EC विवाद में राहुल गांधी का बड़ा हमला, PM मोदी-शाह पर साजिश का आरोप; CEC ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग
राहुल गांधी ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और SIR समेत चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। जानें राहुल के आरोप, ECI और BJP का पक्ष।
चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और वोटर लिस्ट में चल रहे Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद और तेज हो गया है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सवाल उठाए और उनके इस्तीफे की मांग की। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया में कथित गड़बड़ी के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हैं। इन आरोपों को राहुल गांधी ने अपनी ओर से गंभीर राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा बताया।
राहुल गांधी ने कहा कि वह चुनावों में कथित 'वोट चोरी' को लेकर पहले भी सवाल उठाते रहे हैं और उनके पास इसके समर्थन में सबूत होने का दावा किया। उन्होंने कहा कि CEC के पद पर बैठे व्यक्ति को इस पूरे विवाद पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा दे देना चाहिए। राहुल ने चुनाव आयोग की भूमिका और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर भी कई सवाल उठाए।

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में 2024 के लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विभिन्न विधानसभा चुनावों को लेकर भी अनियमितताओं के आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि कई चुनावों में विपक्ष के पक्ष में दिखाई देने वाली कथित एंटी-इनकंबेंसी अचानक खत्म होती नजर आई। इसी संदर्भ में उन्होंने हरियाणा, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और गुजरात के चुनावों का जिक्र किया। हालांकि, इन चुनावों में धांधली के राहुल गांधी के आरोप राजनीतिक दावे हैं, जिन्हें चुनाव आयोग स्वीकार नहीं करता।
राहुल गांधी ने ज्ञानेश कुमार की नियुक्ति को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग देश के लोकतांत्रिक ढांचे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और इसलिए उसके कामकाज को लेकर उठने वाले सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनावी प्रक्रिया से जुड़ी कथित अनियमितताओं की जिम्मेदारी चुनाव आयोग के शीर्ष स्तर पर तय होनी चाहिए।

दरअसल, चुनाव आयोग को लेकर विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ा जिसमें दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों पर कई बार आपत्तियां दर्ज की थीं। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों चुनाव आयुक्तों ने करीब 10 महीनों में कम से कम 14 बार कुछ फैसलों और आदेशों पर आपत्ति जताई थी।
हालांकि, चुनाव आयोग ने इन खबरों के बाद स्पष्ट किया कि आयोग के फैसले सर्वसम्मति से लिए गए हैं। ECI ने कहा कि SIR समेत आयोग के निर्णयों में सभी सदस्यों की सहमति रही है। ऐसे में एक तरफ विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और SIR को लेकर गंभीर सवाल उठा रहा है, वहीं आयोग अपने फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया के तहत सर्वसम्मत बता रहा है।
राहुल गांधी ने यह भी सवाल उठाया कि अगर किसी चुनाव में कथित तौर पर मतदाता सूची या मतदान प्रक्रिया से छेड़छाड़ होती है तो उसकी जवाबदेही किसकी होगी। उन्होंने चुनाव आयोग के खिलाफ स्वतंत्र जांच की जरूरत पर भी जोर दिया और कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए पारदर्शिता जरूरी है।
फिलहाल चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच यह टकराव SIR के मुद्दे से आगे बढ़कर चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता और संस्थागत जवाबदेही की बहस में बदलता दिखाई दे रहा है। राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में BJP ने भी विपक्ष के दावों को खारिज करते हुए चुनाव आयोग का बचाव किया है।
अब इस पूरे विवाद में आगे की नजर चुनाव आयोग के अगले कदम, SIR से जुड़े मामलों और विपक्ष की ओर से उठाए जा रहे संवैधानिक सवालों पर रहेगी।

