Vasundhara Raje के गढ़ Jhalawar में BJP को झटका, Congress ने 4 निकायों में पाया बहुमत
झालावाड़ निकाय चुनाव 2026 में कांग्रेस ने जिले के आठ निकायों में चार जगह बहुमत हासिल किया, जबकि BJP तीन निकायों में बहुमत में रही। झालावाड़ शहर में कांग्रेस की 29 सीटों की जीत के बीच झालरापाटन में BJP का बहुमत वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले इलाके की अलग तस्वीर पेश करता है
राजस्थान की राजनीति में झालावाड़ को दशकों से पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और BJP के सबसे मजबूत इलाकों में गिना जाता रहा है। लेकिन निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने इस राजनीतिक किले के भीतर एक दिलचस्प तस्वीर खड़ी कर दी है। जिले के आठ निकायों में कांग्रेस ने चार जगह स्पष्ट बहुमत हासिल किया, BJP तीन जगह बहुमत में रही और पिड़ावा में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। नतीजों के बाद सवाल उठ रहा है। क्या कांग्रेस ने वास्तव में राजे के किले में सेंध लगा दी या BJP की स्थानीय कमजोरियों ने कांग्रेस के लिए रास्ता आसान किया?
झालावाड़ शहर में सबसे बड़ा झटका
झालावाड़ नगर परिषद के 45 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। BJP 14 और निर्दलीय दो वार्डों पर जीते। बहुमत के लिए केवल 23 सीटों की जरूरत थी, इसलिए कांग्रेस ने यहां अपेक्षाकृत आरामदायक बहुमत हासिल किया। वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले जिले के मुख्यालय पर ऐसा परिणाम BJP के लिए प्रतीकात्मक रूप से महत्वपूर्ण झटका है।
एक शहर नहीं, चार निकायों में कांग्रेस का बहुमत
BJP के लिए चिंता सिर्फ झालावाड़ नगर परिषद का परिणाम नहीं है। भवानीमंडी में कांग्रेस ने 40 में 26, खानपुर में 25 में 18 और डग में 20 में 14 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यानी कांग्रेस की बढ़त जिले के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दी। इसी वजह से इन नतीजों को सिर्फ एक शहर की स्थानीय नाराजगी तक सीमित करके देखना मुश्किल है।
झालरापाटन ने बचाई BJP की प्रतिष्ठा
हालांकि जिले की पूरी तस्वीर BJP के खिलाफ नहीं है। वसुंधरा राजे के विधानसभा क्षेत्र झालरापाटन में BJP ने 35 में से 22 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। कांग्रेस को 8 और AAP को 5 सीटें मिलीं। यह नतीजा महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे साफ होता है कि राजे के सीधे राजनीतिक प्रभाव वाले इलाके में BJP की पकड़ अभी मजबूत बनी हुई है। अकलेरा में भी BJP ने 35 में से 25 सीटें जीतकर बड़ी बढ़त हासिल की, जबकि मनोहरथाना में पार्टी ने 20 में से 11 सीटें जीतकर बहुमत पाया।
पिड़ावा में फंसा सत्ता का गणित
पिड़ावा नगरपालिका में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला। 20 वार्डों में कांग्रेस ने 8, BJP ने 6, AAP ने 5 और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की। इस परिणाम के बाद यहां बोर्ड गठन में AAP और निर्दलीय पार्षद की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
क्या BJP को भीतरघात ने हराया?
निकाय चुनाव के बाद BJP की हार को लेकर टिकट वितरण, स्थानीय नाराजगी, बागी उम्मीदवारों और संगठनात्मक खींचतान जैसे कारणों की चर्चा हो रही है। लेकिन इन कारणों को झालावाड़ में BJP की हार का प्रमाणित और एकमात्र कारण मानना जल्दबाजी होगी। स्थानीय निकाय चुनाव में प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़, वार्ड स्तर के मुद्दे, स्थानीय नेतृत्व और मतदाताओं की नगर प्रशासन को लेकर राय भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसलिए नतीजे को “भीतरघात” की एक लाइन में समेटने के बजाय BJP के स्थानीय संगठन और उम्मीदवार चयन की व्यापक समीक्षा के रूप में देखना ज्यादा उचित होगा।
वसुंधरा का प्रभाव खत्म हुआ या BJP का स्थानीय नेटवर्क कमजोर?
झालरापाटन का परिणाम इस सवाल का महत्वपूर्ण जवाब देता है। अगर नतीजों को केवल वसुंधरा राजे की व्यक्तिगत राजनीतिक पकड़ में गिरावट माना जाए तो उनके अपने विधानसभा क्षेत्र में BJP की 22 सीटों की जीत इस तर्क को कमजोर करती है। इसलिए इन चुनावों से फिलहाल ज्यादा स्पष्ट संकेत यह मिलता है कि झालावाड़ जिले में BJP की ताकत हर निकाय में समान नहीं रही। कुछ जगह पार्टी बेहद मजबूत रही तो कुछ में कांग्रेस ने निर्णायक बढ़त हासिल कर ली।
कांग्रेस के लिए मौका, BJP के लिए चेतावनी
चार निकायों में बहुमत कांग्रेस के लिए राजनीतिक और संगठनात्मक बढ़त है। वहीं BJP के लिए नतीजे आगामी पंचायत चुनावों से पहले स्थानीय संगठन की समीक्षा का कारण बन सकते हैं। हालांकि निकाय चुनाव को विधानसभा चुनाव का सीधा संकेत मानना उचित नहीं होगा। दोनों चुनावों के मुद्दे, उम्मीदवार और मतदान व्यवहार अलग हो सकते हैं। फिर भी झालावाड़ के नतीजों ने एक राजनीतिक संदेश जरूर दिया है। वसुंधरा राजे का सबसे मजबूत इलाका भी अब हर निकाय में BJP के लिए स्वतः जीत की गारंटी नहीं है और शायद झालावाड़ चुनाव की सबसे दिलचस्प कहानी भी यही है। किला पूरी तरह नहीं गिरा है। लेकिन उसकी कुछ दीवारों पर कांग्रेस अपना झंडा जरूर लगा चुकी है।

