Kishau Project: राजस्थान को मिलेगा टौंस नदी का 124 MCM पानी, 6 राज्यों ने किया समझौता
किशाऊ बहुद्देशीय परियोजना के एमओयू के बाद राजस्थान को 124 MCM पानी मिलने का रास्ता साफ हुआ है। इस पानी से सीकर, चूरू और झुंझुनूं समेत शेखावाटी क्षेत्र में पेयजल उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान को टौंस नदी पर प्रस्तावित किशाऊ बहुद्देशीय परियोजना से 124 MCM पानी मिलेगा। मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में राजस्थान समेत छह राज्यों ने किशाऊ परियोजना के एमओयू पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के बाद शेखावाटी क्षेत्र के सीकर, चूरू और झुंझुनूं सहित आसपास के इलाकों में पेयजल उपलब्धता बढ़ाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है।
राजस्थान को मिलेगा 124 MCM पानी
किशाऊ बांध से मिलने वाला पानी ताजेवाला हैड से चूरू के हासियावास तक प्रस्तावित तीन पाइपलाइनों के जरिए राजस्थान पहुंचाया जाएगा। इसका इस्तेमाल सीकर, चूरू, झुंझुनूं और आसपास के क्षेत्रों में पेयजल समेत अन्य जरूरतों के लिए किया जाएगा।
समझौते के तहत हिमाचल प्रदेश अपने जल हिस्से का 95 प्रतिशत पानी राजस्थान और दिल्ली को देगा, जबकि 5 प्रतिशत पानी अपने पास रखेगा। हिमाचल के हिस्से के 95 प्रतिशत पानी में से 75 प्रतिशत दिल्ली और 25 प्रतिशत राजस्थान को मिलेगा।
छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने किए हस्ताक्षर
किशाऊ परियोजना के एमओयू पर राजस्थान, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा के मुख्यमंत्रियों ने हस्ताक्षर किए। कार्यक्रम में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी मौजूद रहे।
इस समझौते को लंबे समय से अटकी जल परियोजना को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया है।
क्यों अटकी थी किशाऊ परियोजना?
किशाऊ परियोजना में हिमाचल प्रदेश के बिजली हिस्से की लागत को लेकर मामला लंबे समय से अटका हुआ था। अब हुए समझौते के तहत दिल्ली और राजस्थान हिमाचल प्रदेश के विद्युत घटक की लागत वहन करेंगे। इसके बाद परियोजना को आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हुआ है।
क्या है किशाऊ परियोजना?
किशाऊ बहुद्देशीय परियोजना यमुना की प्रमुख सहायक नदी टौंस पर प्रस्तावित है। किशाऊ बांध उत्तराखंड के देहरादून और हिमाचल प्रदेश के सिरमौर की सीमा पर बनाया जाना प्रस्तावित है।
करीब 15,000 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना से लगभग 660 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लक्ष्य है। परियोजना से राजस्थान के अलावा उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा को भी लाभ मिलने की बात कही गई है।
शेखावाटी क्षेत्र को क्या फायदा होगा?
राजस्थान को मिलने वाले 124 MCM पानी से शेखावाटी के कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति को मजबूती मिलने की उम्मीद है। खासतौर पर सीकर, चूरू और झुंझुनूं जैसे क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए यह परियोजना महत्वपूर्ण हो सकती है।
राज्य सरकार की ओर से इसे राजस्थान के लिए बड़ी जल परियोजनाओं में शामिल किया गया है। इससे पहले यमुना जल समझौता, रामजल सेतु लिंक परियोजना और नर्मदा जल समझौते जैसी परियोजनाओं का भी उल्लेख किया गया है।

