कांग्रेस का ‘सीक्रेट प्लान’ लीक? जयपुर की 6 विधानसभा सीटों पर बदल सकते हैं चेहरे, निकाय नतीजों ने बढ़ाया दबाव

जयपुर नगर निगम चुनाव में BJP ने 78, कांग्रेस ने 57 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते। विधानसभा क्षेत्रवार नतीजों के बाद 2028 से पहले कांग्रेस के स्थानीय नेतृत्व और उम्मीदवारों की समीक्षा की चर्चा तेज है, हालांकि छह चेहरे बदलने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं हुआ है।

कांग्रेस का ‘सीक्रेट प्लान’ लीक? जयपुर की 6 विधानसभा सीटों पर बदल सकते हैं चेहरे, निकाय नतीजों ने बढ़ाया दबाव

राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2028 में होने हैं, लेकिन जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों ने कांग्रेस के लिए उम्मीदवारों और स्थानीय नेतृत्व की समीक्षा की बहस अभी से शुरू कर दी है। राजधानी के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के प्रदर्शन में बड़ा अंतर दिखाई दिया है। हालांकि कांग्रेस ने जयपुर की छह सीटों पर चेहरे बदलने की कोई आधिकारिक योजना घोषित नहीं की है। ऐसे में ‘छह चेहरे बाहर’ को फिलहाल फैसला नहीं, बल्कि निकाय चुनाव के परिणामों से पैदा हुआ राजनीतिक सवाल माना जाना चाहिए।

जयपुर में BJP 78, कांग्रेस 57

चार वार्डों में री-पोलिंग के बाद जयपुर नगर निगम की सभी 150 सीटों की अंतिम तस्वीर साफ हो गई है। BJP ने 78, कांग्रेस ने 57 और निर्दलीयों ने 15 वार्ड जीते। री-पोलिंग वाली चारों सीटें कांग्रेस के खाते में गईं, जिससे उसका आंकड़ा 53 से बढ़कर 57 हो गया। लेकिन पार्टी नेतृत्व के लिए कुल आंकड़े से ज्यादा दिलचस्प विधानसभा क्षेत्रवार प्रदर्शन हो सकता है। 

आदर्श नगर, सिविल लाइंस और बगरू ने दी राहत

आदर्श नगर में कांग्रेस विधायक रफीक खान के क्षेत्र में पार्टी ने 17 में से 10 वार्ड जीते। BJP को छह और निर्दलीय को एक सीट मिली। सिविल लाइंस में मुकाबला बराबरी का रहा। BJP और कांग्रेस दोनों ने आठ-आठ वार्ड जीते। यहां BJP के गोपाल शर्मा विधायक हैं, जबकि कांग्रेस में प्रताप सिंह खाचरियावास प्रमुख चेहरा रहे हैं। बगरू में कांग्रेस ने 14 में से आठ और BJP ने छह वार्ड जीते। यह BJP विधायक कैलाश वर्मा का क्षेत्र है। पूर्व कांग्रेस विधायक गंगा देवी 2023 का विधानसभा चुनाव हार गई थीं, लेकिन निकाय नतीजों ने क्षेत्र में कांग्रेस के संगठनात्मक आधार की मौजूदगी दिखाई है।

झोटवाड़ा में कांग्रेस के सामने संगठन का सवाल

झोटवाड़ा में BJP के राज्यमंत्री राजवर्धन सिंह राठौड़ विधायक हैं। यहां BJP ने निकाय चुनाव में कांग्रेस पर बढ़त बनाई। 2023 में कांग्रेस ने अभिषेक चौधरी को विधानसभा प्रत्याशी बनाया था। निकाय चुनाव में पार्टी का प्रदर्शन 2028 से पहले इस सवाल को जन्म दे सकता है कि कांग्रेस पुराने नेतृत्व के साथ आगे बढ़ेगी या BJP के मजबूत संगठन को चुनौती देने के लिए नया विकल्प तैयार करेगी।

विद्याधर नगर में लंबे समय से BJP का दबदबा

उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी के विद्याधर नगर क्षेत्र में भी BJP ने स्पष्ट बढ़त बनाई। 2023 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के प्रत्याशी सीताराम अग्रवाल थे। दीया कुमारी ने उन्हें 71,368 वोटों से हराया था। इससे पहले विक्रम सिंह शेखावत भी 2008 और 2013 में यहां कांग्रेस प्रत्याशी रह चुके हैं। लगातार चुनावी चुनौतियों के कारण विद्याधर नगर उन सीटों में शामिल हो सकती है जहां कांग्रेस को उम्मीदवार से आगे बढ़कर पूरे संगठनात्मक मॉडल की समीक्षा करनी पड़े।

मालवीय नगर में अर्चना शर्मा के सामने सवाल

मालवीय नगर में 15 में से BJP ने नौ, कांग्रेस ने पांच और निर्दलीय ने एक वार्ड जीता। कांग्रेस की अर्चना शर्मा यहां लगातार तीन विधानसभा चुनाव हार चुकी हैं। ऐसे में 2028 में पार्टी उनके अनुभव पर दोबारा भरोसा करती है या नए चेहरे को तैयार करती है, यह आने वाले समय का महत्वपूर्ण सवाल होगा। निकाय चुनाव का परिणाम अकेले इस फैसले का आधार नहीं हो सकता, लेकिन यह पार्टी की समीक्षा में एक डेटा-पॉइंट जरूर बन सकता है।

किशनपोल में विधायक होने के बावजूद BJP आगे

किशनपोल कांग्रेस के मौजूदा विधायक अमीन कागजी की सीट है। इसके बावजूद निकाय चुनाव में 12 वार्डों में BJP छह, कांग्रेस चार और निर्दलीय दो सीटों पर जीते। यहां टिकट वितरण को लेकर कांग्रेस के भीतर असंतोष और बगावत भी सामने आई थी। ऐसे में पार्टी के सामने केवल विधायक के व्यक्तिगत जनाधार का नहीं, बल्कि स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं के बीच तालमेल का सवाल भी रहेगा।

हवामहल में 974 वोट की दूरी से निकाय चुनाव की दूरी तक

हवामहल कांग्रेस के लिए विशेष रूप से दिलचस्प है। 2023 विधानसभा चुनाव में BJP के बालमुकुंदाचार्य ने कांग्रेस के आर.आर. तिवारी को केवल 974 वोटों से हराया था। लेकिन निकाय चुनाव में BJP ने यहां 15 में आठ वार्ड जीते। कांग्रेस को चार और निर्दलीयों को तीन सीटें मिलीं। दोनों चुनावों के बीच अंतर कांग्रेस को स्थानीय संगठन, टिकट वितरण और वार्ड स्तर के समीकरणों की समीक्षा का कारण दे सकता है।

सांगानेर में मुख्यमंत्री के सामने कांग्रेस की चुनौती

सांगानेर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विधानसभा क्षेत्र है। 2023 में उन्होंने कांग्रेस के पुष्पेंद्र भारद्वाज को 48,081 वोटों से हराया था। भजनलाल शर्मा को 1,45,162 और भारद्वाज को 97,081 वोट मिले थे। निकाय चुनाव में भी BJP ने इस क्षेत्र में स्पष्ट बढ़त बनाई। ऐसे में कांग्रेस के लिए सवाल सिर्फ पुष्पेंद्र भारद्वाज के टिकट का नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री के क्षेत्र में अगले दो वर्षों में एक मजबूत संगठनात्मक विकल्प खड़ा करने का है।

क्या वास्तव में छह चेहरे बदले जाएंगे?

फिलहाल इसका कोई आधिकारिक आधार सामने नहीं आया है। निकाय चुनाव और विधानसभा चुनाव की प्रकृति भी अलग होती है। वार्ड चुनाव में स्थानीय उम्मीदवार, व्यक्तिगत संपर्क, बगावत और नागरिक मुद्दों की भूमिका बड़ी होती है। इसके अलावा नए परिसीमन का प्रभाव भी चर्चा में है। जयपुर, जोधपुर और कोटा के आंकड़ों के एक विश्लेषण में तीनों शहरों को मिलाकर कांग्रेस को BJP से थोड़ा अधिक वोट मिलने के बावजूद BJP ने ज्यादा वार्ड जीते। इससे पता चलता है कि केवल सीट संख्या के आधार पर किसी विधानसभा नेता का अंतिम मूल्यांकन करना अधूरा हो सकता है।

पुराने चेहरे हटाना नहीं, नए चेहरे तैयार करना बड़ी चुनौती

निकाय चुनाव का एक दूसरा संदेश कांग्रेस के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। राजस्थान में कई युवा उम्मीदवार जीतकर सामने आए हैं। जयपुर में कांग्रेस के 21 वर्षीय फैज हसन और 22 वर्षीय सुमन भाटी जैसे युवा प्रत्याशी पार्षद बने हैं। ऐसे नेताओं में से कौन अगले दो वर्षों में बड़ा स्थानीय नेटवर्क तैयार करता है, यह भी 2028 की उम्मीदवार रणनीति पर असर डाल सकता है। इसलिए कांग्रेस की संभावित रणनीति को सिर्फ ‘पुराने छह चेहरे हटेंगे’ के रूप में देखना जल्दबाजी होगी। असल सवाल होगा । पार्टी कहां पुराने नेता को मजबूत करेगी, कहां उसके समानांतर दूसरी लाइन तैयार करेगी और कहां पूरी तरह नया नेतृत्व खड़ा करेगी? जयपुर नगर निगम चुनाव ने इसका फैसला नहीं किया है। लेकिन उसने कांग्रेस को एक विधानसभा-वार रिपोर्ट कार्ड जरूर दे दिया है। और 2028 में टिकट बांटने का समय आएगा तो संभव है कि पार्टी उस रिपोर्ट कार्ड को फिर खोले।