और 468 के आरोपों में अदालत ने अभियुक्ता को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया। अदालत ने यह फैसला 31 अगस्त 2026 को सुनाया।

शिव थाने में दर्ज हुई थी FIR

प्रकरण के अनुसार, परिवादी सुरेंद्र दान ने इस मामले में न्यायालय में परिवाद पेश किया था। न्यायालय के आदेश पर परिवाद को दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 156(3) के तहत पुलिस थाना शिव भेजा गया। इसके बाद पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच की।

जांच पूरी होने के बाद रेखा के खिलाफ धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत आरोप-पत्र न्यायालय में पेश किया गया।

पांचवीं तक पढ़ाई, नामांकन में लगाई 8वीं की टीसी

मामला वर्ष 2015 का है। उस समय ग्राम पंचायत गूंगा में सरपंच पद के लिए चुनाव हुआ था और चुनाव लड़ने के लिए आठवीं कक्षा उत्तीर्ण होना आवश्यक था। अभियोजन के अनुसार, रेखा ने अपने नामांकन के साथ राजकीय माध्यमिक विद्यालय कनोई, जिला जैसलमेर के नाम से जारी आठवीं पास की टीसी प्रस्तुत की थी।

जांच के दौरान सामने आया कि रेखा ने केवल पांचवीं कक्षा तक पढ़ाई की थी। उसके नाम से विद्यालय की ओर से आठवीं कक्षा उत्तीर्ण करने की कोई टीसी जारी नहीं हुई थी।

दूसरी छात्रा के नाम दर्ज थी टीसी

मामले की जांच में टीसी से जुड़ी जानकारी की भी पड़ताल की गई। संबंधित प्रधानाध्यापक ने अदालत में बताया कि रेखा की टीसी में दर्ज टीसी बुक क्रमांक पर किसी अन्य छात्रा सुगणा के नाम से टीसी जारी की गई थी।

अदालत ने माना कि अभियुक्ता आठवीं कक्षा उत्तीर्ण नहीं थी, इसके बावजूद उसने नामांकन में आठवीं पास होने की घोषणा की और कूटरचित टीसी को वास्तविक दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल किया।

परिवीक्षा का लाभ देने से किया इनकार

अदालत ने अपराध की गंभीर प्रकृति को देखते हुए अभियुक्ता को परिवीक्षा का लाभ देने से इनकार कर दिया। धारा 420 और 471 के तहत तीन-तीन वर्ष के साधारण कारावास के साथ दोनों धाराओं में 5-5 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया गया है।

अर्थदंड का भुगतान नहीं करने पर प्रत्येक धारा में एक-एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अभियोजन की ओर से मामले में पैरवी अभियोजन अधिकारी हरेंद्र कुमार डागर ने की।