अपराध की दुनिया पर राज करने वाली 'लेडी डॉन' का अपनों ने ही लिखा डेथ वारंट, पुलिस भी रह गई दंग!

जयपुर में 15 महीने से लापता मिंटू चौधरी की हत्या का शक, सुनसान कुएं से मानव अवशेष बरामद। पुलिस ने पति और बेटे को गिरफ्तार किया, DNA जांच से होगी पहचान की पुष्टि।

अपराध की दुनिया पर राज करने वाली 'लेडी डॉन' का अपनों ने ही लिखा डेथ वारंट, पुलिस भी रह गई दंग!

करीब 15 महीने तक एक महिला का कोई पता नहीं था। परिवार के लोगों को कभी बताया गया कि वह तिहाड़ जेल में है तो कभी भरतपुर जेल में होने की बात कही गई। फिर उसकी गुमशुदगी भी दर्ज कराई गई। लेकिन करीब 15 महीने बाद पुलिस जब जयपुर के मुहाना इलाके के एक सुनसान कुएं तक पहुंची तो कहानी पूरी तरह बदल गई। कुएं से मिले मानव अवशेषों को पुलिस मिंटू चौधरी उर्फ सीमा चौधरी का मान रही है। मामले में पुलिस ने मिंटू के पति लालाराम चौधरी और बेटे हरिओम चौधरी को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया है।

पुलिस का दावा है कि दोनों ने महिला की हत्या करने के बाद शव को कुएं में फेंक दिया था और बाद में गुमशुदगी दर्ज कराकर मामले को छिपाने की कोशिश की।

मई 2025 से गायब थी मिंटू

जयपुर दक्षिण के डीसीपी राजर्षि राज के मुताबिक मिंटू चौधरी उर्फ सीमा चौधरी के लापता होने का मामला जुलाई 2025 में मुहाना थाने पहुंचा था। 21 जुलाई 2025 को बेटे हरिओम चौधरी ने अपनी मां की गुमशुदगी दर्ज कराई। रिपोर्ट में बताया गया कि मिंटू 27 मई 2025 से घर नहीं लौटी और उसका मोबाइल भी बंद था। पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर तलाश शुरू की, लेकिन लंबे समय तक उसका कोई पता नहीं चला।

पुलिस को मिला सुराग और पति-बेटे पर पहुंची जांच

करीब 15 महीने बाद जयपुर दक्षिण की जिला विशेष टीम को सूचना मिली कि मिंटू के लापता होने के पीछे हत्या हो सकती है और उसका शव एक कुएं में छिपाया गया है।

इसके बाद मुहाना थाना पुलिस, DST और अन्य पुलिस टीमों ने पुराने मामले की कड़ियां दोबारा जोड़नी शुरू कीं। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिर से मिली सूचना के आधार पर पुलिस का शक पति लालाराम और बेटे हरिओम पर गया। दोनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में दोनों ने हत्या में शामिल होने की बात स्वीकार की और शव फेंके जाने की जगह बताई।

सुनसान कुएं तक ले गई आरोपियों की निशानदेही

पुलिस आरोपियों की निशानदेही पर गांव अचरावाला के पास स्थित एक सुनसान और गहरे कुएं तक पहुंची।इसके बाद टीम की मदद से कुएं की तलाशी ली गई और वहां से मानव अवशेष बरामद किए गए। लंबा समय बीत जाने के कारण शव काफी खराब अवस्था में था। प्रारंभिक पहचान कपड़ों के आधार पर की गई है।पुलिस अब DNA जांच के जरिए वैज्ञानिक रूप से पहचान की पुष्टि कराएगी।

 

पुलिस का दावा- हत्या के बाद ऑटो से ले गए शव

पुलिस जांच के मुताबिक हत्या के बाद शव को कंबल में लपेटा गया और ऑटो से सुनसान कुएं तक ले जाया गया। इसके बाद शव कुएं में फेंक दिया गया ताकि वारदात का पता न चल सके। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की स्वतंत्र साक्ष्यों से पुष्टि करने और हत्या से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है। 

रिश्तेदार पूछते तो बताते- जेल में है मिंटू

इस मामले का एक चौंकाने वाला पहलू मिंटू के लापता होने के बाद उसके बारे में परिवार को दी गई कथित जानकारी है। पुलिस के अनुसार जब मिंटू की बहन और दूसरे रिश्तेदार उसके बारे में पूछते थे तो आरोपियों ने कभी उसके तिहाड़ जेल में होने और कभी भरतपुर जेल में बंद होने की बात कही। मिंटू की बहन को इन बातों पर शक हुआ। बताया गया कि जेल प्रशासन से जानकारी लेने पर मिंटू के वहां बंद होने की पुष्टि नहीं हुई। इसके बाद 21 जुलाई 2025 को बेटे हरिओम की ओर से मां की गुमशुदगी दर्ज कराई गई। अब पुलिस का आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज कराने का उद्देश्य दोनों आरोपियों से संदेह हटाना था।

हत्या की वजह को लेकर क्या कह रही पुलिस?

पुलिस के अनुसार पति-पत्नी के बीच लंबे समय से पारिवारिक विवाद था। पुलिस जांच में पति की ओर से पत्नी के कथित संबंधों पर संदेह और बेटे की ओर से कथित प्रताड़ना जैसी बातें सामने आने की जानकारी दी गई है। हालांकि ये फिलहाल पुलिस जांच और आरोपियों से हुई पूछताछ में सामने आए दावे हैं। हत्या की वास्तविक वजह और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया से होगा।

कौन थी मिंटू चौधरी?

मिंटू चौधरी का वास्तविक नाम सीमा चौधरी बताया गया है। पुलिस के मुताबिक उसके खिलाफ जयपुर के अलग-अलग पुलिस थानों में मारपीट, चोरी और अन्य आपराधिक मामलों सहित कई केस दर्ज रहे हैं। इसी आपराधिक पृष्ठभूमि के चलते स्थानीय स्तर पर वह ‘लेडी डॉन’ के नाम से चर्चित हो गई थी। पुलिस का कहना है कि अभी तक उसका किसी संगठित आपराधिक गिरोह से संबंध सामने नहीं आया है। इसलिए ‘लेडी डॉन’ उसकी कोई आधिकारिक पुलिस पदवी नहीं, बल्कि उसके लिए प्रचलित हुआ नाम था।

ऑटो चलाती थी मिंटू

पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मिंटू ऑटो चलाती थी। उसका बेटा हरिओम भी ऑटो चलाता है, जबकि पति लालाराम मजदूरी करता है। पुलिस अब उस ऑटो और हत्या के बाद शव को कुएं तक पहुंचाने से जुड़े साक्ष्यों की कड़ियां भी जोड़ रही है।

DNA रिपोर्ट से होगी पहचान की पुष्टि

कुएं से बरामद अवशेषों की प्रारंभिक पहचान मिंटू के रूप में की गई है, लेकिन करीब 15 महीने गुजर जाने के कारण पुलिस DNA जांच भी करा रही है। DNA रिपोर्ट इस मामले में महत्वपूर्ण फॉरेंसिक साक्ष्य होगी। पुलिस ने पति और बेटे को गिरफ्तार कर लिया है और दोनों से आगे की पूछताछ की जा रही है। जांच में अब यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि हत्या की पूरी परिस्थितियां क्या थीं, शव को ठिकाने लगाने में कोई और शामिल था या नहीं और लंबे समय तक मामला सामने क्यों नहीं आ सका। करीब 15 महीने तक जो मामला सिर्फ एक गुमशुदगी था, वह अब हत्या की जांच में बदल चुका है। पुलिस के सामने अगली चुनौती आरोपियों से हुई पूछताछ के दावों को फॉरेंसिक, तकनीकी और अन्य स्वतंत्र साक्ष्यों से साबित करने की है।