Rajasthan Nikay Chunav: मथानिया में रातभर चला दिव्या मदेरणा का धरना, RO ऑफिस के बाहर प्रशासन से मांगा जवाब
जोधपुर के मथानिया में निकाय चुनाव के नामांकन को लेकर पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा RO कार्यालय के बाहर धरने पर बैठीं। उन्होंने कथित पक्षपात और चुनावी प्रक्रिया में भेदभाव के आरोप लगाए।
राजस्थान में नगरीय निकाय चुनाव के बीच जोधपुर जिले के मथानिया नगरपालिका में नामांकन प्रक्रिया को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. कांग्रेस की पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने प्रशासन और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कथित भेदभाव का आरोप लगाया है. इसी विरोध में वह सोमवार दोपहर से रिटर्निंग ऑफिसर (RO) कार्यालय के बाहर धरने पर बैठी हैं.
मामला इतना बढ़ गया कि दिव्या मदेरणा ने पूरी रात धरना स्थल पर ही बिताई. मंगलवार सुबह भी वह RO कार्यालय के बाहर डटी रहीं और अधिकारियों से यह स्पष्ट करने की मांग करती रहीं कि नामांकन की निर्धारित समय सीमा समाप्त होने के बाद कथित तौर पर भाजपा विधायक के कार्यालय के अंदर मौजूद रहने की अनुमति कैसे दी गई.
समय सीमा के बाद RO कक्ष में मौजूद रहने का आरोप
दिव्या मदेरणा का आरोप है कि नामांकन का निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी भाजपा विधायक भैराराम सियोल RO कार्यालय परिसर में मौजूद थे. उनके मुताबिक, समय सीमा के बाद किसी को अंदर रहने या प्रवेश की अनुमति देने को लेकर प्रशासन को जवाब देना चाहिए.
पूर्व विधायक ने सवाल उठाया कि यदि चुनावी प्रक्रिया के दौरान सभी प्रत्याशियों और राजनीतिक दलों के लिए नियम समान हैं तो फिर कथित तौर पर अलग-अलग लोगों के साथ अलग व्यवहार क्यों किया गया. उन्होंने इस पूरे मामले की वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने की मांग भी उठाई है.

दिव्या मदेरणा के अनुसार, दोपहर 3 बजकर 5 मिनट के बाद भी भाजपा विधायक RO कक्ष में मौजूद थे. इसी मुद्दे को लेकर उन्होंने अधिकारियों पर मिलीभगत और पक्षपात के आरोप लगाए हैं.
कार्यकर्ताओं के उग्र होने के बाद पहुंचीं दिव्या
बताया जा रहा है कि सोमवार को नामांकन प्रक्रिया के दौरान विवाद की स्थिति बनने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं में नाराजगी फैल गई. सूचना मिलने पर दिव्या मदेरणा मथानिया नगरपालिका कार्यालय पहुंचीं और वहां मौजूद कार्यकर्ताओं से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली.
इसके बाद उन्होंने RO कार्यालय के बाहर ही धरना शुरू कर दिया. देखते ही देखते मामला राजनीतिक रूप से गरमा गया और प्रशासनिक अधिकारियों में भी हलचल बढ़ गई.
मंगलवार सुबह अधिकारियों ने की बातचीत
रातभर चले धरने के बाद मंगलवार सुबह प्रशासन की ओर से दिव्या मदेरणा से बातचीत की गई. एडीएम जवाहर सिंह चौधरी, सुरेंद्र सिंह राजपुरोहित, एसीपी नरेंद्र सिंह देवड़ा सहित अन्य अधिकारी मौके पर पहुंचे और पूर्व विधायक से पूरे मामले को लेकर चर्चा की.
हालांकि, दिव्या मदेरणा ने कथित भेदभाव के मामले में स्पष्ट जवाब और कार्रवाई की मांग जारी रखी. उनका कहना है कि चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े सवालों पर किसी तरह की लीपापोती स्वीकार नहीं की जाएगी.
दिव्या मदेरणा ने X पर भी उठाए सवाल
पूर्व विधायक ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर भी लगातार अपनी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा कि मथानिया में नामांकन के दौरान हुई घटनाओं ने चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं.
दिव्या मदेरणा का आरोप है कि समय सीमा समाप्त होने के बाद क्षेत्रीय विधायक और भाजपा से जुड़े एक प्रत्याशी को RO कार्यालय में प्रवेश या अंदर रहने की अनुमति दी गई, जबकि दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी के साथ अलग व्यवहार किया गया.
उन्होंने सवाल किया कि एक ही चुनावी प्रक्रिया में नियम अलग-अलग लोगों के लिए अलग कैसे हो सकते हैं. मदेरणा ने कहा कि वह प्रशासन से इसी कथित भेदभाव का जवाब मांगने के लिए RO कार्यालय के बाहर बैठी हैं.
'लोकतंत्र में नियम सबके लिए बराबर होने चाहिए'
दिव्या मदेरणा ने कहा कि यदि चुनाव की प्रक्रिया में ही पक्षपात के आरोप लगने लगें तो निष्पक्ष चुनाव और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर जनता का भरोसा प्रभावित हो सकता है. उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता के दबाव में प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह का भेदभाव स्वीकार नहीं किया जा सकता.
पूर्व विधायक ने कहा कि यह केवल किसी एक प्रत्याशी का मामला नहीं है, बल्कि चुनावी नियमों को समान रूप से लागू करने का सवाल है. उन्होंने मांग की कि जिम्मेदार अधिकारी पूरे मामले पर स्थिति स्पष्ट करें.
आधी रात और सुबह भी जारी रहा विरोध
दिव्या मदेरणा ने सोमवार देर रात करीब 1 बजे धरना स्थल से एक तस्वीर सोशल मीडिया पर साझा करते हुए बताया कि वह आधी रात के बाद भी RO कार्यालय के बाहर डटी हुई हैं और कथित भेदभाव के खिलाफ विरोध जारी है.
इसके बाद मंगलवार सुबह करीब 9 बजे उन्होंने एक और तस्वीर साझा की. इस पोस्ट के जरिए उन्होंने संकेत दिया कि उनका विरोध केवल राजनीतिक हंगामे के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था में बदलाव और जवाबदेही की मांग को लेकर है.
मथानिया में नामांकन को लेकर शुरू हुआ यह विवाद अब राजस्थान निकाय चुनाव के बीच बड़ा सियासी मुद्दा बन गया है. कांग्रेस की ओर से जहां प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं अब पूरे मामले में प्रशासन के जवाब और आगे की कार्रवाई पर नजर बनी हुई है.

