पंजाब की पिच पर आमने-सामने पायलट और पूनिया! 2027 से पहले राजस्थान के दो नेताओं को मिली बड़ी जिम्मेदारी
सचिन पायलट और सतीश पूनिया को पंजाब में अपनी-अपनी पार्टियों की अहम संगठनात्मक जिम्मेदारी मिली है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले पायलट पंजाब कांग्रेस और पूनिया पंजाब BJP की रणनीति व संगठन को संभाल रहे हैं।
छह साल पहले राजस्थान की राजनीति में सचिन पायलट एक बड़े सत्ता-संघर्ष के केंद्र में थे और सतीश पूनिया राजस्थान BJP के प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर राज्य की विपक्षी राजनीति का प्रमुख चेहरा थे। अब 2026 में दोनों नेताओं की राजनीतिक जिम्मेदारियों का केंद्र पंजाब बन गया है। कांग्रेस ने 5 सितंबर को सचिन पायलट को पंजाब का AICC महासचिव प्रभारी नियुक्त किया। इससे पहले BJP ने सतीश पूनिया को पंजाब में पार्टी मामलों का प्रभारी बनाया था। 2027 में पंजाब विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में दोनों राष्ट्रीय दलों के संगठन में राजस्थान से आने वाले इन नेताओं की भूमिका महत्वपूर्ण हो गई है।
पंजाब पहुंचते ही सड़क पर उतरे सचिन पायलट
पंजाब प्रभारी बनने के कुछ ही दिनों बाद सचिन पायलट ने AAP सरकार के खिलाफ सड़क पर उतरकर अपने नए राजनीतिक असाइनमेंट की शुरुआत की। 15 सितंबर को पायलट ने कांग्रेस नेताओं के साथ चंडीगढ़ में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन संगरूर निवासी गुलजार सिंह की मौत और उनके परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों को लेकर था। परिवार ने आरोप लगाया था कि क्षेत्र में ड्रग्स की उपलब्धता को लेकर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से सवाल करने के बाद गुलजार सिंह को प्रताड़ित किया गया। कांग्रेस ने मामले की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच तथा चीमा को हटाने की मांग की। ये परिवार और कांग्रेस के आरोप हैं; अंतिम निष्कर्ष जांच से ही स्थापित होगा। प्रदर्शन के दौरान पायलट और प्रताप सिंह बाजवा सहित कई कांग्रेस नेताओं को पुलिस ने हिरासत में लिया।
BJP ने शुरू की 4,000 KM की नशा मुक्त पंजाब यात्रा
दूसरी ओर BJP ने 18 सितंबर से ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ शुरू कर दी है। चार अलग-अलग स्थानों से निकलने वाली यात्राओं का लक्ष्य करीब 4,000 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए पंजाब के सभी 117 विधानसभा क्षेत्रों तक पहुंचना है। कार्यक्रम 30 सितंबर को जालंधर में समापन रैली के साथ पूरा होना प्रस्तावित है। पंजाब BJP प्रभारी सतीश पूनिया अभियान की तैयारियों में सक्रिय रहे हैं। उन्होंने पंजाब BJP अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों के साथ फाजिल्का में यात्रा की तैयारियों की समीक्षा भी की थी।
इसलिए बन रहा Pilot-Poonia कनेक्शन
पंजाब की राजनीति में इस समय एक दिलचस्प स्थिति बन रही है। कांग्रेस AAP सरकार को ड्रग्स, कानून-व्यवस्था और अन्य मुद्दों पर घेरने की कोशिश कर रही है। BJP भी नशे के मुद्दे को राज्यव्यापी अभियान का रूप दे रही है। इन दोनों पार्टियों की पंजाब रणनीति में राजस्थान से आने वाले सचिन पायलट और सतीश पूनिया महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारियों में हैं। हालांकि इसे सीधे व्यक्तिगत ‘पायलट बनाम पूनिया’ मुकाबला मानना सही नहीं होगा। दोनों किसी एक सीट पर एक-दूसरे के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ रहे और उनकी भूमिका अपनी-अपनी पार्टी के संगठन एवं रणनीति को संभालने की है।
2020 की कहानी क्यों याद आ रही?
जुलाई 2020 में राजस्थान की अशोक गहलोत सरकार के दौरान कांग्रेस में बड़ा राजनीतिक संकट पैदा हुआ था। सचिन पायलट और उनके समर्थक विधायक तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व के खिलाफ खड़े हुए थे। इसी दौरान कथित विधायक खरीद-फरोख्त और सरकार गिराने के प्रयासों की जांच कर रही राजस्थान पुलिस की SOG ने गहलोत और पायलट दोनों को बयान दर्ज कराने के नोटिस भेजे थे। पायलट खेमे में नोटिस को लेकर नाराजगी की खबरें आई थीं। बाद में कांग्रेस ने पायलट को उपमुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया था। राजनीतिक संकट समझौते के बाद शांत हुआ और पायलट कांग्रेस में बने रहे। छह साल बाद स्थिति बिल्कुल अलग है। अब पायलट को दूसरे राज्य में कांग्रेस संगठन संभालने की जिम्मेदारी मिली है।
पायलट की पहली चुनौती, कांग्रेस को साथ रखना
पंजाब कांग्रेस लंबे समय से आंतरिक खींचतान से जूझती रही है। प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग, पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी और दूसरे वरिष्ठ नेताओं के बीच संतुलन बनाना नए प्रभारी के लिए महत्वपूर्ण चुनौती है। पायलट ने संकेत दिया है कि पार्टी 2027 में किसी एक मुख्यमंत्री चेहरे को पहले से घोषित करने के बजाय सामूहिक नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ेगी। ऐसे में उनकी भूमिका केवल AAP या BJP के खिलाफ चुनावी रणनीति बनाने की नहीं, बल्कि कांग्रेस के भीतर विभिन्न शक्ति केंद्रों को साथ रखने की भी होगी।
पूनिया के सामने संगठन विस्तार की चुनौती
सतीश पूनिया के सामने अलग परिस्थिति है। BJP पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी की बात कर रही है। ऐसे में पार्टी को अपने संगठन का भौगोलिक और सामाजिक विस्तार करना होगा। ‘नशा मुक्त पंजाब यात्रा’ को इसी व्यापक आउटरीच के संदर्भ में देखा जा रहा है। BJP इसे नशे के खिलाफ सामाजिक अभियान बता रही है, जबकि चुनाव से पहले इसके स्पष्ट राजनीतिक आयाम भी हैं।
लेकिन मुकाबले का तीसरा और सबसे अहम पक्ष AAP
पंजाब की राजनीतिक तस्वीर को केवल कांग्रेस और BJP तक सीमित नहीं किया जा सकता। राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है। विपक्ष के ड्रग्स संबंधी आरोपों के जवाब में AAP अपनी सरकार की कार्रवाइयों और ‘युद्ध नशेयां विरुद्ध’ अभियान को सामने रख रही है। पार्टी BJP और कांग्रेस के आरोपों पर भी पलटवार कर रही है। इसलिए 2027 की राजनीति कई दलों और कई मुद्दों के बीच आकार लेगी।
राजस्थान से पंजाब पहुंची नई राजनीतिक परीक्षा
राजस्थान में सचिन पायलट और सतीश पूनिया अलग-अलग राजनीतिक दौर में अपने दलों के प्रमुख प्रदेश चेहरे रह चुके हैं। अब दोनों के सामने राजस्थान से बाहर संगठनात्मक क्षमता दिखाने की चुनौती है। पायलट को पंजाब कांग्रेस के भीतर संतुलन बनाते हुए AAP सरकार के खिलाफ पार्टी की रणनीति आगे बढ़ानी है। पूनिया को BJP के संगठनात्मक विस्तार और 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी में भूमिका निभानी है। इसलिए पंजाब की पिच पर ‘पायलट बनाम पूनिया’ किसी व्यक्तिगत चुनावी मुकाबले का नाम नहीं है। यह राजस्थान के दो अनुभवी राजनीतिक चेहरों को मिली दो अलग जिम्मेदारियों की समानांतर परीक्षा है। 2027 का चुनाव इसका राजनीतिक परिणाम बताएगा; फिलहाल दोनों दल अपनी-अपनी रणनीति और संगठन को मजबूत करने में जुटे हैं।

