Rajasthan: 17.5 करोड़ रुपए से भरतपुर और टोंक में बनेंगे मधुमक्खी पालन एक्सीलेंस सेंटर, युवाओं को मिलेगा प्रशिक्षण
राजस्थान में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने की तैयारी है। भरतपुर और टोंक में एक्सीलेंस सेंटर के जरिए युवाओं को प्रशिक्षण, शहद प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच की सुविधा मिलेगी।
राजस्थान में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए भरतपुर और टोंक में एक्सीलेंस सेंटर तैयार किए जा रहे हैं। यहां मधुमक्खी पालकों और युवाओं को प्रशिक्षण के साथ शहद की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
राजस्थान में मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने की तैयारी
राजस्थान में मधुमक्खी पालन को रोजगार और कृषि से जुड़े व्यवसाय के रूप में विस्तार देने की तैयारी है। इसी दिशा में भरतपुर और टोंक में मधुमक्खी पालन एक्सीलेंस सेंटर विकसित किए जा रहे हैं। इन केंद्रों पर मधुमक्खी पालन से जुड़ी तकनीकी जानकारी, प्रशिक्षण और शहद की गुणवत्ता से संबंधित सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
सरकारी स्तर पर टोंक के चांदसेन क्षेत्र में हनी प्रोसेसिंग यूनिट से जुड़े कार्य के लिए निविदाएं भी जारी की गई हैं।
युवाओं को मिलेगा तकनीकी प्रशिक्षण
इन केंद्रों में युवाओं और मधुमक्खी पालकों को कॉलोनी तैयार करने से लेकर बॉक्स निर्माण तक की जानकारी दी जाएगी। प्रशिक्षण के दौरान मधुमक्खियों की कॉलोनी का प्रबंधन, पालन की तकनीक और शहद उत्पादन से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझाया जाएगा।
इच्छुक युवाओं के लिए आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध कराने की भी योजना बताई गई है। इससे मधुमक्खी पालन को स्वरोजगार के विकल्प के तौर पर अपनाने वाले लोगों को तकनीकी मदद मिल सकेगी।
शहद की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच की सुविधा
एक्सीलेंस सेंटर में तैयार शहद की प्रोसेसिंग और गुणवत्ता जांच से जुड़ी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। इसका उद्देश्य उत्पाद को घरेलू बाजार के साथ-साथ निर्यात के मानकों के अनुरूप तैयार करने में मदद करना है।
भरतपुर में मधुमक्खी पालन किट की आपूर्ति से जुड़ी सरकारी निविदा भी जारी हो चुकी है, जिससे इस क्षेत्र में सहायता और बुनियादी संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में काम होने का संकेत मिलता है।
राजस्थान में बढ़ रहा मधुमक्खी पालन का दायरा
मधुमक्खी पालन अब केवल शहद उत्पादन तक सीमित नहीं है। खेती में मधुमक्खियों की मौजूदगी परागण में भी मदद करती है, जिससे कई फसलों के उत्पादन पर सकारात्मक असर पड़ सकता है।
राजस्थान में भरतपुर, अलवर, हनुमानगढ़ और श्रीगंगानगर सहित कई जिलों में मधुमक्खी पालन किया जा रहा है। पालक मौसम और फूलों की उपलब्धता के अनुसार मधुमक्खियों की कॉलोनियों को अलग-अलग क्षेत्रों में ले जाते हैं।
फूलों की उपलब्धता के हिसाब से बदलता है ठिकाना
मधुमक्खी पालन में मौसम का खास महत्व है। सरसों के सीजन में कॉलोनियों को खेतों के आसपास रखा जाता है। इसके बाद धनिया, बबूल और दूसरी फसलों में फूल आने पर पालक कॉलोनियों को उन क्षेत्रों में ले जाते हैं।
इसी तरह अलग-अलग मौसम में तिल, बाजरा और अन्य फसलों के फूलों के आसपास भी मधुमक्खियों की कॉलोनियां पहुंचती हैं। कुछ पालक बेहतर फूल और मौसम की तलाश में राजस्थान से बाहर के राज्यों तक भी कॉलोनियां लेकर जाते हैं।
सरकार की योजनाओं से मिल रहा है प्रोत्साहन
राजस्थान सरकार पहले भी मधुमक्खी पालन को बढ़ावा देने के लिए सहायता और प्रशिक्षण पर जोर देती रही है। राज्य के 2022-23 के बजट दस्तावेज में भरतपुर में Centre of Excellence for Apiculture और किसानों को मधुमक्खी पालन से जोड़ने के लिए सहायता का प्रावधान दर्ज था।
अब भरतपुर और टोंक में नए केंद्रों तथा हनी प्रोसेसिंग से जुड़े कार्यों के जरिए इस क्षेत्र को आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। इससे प्रशिक्षण, प्रोसेसिंग और बाजार से जुड़ी सुविधाओं को एक साथ विकसित करने में मदद मिल सकती है।

