झालावाड़ में तस्करी के सौदे की सूचना पर कार्रवाई, 14 लाख रुपये के साथ कांस्टेबल गिरफ्तार
राजस्थान में झालावाड़ पुलिस की सूचना पर कोटा में कांस्टेबल मनोज मालव गिरफ्तार। उसके पास से करीब 14 लाख रुपये मिले। जानें NDPS एक्ट के तहत दर्ज मामले की पूरी जानकारी।
राजस्थान के झालावाड़ जिले में तस्करी से जुड़े कथित सौदे को लेकर पुलिस ने अपने ही विभाग के एक कांस्टेबल को गिरफ्तार किया है। घाटोली थाने में तैनात कांस्टेबल मनोज मालव को कोटा के विज्ञान नगर क्षेत्र से पकड़ा गया। कार्रवाई के दौरान उसके पास से करीब 14 लाख रुपये नकद बरामद किए गए। पुलिस को कुछ संदिग्ध तकनीकी साक्ष्य भी मिले हैं, जिनकी जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, झालावाड़ पुलिस से मिली सूचना के आधार पर कोटा सिटी पुलिस ने यह कार्रवाई की। मामले में एनडीपीएस एक्ट के तहत प्रकरण दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी गई है।
तस्करी के कथित सौदे की सूचना पर हुई कार्रवाई
जानकारी के मुताबिक, झालावाड़ जिला विशेष टीम (DST) के प्रभारी विष्णु सिंह को कांस्टेबल मनोज मालव के तस्करी से कथित तौर पर जुड़े होने और एक सौदे की सूचना मिली थी। सूचना को गंभीरता से लेते हुए मामले की पड़ताल शुरू की गई।
जांच के दौरान कांस्टेबल की लोकेशन कोटा में सामने आई। इसके बाद झालावाड़ पुलिस ने कोटा पुलिस के साथ जानकारी साझा की, ताकि संदिग्ध गतिविधियों के संबंध में कार्रवाई की जा सके।
कोटा के विज्ञान नगर इलाके से पकड़ा गया कांस्टेबल
झालावाड़ पुलिस से सूचना मिलने के बाद कोटा सिटी पुलिस ने विज्ञान नगर क्षेत्र में कार्रवाई की और मनोज मालव को हिरासत में लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से करीब 14 लाख रुपये नकद बरामद हुए।
पुलिस को कुछ संदिग्ध तकनीकी साक्ष्य मिलने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसियां बरामद नकदी और इन साक्ष्यों के बीच संभावित संबंध की पड़ताल कर रही हैं। हालांकि, नकदी किस उद्देश्य से रखी गई थी और कथित सौदे में उसकी क्या भूमिका थी, यह जांच के बाद स्पष्ट होगा।
NDPS एक्ट के तहत मामला दर्ज, जांच जारी
मामले में कोटा पुलिस ने नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (NDPS) एक्ट की धारा 30 के तहत प्रकरण दर्ज किया है। इसके बाद कांस्टेबल मनोज मालव को गिरफ्तार कर लिया गया।
पुलिस अब कथित तस्करी के सौदे, बरामद नकदी और तकनीकी साक्ष्यों से जुड़े पहलुओं की जांच कर रही है। जांच के आधार पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में अन्य लोगों की भूमिका है या नहीं।
पुलिस विभाग में कार्रवाई से हलचल
पुलिस विभाग में तैनात कांस्टेबल की गिरफ्तारी के बाद मामले ने ध्यान खींचा है। हालांकि, गिरफ्तारी और आरोप अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं हैं। मामले के सभी पहलुओं की जांच पूरी होने और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही जिम्मेदारी तय होगी।

