अजमेर में 37 का गणित फेल, 32 वाली BJP का खेल! अनामिका शर्मा बनीं मेयर

Ajmer Mayor Election Result 2026: 37 पार्षदों वाली कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी थी, लेकिन मेयर चुनाव में BJP की अनामिका शर्मा ने जीत दर्ज की। जानें पूरा चुनावी गणित।

अजमेर में 37 का गणित फेल, 32 वाली BJP का खेल! अनामिका शर्मा बनीं मेयर

अजमेर नगर निगम में मेयर चुनाव ने वार्डों के आंकड़ों से अलग नई सियासी तस्वीर सामने रख दी। 37 पार्षदों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी कांग्रेस बहुमत से महज चार कदम दूर थी, जबकि 32 पार्षदों वाली BJP को 41 के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए नौ अतिरिक्त वोटों की जरूरत थी। इसके बीच 11 निर्दलीय पार्षद पूरे चुनाव में निर्णायक भूमिका में रहे।

21 सितंबर को हुए मतदान के बाद BJP की अनामिका शर्मा ने मेयर पद पर जीत दर्ज की। कांग्रेस की ओर से किरण गढ़वाल मैदान में थीं। चुनाव से पहले दोनों दल अपने-अपने पार्षदों के समर्थन को लेकर दावे कर रहे थे और निर्दलीय पार्षदों को साधने की कोशिश भी जारी थी।

अजमेर में कुल 80 पार्षद हैं और मेयर बनने के लिए 41 वोट जरूरी थे। चुनावी नतीजों में कांग्रेस 37 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल बनी, BJP के खाते में 32 सीटें आईं और 11 निर्दलीय पार्षद चुने गए। यानी आंकड़ों में कांग्रेस बहुमत के करीब थी, लेकिन मेयर चुनाव में अंतिम फैसला समर्थन के समीकरणों से हुआ।

यही वजह है कि अजमेर का मेयर चुनाव सिर्फ BJP बनाम कांग्रेस का मुकाबला नहीं रहा। 11 निर्दलीयों की स्थिति ने पूरे समीकरण को दिलचस्प बना दिया। चुनाव से पहले कांग्रेस ने पांच निर्दलीय पार्षदों के समर्थन का दावा किया था, जबकि BJP की ओर से भी निर्दलीयों के समर्थन को लेकर दावे किए गए थे।

अनामिका शर्मा की जीत के साथ अब अजमेर नगर निगम की कमान BJP के हाथ में आ गई है। चुनाव ने यह भी दिखाया कि निकाय राजनीति में पार्षदों की कुल संख्या और मेयर चुनाव का अंतिम आंकड़ा हमेशा एक जैसा नहीं होता। बहुमत से दूर रहने वाली पार्टी भी अतिरिक्त समर्थन जुटाकर बोर्ड बनाने की स्थिति में पहुंच सकती है।

अजमेर का यह चुनाव इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि करीब 35 साल बाद कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर निगम में सबसे बड़ा दल बनी थी। लेकिन मेयर की कुर्सी तक पहुंचने के लिए जरूरी 41 का आंकड़ा वह हासिल नहीं कर सकी। दूसरी ओर BJP ने अपने 32 पार्षदों के आधार पर अतिरिक्त समर्थन जुटाया और मेयर पद अपने नाम कर लिया।

अब अजमेर की राजनीति में अगली नजर डिप्टी मेयर चुनाव पर रहेगी। मेयर चुनाव के बाद बनने वाले नए समीकरण आगे निगम की कार्यप्रणाली और बोर्ड के भीतर शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकते हैं।