सिंचाई पानी को लेकर अनूपगढ़-घड़साना में किसान आंदोलन तेज, NH-911 पर चक्का जाम
अनूपगढ़-घड़साना में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसान आंदोलन तेज हो गया है। किसानों ने NH-911 पर चक्का जाम किया और 8 बारी पानी के लिखित आदेश की मांग की।
राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के अनूपगढ़-घड़साना क्षेत्र में सिंचाई पानी की मांग को लेकर किसानों का आंदोलन गुरुवार को और तेज हो गया। किसानों ने अपनी घोषणा के मुताबिक गांव पतरोड़ा के पास नेशनल हाईवे-911 पर चक्का जाम कर दिया। बड़ी संख्या में किसान बस स्टैंड के पास सड़क पर बैठ गए, जिससे हाईवे पर यातायात प्रभावित हुआ।
सिंचाई पानी की मांग को लेकर सड़क पर उतरे किसान
किसानों का कहना है कि सिंचाई पानी का संकट केवल किसी एक गांव या क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका असर पूरी कृषि व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसी मांग को लेकर अनूपगढ़ के ग्रामीण इलाकों में भी अलग-अलग स्थानों पर चक्का जाम किया गया।
लूणियां में भी किसानों ने सुबह बस स्टैंड के पास सड़क रोककर विरोध जताया। किसान संगठनों ने आंदोलन को और व्यापक करने की बात कही है।
एडीएम कार्यालय के बाहर चौथे दिन भी धरना
अनूपगढ़ में किसान मजदूर व्यापारी संघर्ष समिति की ओर से एडीएम कार्यालय के सामने धरना भी जारी रहा। किसानों का कहना है कि सिंचाई पानी के रेगुलेशन को लेकर जब तक उनकी मांग के अनुरूप स्पष्ट और लिखित आदेश जारी नहीं होते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
पानी के बंटवारे को लेकर क्षेत्र के किसान पहले भी आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे चुके हैं।
सरकार ने 5 बारी पानी का दिया आश्वासन, किसान 8 बारी पर कायम
बुधवार को सरकार की ओर से भेजे गए प्रतिनिधिमंडल और किसान प्रतिनिधियों के बीच वार्ता हुई थी। किसानों के अनुसार, वार्ता में पांच बारी सिंचाई पानी देने का आश्वासन दिया गया। साथ ही बांधों में पानी की आवक की समीक्षा के बाद छठी बारी पर विचार करने की बात कही गई।
हालांकि किसान नेता 8 बारी पानी की मांग पर कायम हैं। उनका कहना है कि उपलब्ध पानी और पहले जारी किए गए रेगुलेशन के आधार पर किसानों को आठ बारी सिंचाई पानी मिलना चाहिए।
आज शाम सिंचाई विभाग के जनरल चीफ से वार्ता
आंदोलन को देखते हुए जयपुर से सिंचाई विभाग के जनरल चीफ को अनूपगढ़ भेजे जाने की बात सामने आई है। किसानों के मुताबिक, गुरुवार शाम करीब 5 बजे एडीएम कार्यालय में वार्ता प्रस्तावित है।
किसान नेताओं ने वार्ता में 8 बारी पानी के रेगुलेशन को लेकर लिखित आदेश की मांग रखने की बात कही है। उनका कहना है कि केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर धरना और महापड़ाव खत्म नहीं किया जाएगा।
अधिकारी के तबादले के बाद भी आंदोलन जारी
किसानों की मांगों के बीच सिंचाई विभाग के अधिकारी प्रदीप रस्तोगी के हनुमानगढ़ तबादले की जानकारी भी सामने आई है। किसान संगठन सिंचाई पानी के रेगुलेशन के साथ अधिकारियों की जवाबदेही, नहरों के जीर्णोद्धार और अन्य मांगों को लेकर भी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल अनूपगढ़-घड़साना क्षेत्र में किसान आंदोलन जारी है और प्रशासन की नजर चक्का जाम तथा प्रस्तावित वार्ता पर बनी हुई है।

