राजस्थान निकाय चुनाव: BJP ने पलटा खेल, पाली में 21 पार्षद फिर भी मेयर की कुर्सी; अलवर-उदयपुर में भी कमल

Rajasthan Nikay Chunav 2026 में पाली में 21 पार्षदों वाली भाजपा की नमिता बुबकिया मेयर बनीं। अलवर में सुमनलता अग्रवाल, उदयपुर में पारस सिंघवी और बीकानेर में अनिल कल्ला मेयर चुने गए।

राजस्थान निकाय चुनाव: BJP ने पलटा खेल, पाली में 21 पार्षद फिर भी मेयर की कुर्सी; अलवर-उदयपुर में भी कमल

राजस्थान निकाय चुनाव के बाद अब नगर सरकारों की तस्वीर सामने आने लगी है। सोमवार को मेयर और अध्यक्ष पदों के चुनाव में कई जगह ऐसे नतीजे आए, जहां पार्षदों की संख्या और मेयर की कुर्सी का गणित एक जैसा नहीं रहा। पाली में कांग्रेस के ज्यादा पार्षद होने के बावजूद भाजपा की नमिता बुबकिया ने मेयर का चुनाव जीत लिया, जबकि अलवर और उदयपुर में भी भाजपा के नाम मेयर की कुर्सी रही। दूसरी ओर बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर पद पर जीत दर्ज की।

पाली में सबसे ज्यादा चर्चा उस समीकरण की रही, जहां कांग्रेस के पास 29, भाजपा के पास 21 और 15 निर्दलीय पार्षद थे। बहुमत का आंकड़ा 33 था। इसके बावजूद भाजपा प्रत्याशी नमिता बुबकिया ने 33 वोट हासिल कर मेयर की कुर्सी अपने नाम कर ली। निर्दलीय राजबाला हिंगड़ को 29 और कांग्रेस प्रत्याशी सुमित्रा जैन को 3 वोट मिले। यानी 21 पार्षदों वाली भाजपा ने जरूरी समर्थन जुटाकर बोर्ड बनाने का रास्ता साफ किया।

अलवर में भी भाजपा की सुमनलता अग्रवाल मेयर चुनी गईं। 65 सदस्यीय निगम में भाजपा के 28 और कांग्रेस के 23 पार्षद थे, जबकि 13 निर्दलीय/अन्य और एक बसपा पार्षद था। बहुमत के लिए 33 वोट जरूरी थे। चुनाव परिणाम के मुताबिक सुमनलता अग्रवाल को 42 वोट मिले, जबकि कांग्रेस की कमलेश शर्मा को 23 वोट मिले। यहां भी बहुमत के आंकड़े तक पहुंचने में अतिरिक्त समर्थन ने भूमिका निभाई।

उदयपुर में भाजपा के पारस सिंघवी मेयर चुने गए। यहां भाजपा के पास पहले से 53 पार्षदों के साथ स्पष्ट बहुमत था, जबकि कांग्रेस के 23 पार्षद थे। 80 सदस्यीय निगम में बहुमत का आंकड़ा 41 था। भाजपा ने पारस सिंघवी को प्रत्याशी बनाया था और चुनाव के बाद उन्होंने मेयर पद हासिल किया।

बीकानेर में तस्वीर दूसरी रही। यहां कांग्रेस के पास 80 में से 42 पार्षद थे और बहुमत का आंकड़ा 41 था। कांग्रेस के अनिल कल्ला और भाजपा के सुरेंद्र सिंह शेखावत के बीच मुकाबला हुआ। चुनाव में कांग्रेस के अनिल कल्ला ने मेयर पद जीत लिया। अनिल कल्ला पूर्व मंत्री बीडी कल्ला के भतीजे हैं।

बारां के अटरू नगरपालिका में भी मुकाबला दिलचस्प रहा। यहां भाजपा के कृष्ण मुरारी दिलावर और कांग्रेस की निशा नैनीवाल के बीच मुकाबले में निशा नैनीवाल ने 3 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। यानी यहां भी बेहद करीबी मुकाबले में अध्यक्ष पद का फैसला हुआ।

इन नतीजों ने एक बार फिर दिखाया कि निकाय चुनाव में सिर्फ वार्डों की संख्या ही अंतिम तस्वीर तय नहीं करती। जहां किसी दल को स्पष्ट बहुमत मिला, वहां परिणाम अपेक्षाकृत सीधा रहा, लेकिन त्रिशंकु बोर्ड वाले निकायों में निर्दलीय पार्षदों और समर्थन के समीकरणों ने पूरी बाजी बदल दी। राजस्थान के कई निकायों में चुनाव से पहले भी निर्दलीयों की भूमिका अहम मानी जा रही थी और पाली-अलवर जैसे निगमों में यह गणित नतीजों के साथ सामने आया।

अब इन नतीजों के बाद सबसे बड़ा सवाल सिर्फ यह नहीं है कि किस पार्टी के कितने पार्षद जीते, बल्कि यह भी है कि किसने अपने संख्याबल को मेयर या अध्यक्ष की कुर्सी तक पहुंचाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाया। राजस्थान निकाय चुनाव के इन नतीजों ने स्थानीय राजनीति में संख्या, समर्थन और समीकरण—तीनों की अहमियत सामने रख दी है।