डोटासरा का दावा- 13 कांग्रेस बाड़ों में पहुंची पुलिस, बोले- ऐसा ही चला तो बिगड़ेंगे हालात

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद 305 नगर निकायों में बोर्ड गठन की कवायद तेज है। पार्षदों की बाड़ेबंदी के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने 13 बाड़ों में पुलिस पहुंचने और पार्षदों पर दबाव बनाने के आरोप लगाए हैं।

डोटासरा का दावा- 13 कांग्रेस बाड़ों में पहुंची पुलिस, बोले- ऐसा ही चला तो बिगड़ेंगे हालात

राजस्थान में नगर निकाय चुनाव के नतीजों के बाद अब बोर्ड गठन को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पार्षदों की बाड़ेबंदी, समर्थन जुटाने और बहुमत का आंकड़ा पूरा करने की कोशिशों के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने पुलिस की भूमिका को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। डोटासरा का दावा है कि कांग्रेस के 13 बाड़ों में पुलिस पहुंची और पार्षदों पर दबाव बनाने की कोशिश की गई। इन आरोपों पर सरकार और पुलिस का पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

डोटासरा ने पुलिस महानिदेशक से कथित हस्तक्षेप रोकने की अपील करते हुए चेतावनी दी कि अगर घटनाक्रम इसी तरह आगे बढ़ा तो प्रदेश में आक्रोश और तनाव की स्थिति बन सकती है। कांग्रेस का आरोप है कि बोर्ड गठन से पहले पार्षदों को अपने खेमे में बनाए रखने और दूसरे पक्ष के संपर्क से बचाने के लिए बाड़ेबंदी की गई है। दूसरी ओर, इस तरह की राजनीतिक गोलबंदी निकाय चुनाव के बाद सत्ता के स्थानीय समीकरणों को लेकर चल रही खींचतान का हिस्सा है।

305 निकायों में बोर्ड गठन की तैयारी

राजस्थान के 305 नगर निकायों में मेयर, सभापति और चेयरमैन पदों के गठन की प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है। नामांकन वापसी के बाद 592 उम्मीदवार मैदान में रह गए हैं और 21 सितंबर को इन पदों के लिए चुनाव होना है। वहीं 32 निकायों में प्रमुख पदों पर निर्विरोध निर्वाचन हो चुका है।

इन 32 निर्विरोध निर्वाचनों में बीजेपी के 28 उम्मीदवार, कांग्रेस के 2 उम्मीदवार और 2 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। भीलवाड़ा और भरतपुर नगर निगम में भी मेयर पद पर निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। भरतपुर में खास तौर पर दिलचस्प स्थिति रही, जहां 65 सदस्यीय सदन में निर्दलीय पार्षदों की संख्या 36 है, लेकिन मेयर पद बीजेपी के खाते में गया।

निर्दलीयों ने बढ़ाई दोनों दलों की चिंता

निकाय चुनाव के नतीजों के बाद कई जगह बीजेपी और कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत नहीं है। ऐसे में निर्दलीय पार्षद बोर्ड गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। यही वजह है कि चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों दल अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने और जरूरी समर्थन जुटाने की कोशिश में हैं।

कई निकायों में अब मुकाबला केवल बीजेपी और कांग्रेस के बीच नहीं रह गया है। निर्दलीय पार्षदों की संख्या और उनका रुख यह तय कर सकता है कि स्थानीय निकाय की कमान किसके हाथ जाएगी। इसीलिए बाड़ेबंदी से लेकर समर्थन जुटाने तक की राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं।

कुचेरा से बीकानेर तक आरोपों ने बढ़ाई हलचल

बाड़ेबंदी के बीच कुचेरा में एक निर्दलीय पार्षद के कथित अपहरण को लेकर विवाद सामने आया है। वहीं बीकानेर में कांग्रेस पार्षदों को अपने खेमे में शामिल कराने के प्रयासों के आरोप लगाए गए हैं। कांग्रेस की ओर से इन घटनाक्रमों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, जबकि संबंधित आरोपों पर सभी पक्षों की स्थिति अलग-अलग है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का 13 बाड़ों में पुलिस पहुंचने का आरोप राजनीतिक बहस का नया मुद्दा बन गया है। फिलहाल यह आरोप राजनीतिक स्तर पर लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि तथा पुलिस-सरकार का विस्तृत पक्ष सामने आना बाकी है।

21 सितंबर को होगा अगला बड़ा फैसला

अब नजर 21 सितंबर को होने वाले चेयरमैन और अध्यक्ष पदों के चुनाव पर है। जिन निकायों में मुकाबला बचा हुआ है, वहां अंतिम समय तक पार्षदों की गोलबंदी और समर्थन के समीकरण बदल सकते हैं। वहीं जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम समेत चार निकायों के स्थगित चुनावों के लिए राज्य निर्वाचन आयोग ने बाद में कार्यक्रम जारी किया है; इन निकायों में अध्यक्ष पद का चुनाव 25 सितंबर को और उपाध्यक्ष पद का चुनाव 26 सितंबर को होगा।

यानी पार्षदों के चुनाव का परिणाम सामने आ चुका है, लेकिन स्थानीय सत्ता की तस्वीर अभी पूरी तरह साफ नहीं हुई है। राजस्थान में अब नजर इस बात पर है कि बाड़ेबंदी, निर्दलीयों के समर्थन और आखिरी दौर की सियासी कवायद के बाद किस निकाय में किसका बोर्ड बनता है।