जोधपुर में 100 वार्डों की आरक्षण लॉटरी ने बदला सियासी गणित, कई दावेदारों के महापौर बनने के सपने पर पानी

परिसीमन के बाद जोधपुर में 100 वार्डों वाले एक नगर निगम के चुनाव की तैयारी तेज हो गई है। आरक्षण लॉटरी से कई महापौर दावेदारों के समीकरण बदल गए हैं।

जोधपुर में 100 वार्डों की आरक्षण लॉटरी ने बदला सियासी गणित, कई दावेदारों के महापौर बनने के सपने पर पानी
Nagar nigam

राजस्थान के दूसरे बड़े शहर जोधपुर में आगामी नगर निगम चुनाव का सियासी मुकाबला अब और दिलचस्प हो गया है। परिसीमन के बाद दो नगर निगमों की जगह अब एक नगर निगम बनाया गया है, जिसमें कुल 100 वार्ड होंगे। सोमवार को इन वार्डों की आरक्षण लॉटरी निकाली गई। आरक्षण की स्थिति साफ होते ही कई ऐसे नेताओं की उम्मीदों को झटका लगा है, जो महापौर की कुर्सी पर नजर लगाए बैठे थे। वार्ड आरक्षित होने के कारण कुछ दावेदार अब पार्षद का चुनाव भी नहीं लड़ पाएंगे।

100 वार्डों में किस वर्ग के लिए कितनी सीटें?

जोधपुर नगर निगम के 100 वार्डों में से 65 वार्ड सामान्य वर्ग के लिए रखे गए हैं। इसके अलावा 13 वार्ड अनुसूचित जाति (SC), 2 वार्ड अनुसूचित जनजाति (ST) और 20 वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं।

महिला आरक्षण की बात करें तो सामान्य वर्ग की सीटों में 22 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। वहीं, एससी वर्ग के 13 आरक्षित वार्डों में से 4 महिलाओं के लिए हैं। एसटी वर्ग में 1 वार्ड महिला के लिए आरक्षित किया गया है। ओबीसी वर्ग में 7 वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं।

आरक्षण की तस्वीर सामने आने के बाद अब राजनीतिक दलों को अपने संभावित प्रत्याशियों के चयन और चुनावी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है।

कई महापौर दावेदारों को लगा झटका

जोधपुर में एक नगर निगम बनने के बाद महापौर पद को लेकर भाजपा और कांग्रेस दोनों खेमों में कई नेताओं की नजरें टिकी हुई थीं। लेकिन वार्डों के आरक्षण ने समीकरण बदल दिए हैं।

जिन नेताओं के वार्ड उनके वर्ग के लिए आरक्षित नहीं हुए हैं, उनके लिए अब पार्षद का चुनाव लड़ने का रास्ता बंद हो गया है। ऐसे में महापौर पद के संभावित दावेदारों को भी अपनी राजनीतिक रणनीति बदलनी पड़ सकती है।

पहले दो नगर निगम, अब एक

परिसीमन से पहले जोधपुर में दो नगर निगम हुआ करते थे। इनमें एक पर भाजपा और दूसरे पर कांग्रेस का बोर्ड रहा था। अब नए परिसीमन के बाद दोनों निगमों को मिलाकर 100 वार्डों वाला एक नगर निगम बनाया गया है।

इस बदलाव के बाद आगामी चुनाव दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।

गहलोत और शेखावत की प्रतिष्ठा भी दांव पर

जोधपुर की राजनीति का असर स्थानीय निकाय चुनाव से कहीं आगे तक दिखाई दे सकता है। यह शहर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह क्षेत्र है। वहीं केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के लिए भी जोधपुर राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है।

गहलोत और शेखावत के बीच राजनीतिक बयानबाजी और एक-दूसरे पर हमले पहले भी सुर्खियों में रहे हैं। ऐसे में एक नगर निगम के गठन के बाद होने वाला यह पहला बड़ा चुनाव दोनों नेताओं के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बन सकता है।

भाजपा-कांग्रेस की बढ़ेगी चुनौती

आरक्षण की तस्वीर स्पष्ट होने के बाद अब भाजपा और कांग्रेस को वार्ड स्तर पर नए चेहरों की तलाश करनी होगी। दोनों दलों के सामने चुनौती यह होगी कि जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधते हुए मजबूत उम्मीदवार मैदान में उतारे जाएं।

जोधपुर में एक नगर निगम के तहत होने वाले चुनाव में महापौर की कुर्सी किस दल के खाते में जाएगी, यह देखने के लिए सभी की नजरें अब दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों की रणनीति पर टिकी हैं।