हाइड्रेंट में नींबू-मिर्च, फायर सिस्टम बंद! जयपुर के कटले में आग ने खोली ‘सुरक्षा व्यवस्था’ की पोल
जयपुर के पुरोहितजी का कटला अग्निकांड के बाद फायर सेफ्टी व्यवस्था पर सवाल खड़े हुए हैं। जांच में एक हाइड्रेंट बंद मिला और दूसरे हाइड्रेंट के भी चालू नहीं होने की जानकारी सामने आई, जबकि दो अग्निशमन अधिकारियों को निलंबित कर तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई गई है।
जयपुर के पुरोहितजी का कटला अग्निकांड अब सिर्फ जले हुए माल और करोड़ों के नुकसान की कहानी नहीं रह गया है। आग बुझने के बाद जो तस्वीर सामने आई, उसने फायर सेफ्टी सिस्टम पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस हाइड्रेंट से आग लगने पर पानी निकलना चाहिए था, जांच के दौरान उसमें नींबू-मिर्च मिली। यानी बाजार में सुरक्षा व्यवस्था थी जरूर, लेकिन सवाल यह है कि **काम की कितनी थी?**
शुक्रवार को राज्य मानवाधिकार आयोग की टीम जब पुरोहितजी का कटला पहुंची तो आयोग अध्यक्ष और पूर्व न्यायाधीश जीआर मूलचंदानी ने मौके पर फायर सेफ्टी इंतजामों का जायजा लिया। आग वाली जगह के पास एक हाइड्रेंट मिला, लेकिन वह चालू हालत में नहीं था। इसके बाद अधिकारियों से सवाल-जवाब शुरू हुए।
‘हाइड्रेंट है… लेकिन चलता भी है?’
आयोग अध्यक्ष ने मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र मीणा से पूछा कि इतने संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले बाजार में फायर फाइटिंग सिस्टम की आखिरी बार जांच कब हुई थी। जवाब में 2023 में आवेदन मिलने की बात सामने आई।
अब सवाल सीधा है—जब बाजार में हजारों लोगों की आवाजाही हो, करोड़ों का कारोबार हो और आग का खतरा हमेशा बना रहे, तो फायर सिस्टम की नियमित जांच के लिए भी क्या किसी आवेदन का इंतजार जरूरी है?
मौके पर मिला हाइड्रेंट निजी परिसर का बताया गया। वहीं नगर निगम का एक और हाइड्रेंट बाजार से करीब 200 मीटर दूर होने की जानकारी सामने आई, लेकिन वह भी चालू नहीं था।
यानी आग के वक्त पानी चाहिए और पानी का इंतजाम मौजूद है… बस चलता हुआ नहीं है।
स्मार्ट सिटी में हाइड्रेंट भी ‘स्मार्ट’?
अधिकारियों के मुताबिक स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत घाटगेट से करीब 8 किलोमीटर के इलाके में 14 हाइड्रेंट लगाए गए थे। सुनने में व्यवस्था काफी अच्छी लगती है—लेकिन हादसे के वक्त अगर सिस्टम काम ही न करे तो फिर सवाल उठना लाजिमी है कि ये हाइड्रेंट सिर्फ नक्शे और प्रोजेक्ट रिपोर्ट में थे या जमीन पर भी पूरी तरह तैयार थे?
आयोग ने यह भी पूछा कि सिस्टम को चालू रखने के लिए विभाग ने क्या कदम उठाए। अधिकारियों ने प्रोजेक्ट के दौरान दिए गए निर्देशों और रिपोर्ट भी सामने रखी।
अब जांच का काम यह पता लगाना है कि हाइड्रेंट सिस्टम की जिम्मेदारी किसकी थी और उसकी नियमित निगरानी क्यों नहीं हुई।
फायर NOC से लेकर छत की वेल्डिंग तक सवाल
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सेठी कॉम्प्लेक्स के भवन मालिक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। पुलिस के मुताबिक भवन निर्माण नियमों के उल्लंघन की भी जांच हो रही है।
इसके अलावा कॉम्प्लेक्स की छत पर रेस्टोरेंट का निर्माण और रात में वेल्डिंग का काम किए जाने की जानकारी सामने आई है। आग की वजह फिलहाल तय नहीं है। शॉर्ट सर्किट के साथ वेल्डिंग के दौरान बिजली के तारों पर बढ़े लोड की संभावना को भी जांच में रखा गया है।
FSL टीम ने मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। यानी अभी आग का ‘फाइनल कारण’ जांच की फाइल में है, लेकिन सवालों की लिस्ट जरूर लंबी हो गई है।
दो अधिकारी सस्पेंड, अब जांच कमेटी देगी जवाब
अग्निकांड के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई हुई है। स्थानीय निकाय विभाग ने जयपुर नगर निगम के मुख्य अग्निशमन अधिकारी देवेंद्र कुमार मीणा और सहायक अग्निशमन अधिकारी कुलदीप माणतवार को निलंबित कर दिया है।
मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है, जिसे सात दिन में सरकार को रिपोर्ट देनी है।
अब देखना यह है कि रिपोर्ट में सिर्फ जिम्मेदारी तय होती है या फिर यह भी सामने आता है कि इतने बड़े बाजार की फायर सेफ्टी व्यवस्था आखिर इतने समय से किस भरोसे चल रही थी।
आग बुझी, लेकिन सवाल अभी धधक रहे हैं
अग्निकांड के करीब 32 घंटे बाद भी बाजार में आग की लपटें दिखाई दीं। सेठी कॉम्प्लेक्स की एक दुकान में शुक्रवार दोपहर फिर धुआं और आग नजर आई, जिसके बाद दमकलकर्मियों ने उसे नियंत्रित किया।
दूसरी तरफ व्यापारी अपनी जली हुई दुकानों के बाहर खड़े नजर आए। किसी का स्टॉक गया, किसी का फर्नीचर और किसी की कई साल की मेहनत।
व्यापारियों का कहना है कि बाजार में करीब 1000 दुकानें हैं और रोजाना करोड़ों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। ऐसे में सवाल सिर्फ यह नहीं कि आग कैसे लगी… सवाल यह भी है कि **अगर फायर सिस्टम पहले से तैयार था तो आग के वक्त वह कितना तैयार था?**
क्योंकि सरकारी फाइलों में फायर सेफ्टी की व्यवस्था पूरी दिख सकती है, लेकिन आग के सामने असली परीक्षा कागजों की नहीं, सिस्टम की होती है।

