कौन हैं बेनजीर नदीम खान? चूरू पुलिस की पहली महिला चालक कांस्टेबल बनने की कहानी
बेनजीर नदीम खान चूरू पुलिस की पहली महिला चालक कांस्टेबल बनी हैं। तीन प्रयासों के बाद मिली सफलता और पिता के निधन के बाद भी लक्ष्य नहीं छोड़ा।
झुंझुनूं की बेनजीर नदीम खान ने चुनौतियों के बीच पुलिस भर्ती परीक्षा पास कर चूरू पुलिस में पहली महिला चालक कांस्टेबल बनने का मुकाम हासिल किया। पिता के निधन के बाद भी उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा।
चूरू पुलिस में पहली महिला चालक बनीं बेनजीर
राजस्थान के चूरू पुलिस विभाग में बेनजीर नदीम खान ने महिला चालक कांस्टेबल के तौर पर अपनी अलग पहचान बनाई है। झुंझुनूं जिले की रहने वाली बेनजीर ने पुलिस की नौकरी पाने के लिए कई चुनौतियों का सामना किया और आखिरकार सफलता हासिल की।
वर्तमान में वह 112 पुलिस वाहन की चालक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी कहानी नौकरी हासिल करने से कहीं आगे की है, क्योंकि उन्होंने पारिवारिक परिस्थितियों और असफलताओं के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाना जारी रखा।
तीन प्रयासों के बाद मिली कांस्टेबल की नौकरी
बेनजीर ने पुलिस भर्ती परीक्षा में कांस्टेबल पद के लिए तीन बार प्रयास किया। शुरुआती दो प्रयासों में उन्हें सफलता नहीं मिली। पहली बार वजन संबंधी मानक के कारण उनका चयन नहीं हो सका, जबकि दूसरी बार मेरिट में स्थान नहीं बन पाया।
उन्होंने असफलताओं से पीछे हटने के बजाय तीसरी बार फिर परीक्षा दी और इस बार उनका चयन हो गया। इसके बाद चालक कांस्टेबल पद के लिए उन्होंने पहली बार प्रयास किया और पहली ही कोशिश में सफल रहीं।
पिता के निधन के बाद भी नहीं छोड़ा सपना
बेनजीर के पिता इलियास अली और मां रियाज बानो ने उन्हें पुलिस सेवा में जाने के लिए प्रोत्साहित किया था। साल 2019 में पिता के निधन के बाद उनके सामने मुश्किल दौर आया, लेकिन उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा।
उन्होंने तैयारी जारी रखी और पुलिस भर्ती में सफलता हासिल की। शादी के बाद भी उन्होंने अपने करियर और लक्ष्य को प्राथमिकता देते हुए आगे बढ़ना जारी रखा।
वाहन चलाने का हुनर बना कामयाबी की वजह
पुलिस भर्ती से पहले ही बेनजीर वाहन चलाना सीख चुकी थीं। यही हुनर बाद में उनके चालक कांस्टेबल पद के लिए भी उपयोगी साबित हुआ।
आज वह पुलिस की वर्दी में 112 वाहन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। उनकी उपलब्धि यह भी दिखाती है कि महिलाओं के लिए पुलिस विभाग में चालक जैसे पदों पर भी आगे बढ़ने के अवसर मौजूद हैं।
महिलाओं के लिए बनीं प्रेरणा
बेनजीर की कहानी उन महिलाओं के लिए उदाहरण है, जो पारिवारिक जिम्मेदारियों, सामाजिक धारणाओं या शुरुआती असफलताओं के कारण अपने लक्ष्य से पीछे हट जाती हैं।
उनका सफर बताता है कि किसी परीक्षा में असफल होना अंतिम परिणाम नहीं होता। लगातार प्रयास और तैयारी के जरिए लक्ष्य तक पहुंचा जा सकता है।
मुस्लिम समाज की युवतियों के लिए भी मिसाल
बेनजीर की उपलब्धि को मुस्लिम समाज की युवतियों के लिए भी प्रेरक उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। उन्होंने पुलिस विभाग में चालक की जिम्मेदारी संभालकर यह दिखाया है कि महिलाएं पारंपरिक रूप से पुरुषों से जुड़े माने जाने वाले कामों में भी अपनी जगह बना सकती हैं।
उनकी कहानी बेटियों को शिक्षा, रोजगार और करियर के नए अवसरों के लिए आगे बढ़ने का संदेश देती है।

