मदन राठौड़ के गढ़ में BJP को बड़ा झटका! पाली निगम में कांग्रेस सबसे आगे, अपने वार्ड में भी हारी बीजेपी
पाली नगर निगम के 65 वार्डों में कांग्रेस ने 29 सीटें जीतकर बीजेपी को पीछे छोड़ दिया। बीजेपी को 21 और निर्दलीयों को 15 सीटें मिलीं। मदन राठौड़ के वार्ड 23 में भी बीजेपी प्रत्याशी की हार ने सियासी चर्चाएं तेज कर दी हैं।
राजस्थान निकाय चुनाव 2026 के नतीजों ने सियासी तस्वीर में बड़ा उलटफेर कर दिया है। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ के गृह जिले पाली में कांग्रेस ने शानदार प्रदर्शन करते हुए बीजेपी को पीछे छोड़ दिया है। 65 वार्डों वाले पाली नगर निगम में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनकर सामने आई है। खास बात यह है कि बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ जिस वार्ड में रहते हैं, वहां भी बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा है। ऐसे में पाली का परिणाम बीजेपी के लिए महज एक निकाय चुनाव की हार नहीं, बल्कि प्रदेश संगठन के स्तर पर भी बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है।
पाली नगर निगम के 65 वार्डों के सामने आए नतीजों में कांग्रेस ने 29 सीटों पर कब्जा जमाया है, जबकि बीजेपी 21 वार्डों तक सिमट गई। वहीं 15 वार्डों में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है। कांग्रेस बहुमत के जादुई आंकड़े तक नहीं पहुंच पाई है, लेकिन सबसे बड़ी पार्टी बनने के कारण महापौर पद की दौड़ में उसकी स्थिति मजबूत हो गई है। अब असली खेल उन 15 निर्दलीय पार्षदों के समर्थन को लेकर होगा, जिनके रुख से पाली नगर निगम की सत्ता का फैसला हो सकता है।
10 साल बाद BJP के हाथ से निकलता दिखा पाली निगम
पाली नगर निगम पर पिछले करीब एक दशक से बीजेपी का कब्जा रहा है। ऐसे में इस बार सत्ता का समीकरण बदलना बीजेपी के लिए बड़ा झटका है। कांग्रेस ने न सिर्फ बीजेपी से बढ़त छीनी, बल्कि चुनावी परिस्थितियां उसके पक्ष में ऐसी बनीं कि अब महापौर पद पर उसकी दावेदारी सबसे मजबूत नजर आ रही है।
हालांकि कांग्रेस को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। इसलिए निगम की अगली सरकार बनाने के लिए निर्दलीय पार्षदों की भूमिका बेहद अहम हो गई है। 15 निर्दलीय पार्षदों में से किसका समर्थन किस पार्टी को मिलता है, इसी पर महापौर की कुर्सी का अंतिम फैसला निर्भर करेगा।
मदन राठौड़ के वार्ड नंबर 23 में भी BJP को हार
पाली के नतीजों में सबसे ज्यादा चर्चा वार्ड नंबर 23 की हो रही है। यही वह वार्ड है जहां बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ रहते हैं। यहां बीजेपी की प्रत्याशी खुशबू लोढ़ा को हार का सामना करना पड़ा और कांग्रेस ने जीत दर्ज कर ली।
हालांकि मदन राठौड़ मूल रूप से सुमेरपुर के रहने वाले हैं और सुमेरपुर क्षेत्र में बीजेपी का प्रदर्शन बेहतर रहा है, लेकिन पाली शहर में उनके अपने वार्ड में बीजेपी की हार ने राजनीतिक चर्चाओं को तेज कर दिया है। राठौड़ पाली बीजेपी के कई बार जिलाध्यक्ष रह चुके हैं और सुमेरपुर से दो बार विधायक भी रहे हैं। ऐसे में उनके गृह जिले में बीजेपी का पिछड़ना पार्टी के लिए खासा अहम माना जा रहा है।
चुनाव से पहले BJP को लगा था बड़ा झटका
पाली के चुनावी समीकरणों में चुनाव से पहले ही बड़ा बदलाव देखने को मिला था। बीजेपी की पूर्व महापौर रेखा राकेश भाटी और उनके पति राकेश भाटी ने चुनाव से पहले कांग्रेस का दामन थाम लिया था। इसके बाद राकेश भाटी कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे और अब उन्होंने जीत भी दर्ज कर ली है।
रेखा राकेश भाटी पाली नगर निगम बनने के बाद पहली महापौर बनी थीं। पाली पहले नगर परिषद हुआ करता था, जिसे पूर्ववर्ती अशोक गहलोत सरकार के कार्यकाल में नगर निगम का दर्जा दिया गया था। निगम बनने के बाद हुए शुरुआती चुनावी दौर में बीजेपी का प्रभाव मजबूत रहा, लेकिन इस बार नतीजे पूरी तरह बदल गए हैं।
कांग्रेस के सामने भी कम नहीं थीं चुनावी चुनौतियां
दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस ने यह बढ़त आसान परिस्थितियों में हासिल नहीं की। पार्टी के चार प्रत्याशियों के नामांकन खारिज हो गए थे। वहीं दो उम्मीदवारों के सिंबल समय पर नहीं पहुंच पाए। एक कांग्रेस प्रत्याशी ने बीजेपी उम्मीदवार को समर्थन दे दिया। इन घटनाक्रमों के बाद कांग्रेस के 65 में से सिर्फ 58 वार्डों में उम्मीदवार चुनाव लड़ सके।
इसके बावजूद कांग्रेस ने 58 वार्डों में से 29 पर जीत हासिल की। यानी जिन सीटों पर कांग्रेस ने प्रत्याशी उतारे, उनमें से आधी सीटों पर उसे जीत मिली। यही वजह है कि पाली के नतीजों को कांग्रेस के लिए खास तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
अब निर्दलीय तय करेंगे पाली की अगली सरकार?
पाली नगर निगम में सत्ता की चाबी अब निर्दलीय पार्षदों के हाथ में दिखाई दे रही है। कांग्रेस 29 सीटों के साथ सबसे आगे है और बीजेपी 21 सीटों पर है। बहुमत के लिए जरूरी आंकड़े तक पहुंचने के लिए दोनों दलों को निर्दलीयों का समर्थन जुटाना होगा।
यानी चुनावी मुकाबला भले ही खत्म हो गया हो, लेकिन पाली निगम की सत्ता के लिए राजनीतिक जोड़-तोड़ का दौर अब शुरू होगा। किस पार्टी के साथ कितने निर्दलीय जाते हैं और महापौर की कुर्सी किसके खाते में जाती है, इस पर सभी की नजरें रहेंगी।
पाली के साथ झालावाड़ में भी कांग्रेस का दमदार प्रदर्शन
निकाय चुनाव में कांग्रेस के लिए पाली का परिणाम इसलिए भी अहम है क्योंकि पार्टी ने पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले झालावाड़ में भी बीजेपी को चुनौती दी है। ऐसे में राजस्थान के निकाय चुनाव परिणामों में कांग्रेस का प्रदर्शन पार्टी के लिए उत्साह बढ़ाने वाला माना जा रहा है।
वहीं बीजेपी के लिए पाली का परिणाम कई सवाल खड़े करता है। प्रदेश अध्यक्ष के गृह जिले में पार्टी का पिछड़ना, उनके अपने वार्ड में बीजेपी की हार और 10 साल से चले आ रहे निगम के नियंत्रण का हाथ से निकलना—इन तीनों पहलुओं ने पाली के नतीजे को राजस्थान की सियासत में खास बना दिया है।

