17 साल में सबसे कमजोर मानसून की ओर भारत! 15% कम बारिश से फसलों पर असर, अल नीनो का बढ़ा खतरा
भारत में 18 सितंबर तक सामान्य से 15 फीसदी कम मानसूनी बारिश हुई है। कम बारिश से खरीफ फसलों और चावल की कीमतों पर असर पड़ा है, वहीं अल नीनो का खतरा भी बढ़ रहा है।
भारत में इस साल मानसून की बारिश सामान्य से काफी कम रही है। 18 सितंबर तक देश में सामान्य से करीब 15 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। अगर बारिश की कमी आगे भी बनी रहती है तो यह 2009 के बाद देश का सबसे कमजोर मानसून हो सकता है। कम बारिश का असर खरीफ फसलों, जलाशयों और कुछ क्षेत्रों में खाद्य कीमतों पर दिखाई देने लगा है।
खरीफ फसलों की बुआई पर भी पड़ा असर
कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों की बुआई पर पड़ा है। कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 18 सितंबर तक खरीफ फसलों की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 15 लाख हेक्टेयर कम क्षेत्र में हुई है।
धान की खेती का रकबा घटा
धान पर इसका सबसे ज्यादा असर बताया जा रहा है। इस साल धान की बुआई का क्षेत्रफल करीब 3.73 फीसदी घटकर 426.81 लाख हेक्टेयर रह गया है। कम बारिश की वजह से धान के उत्पादन में भी कमी आने का अनुमान जताया जा रहा है।
एक अनुमान के मुताबिक, इस साल चावल का उत्पादन करीब 14.4 करोड़ टन रह सकता है, जो पिछले साल के रिकॉर्ड उत्पादन से लगभग 6.5 फीसदी कम है।
दक्षिण भारत में चावल की कीमतों में उछाल
बारिश की कमी का असर कुछ राज्यों में चावल की कीमतों पर भी पड़ा है। दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में धान का रकबा 30 से 40 फीसदी तक कम बताया जा रहा है। इसके चलते प्रीमियम चावल की कीमतों में तेजी आई है।
आंध्र प्रदेश में ग्रेड-1 चावल की कीमत करीब 4,000 रुपए प्रति क्विंटल से बढ़कर 6,200 रुपए प्रति क्विंटल तक पहुंचने की बात सामने आई है।
हालांकि, देश में तत्काल खाद्यान्न संकट की स्थिति नहीं मानी जा रही है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास करीब 5.96 करोड़ टन चावल और धान का भंडार है।
218 जिलों में सूखे जैसे हालात
देश के कई हिस्सों में मानसून की कमी गंभीर बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, देश के 802 जिलों में से 218 जिलों में सूखे जैसी स्थिति बताई गई है।
इन राज्यों में बारिश की कमी ज्यादा
- मेघालय: 59%
- आंध्र प्रदेश: 42%
- पंजाब: 39%
- बिहार: 36%
- कर्नाटक: 30%
- केरल: 28%
- असम: 25%
- तमिलनाडु: 23%
- राजस्थान: 22%
- हरियाणा: 22%
- तेलंगाना: 20%
दिल्ली में सामान्य से ज्यादा बारिश
जहां देश के कई हिस्से बारिश की कमी से जूझ रहे हैं, वहीं दिल्ली में इस मानसून सीजन में सामान्य से 8 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है। दिल्ली में अब तक 562.7 मिमी बारिश हुई है, जबकि सामान्य औसत 522.7 मिमी है।
उत्तराखंड में भी सामान्य से करीब 4 फीसदी ज्यादा बारिश हुई। दूसरी ओर हिमाचल प्रदेश में 9 फीसदी और उत्तर प्रदेश में करीब 4 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
उत्तर प्रदेश के कुछ जिलों में बारिश की कमी काफी ज्यादा रही। गाजियाबाद में 59 फीसदी, देवरिया में 73 फीसदी, शामली में 68 फीसदी और कानपुर देहात में 64 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई।
178 बड़े जलाशयों में पानी की कमी
कमजोर मानसून का असर देश के जल संसाधनों पर भी नजर आ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार, 178 प्रमुख जलाशयों में उनकी कुल क्षमता का करीब 70.66 फीसदी पानी ही मौजूद है।
अल नीनो से बढ़ सकती है परेशानी
कमजोर मानसून के बीच अल नीनो की स्थिति को लेकर भी चिंता बढ़ी है। प्रशांत महासागर के तापमान में असामान्य बढ़ोतरी से अल नीनो के मजबूत होने की आशंका जताई जा रही है।
मौसम की यह स्थिति भारत समेत एशिया के कई हिस्सों में बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकती है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन मौसमी परिस्थितियों और आगे मिलने वाले मौसम संबंधी आंकड़ों के आधार पर ही किया जा सकेगा।

