ICMR Update: AI से होगी टीबी की पहचान, स्वदेशी मलेरिया वैक्सीन पर काम; कोविड वैक्सीन और हार्ट अटैक पर भी विशेषज्ञ ने दी सफाई
ICMR विशेषज्ञ ने कोविड वैक्सीन को हार्ट अटैक का कारण मानने के दावे को वैज्ञानिक प्रमाणों से परे बताया। भुवनेश्वर में AI आधारित एक्स-रे से टीबी की शुरुआती पहचान, स्वदेशी मलेरिया वैक्सीन और डेंगू वैक्सीन पर शोध जारी है।
कोरोना महामारी के बाद कोविड वैक्सीन और हार्ट अटैक को लेकर सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे सामने आते रहे हैं। इस बीच ICMR-Regional Medical Research Centre, भुवनेश्वर की निदेशक डॉ. संघमित्रा पति ने कहा कि उपलब्ध वैज्ञानिक शोध के आधार पर कोविड वैक्सीन को हार्ट अटैक का कारण मानने का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने लोगों से अपुष्ट सोशल मीडिया दावों के बजाय वैज्ञानिक प्रमाणों पर भरोसा करने की अपील की।
सार्वजनिक स्वास्थ्य और संक्रमण संबंधी शोध के क्षेत्र में काम कर रहे ICMR विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले समय में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल टीबी जैसी गंभीर बीमारी की शुरुआती पहचान में भी बढ़ाया जा सकता है। इसके अलावा मलेरिया के खिलाफ स्वदेशी मल्टी-स्टेज वैक्सीन विकसित करने की दिशा में भी काम चल रहा है।
AI से एक्स-रे में टीबी के संकेत पहचानने की तैयारी
दूरदराज और ग्रामीण क्षेत्रों में जहां रेडियोलॉजिस्ट या विशेषज्ञ डॉक्टर आसानी से उपलब्ध नहीं होते, वहां AI आधारित चेस्ट एक्स-रे विश्लेषण उपयोगी साबित हो सकता है। इसका उद्देश्य डॉक्टरों की जगह लेना नहीं, बल्कि संभावित टीबी मरीजों की शुरुआती स्क्रीनिंग में स्वास्थ्यकर्मियों की मदद करना है।
ICMR-RMRC भुवनेश्वर ने टीबी उन्मूलन के लिए एक मेगा टीबी एलिमिनेशन प्रोजेक्ट भी शुरू किया है। यह परियोजना केंद्रीय टीबी प्रभाग और ओडिशा के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सहयोग से आगे बढ़ाई जा रही है।
AI आधारित सिस्टम से संदिग्ध मामलों की पहचान के बाद मरीजों को आगे की जांच और उपचार के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचाया जा सकता है।

कोरोना के दौरान बनी लैब अब दूसरी बीमारियों के शोध में भी उपयोगी
कोविड महामारी के दौरान विकसित अत्याधुनिक लैब इंफ्रास्ट्रक्चर को अब दूसरे संक्रामक रोगों की जांच और शोध में इस्तेमाल करने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ICMR-RMRC भुवनेश्वर में वायरल रिसर्च एवं डायग्नोस्टिक लैब, सीक्वेंसिंग लैब, वैक्सीन डेवलपमेंट लैब, COBAS लैब और टीबी के लिए नेशनल रेफरेंस लैब जैसी सुविधाएं मौजूद हैं। इनका इस्तेमाल संक्रमण की पहचान, निगरानी और नए वायरस की जांच जैसी गतिविधियों के लिए किया जा रहा है।
मलेरिया के खिलाफ स्वदेशी वैक्सीन पर बड़ा काम
मलेरिया के खिलाफ ICMR-RMRC भुवनेश्वर ने AdFalciVax नाम का वैक्सीन कैंडिडेट विकसित किया है। ICMR के अनुसार यह recombinant chimeric multi-stage malaria vaccine है, जिसे Plasmodium falciparum के खिलाफ विकसित किया गया है।
इस वैक्सीन को मलेरिया परजीवी के अलग-अलग महत्वपूर्ण चरणों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है। इसका उद्देश्य संक्रमण से बचाव के साथ-साथ मच्छरों के जरिए होने वाले community transmission को कम करना भी है।
इस परियोजना में ICMR-RMRC भुवनेश्वर के साथ ICMR-National Institute of Malaria Research और National Institute of Immunology की विशेषज्ञता भी शामिल है।

अभी आम इस्तेमाल के लिए उपलब्ध नहीं है वैक्सीन
AdFalciVax को लेकर यह स्पष्ट करना जरूरी है कि यह अभी आम लोगों के इस्तेमाल के लिए उपलब्ध वैक्सीन नहीं है। ICMR के दस्तावेज के मुताबिक इसकी Technology Readiness Level-4 बताई गई है और थर्ड-पार्टी वैलिडेशन की प्रक्रिया जारी है।
ICMR ने वर्ष 2025 में इसके टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के लिए Expression of Interest भी जारी किया था। मानव उपयोग से पहले इसके क्लिनिकल विकास, सुरक्षा और प्रभावशीलता से जुड़े परीक्षणों तथा नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया जरूरी होगी।
ओडिशा में DAMaN मॉडल से मलेरिया नियंत्रण
ओडिशा में मलेरिया नियंत्रण के लिए DAMaN कार्यक्रम महत्वपूर्ण रहा है। कठिन भौगोलिक क्षेत्रों, जंगलों और जनजातीय इलाकों में सक्रिय निगरानी और उपचार के जरिए मलेरिया के मामलों को कम करने की दिशा में इस मॉडल का इस्तेमाल किया गया है।
अब वैक्सीन रिसर्च के साथ आधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं और फील्ड-आधारित निगरानी को जोड़कर मलेरिया उन्मूलन की कोशिश की जा रही है।
डेंगू की वैक्सीन पर भी शोध
मलेरिया के अलावा डेंगू के खिलाफ वैक्सीन विकसित करने और उसके परीक्षण की दिशा में भी शोध जारी है। डेंगू के गंभीर मामलों को रोकने के लिए प्रभावी वैक्सीन विकसित करना सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जाता है।
हालांकि किसी भी वैक्सीन को आम इस्तेमाल में लाने से पहले उसके सुरक्षा और प्रभावशीलता संबंधी वैज्ञानिक परीक्षण तथा नियामकीय मंजूरी जरूरी होती है।
आदिवासी और दूरदराज इलाकों पर विशेष फोकस
ICMR-RMRC भुवनेश्वर की शोध गतिविधियों में ग्रामीण और कठिन क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा रहा है। मलेरिया, टीबी, वेक्टर-बोर्न डिजीज, पर्यावरणीय निगरानी, प्राथमिक स्वास्थ्य और स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना इसके प्रमुख शोध क्षेत्रों में शामिल हैं।
जनजातीय क्षेत्रों में बीमारी की समय पर पहचान, स्क्रीनिंग, उपचार तक पहुंच और स्वास्थ्य जागरूकता बढ़ाना राष्ट्रीय उन्मूलन अभियानों के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है।
कोविड वैक्सीन और हार्ट अटैक पर क्या कहा?
कोविड के बाद हार्ट अटैक और वैक्सीन को लेकर सोशल मीडिया पर कई दावे किए जाते रहे हैं। डॉ. संघमित्रा पति ने उपलब्ध वैज्ञानिक शोध के आधार पर कोविड वैक्सीन को हार्ट अटैक का कारण मानने के दावे को वैज्ञानिक प्रमाणों से परे बताया।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक किसी वैक्सीन और बीमारी के बीच संबंध का आकलन बड़े स्तर के वैज्ञानिक आंकड़ों, महामारी विज्ञान संबंधी अध्ययनों और सुरक्षा निगरानी के आधार पर किया जाता है। इसलिए सोशल मीडिया पर सामने आने वाले व्यक्तिगत अनुभवों या अपुष्ट दावों को वैज्ञानिक निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
भविष्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में AI और वैक्सीन की बड़ी भूमिका
ICMR-RMRC भुवनेश्वर में टीबी की शुरुआती पहचान के लिए AI आधारित एक्स-रे विश्लेषण, मलेरिया के लिए स्वदेशी वैक्सीन, वायरस की निगरानी और अत्याधुनिक लैब सुविधाओं पर काम हो रहा है। इन प्रयासों का फोकस बीमारी की जल्दी पहचान, बेहतर निगरानी और समय पर उपचार तक मरीजों की पहुंच बढ़ाने पर है।
आने वाले समय में सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यवस्था में केवल नई दवाओं और वैक्सीन ही नहीं, बल्कि AI, मजबूत डायग्नोस्टिक नेटवर्क और दूरदराज क्षेत्रों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच भी अहम भूमिका निभा सकती है।

