उत्तराखंड का वो खूबसूरत हिल स्टेशन जिसे टूरिस्ट भूल गए, अंग्रेज भी थे इसकी खूबसूरती के कायल

उत्तराखंड के चमोली जिले में बसा ग्वालदम शांत और खूबसूरत हिल स्टेशन है। जानें इसकी खासियत, अंग्रेजों से जुड़ा इतिहास, प्रमुख जगहें और पहुंचने का रास्ता।

उत्तराखंड का वो खूबसूरत हिल स्टेशन जिसे टूरिस्ट भूल गए, अंग्रेज भी थे इसकी खूबसूरती के कायल

उत्तराखंड में कई ऐसे हिल स्टेशन हैं, जहां भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच सुकून के पल बिताए जा सकते हैं। चमोली जिले में बसा ग्वालदम भी ऐसी ही जगह है। घने जंगलों, हिमालयी चोटियों और शांत वातावरण के बीच बसा यह छोटा सा हिल स्टेशन कभी अंग्रेजों को भी आकर्षित करता था। आज भी यहां पहुंचने वाले पर्यटकों को पहाड़, जंगल और ग्रामीण जीवन का अलग अनुभव मिलता है।

1,940 मीटर की ऊंचाई पर बसा है ग्वालदम

ग्वालदम समुद्र तल से करीब 1,940 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यह गढ़वाल और कुमाऊं मंडल की सीमा के पास बसा होने के कारण दोनों क्षेत्रों की संस्कृति का मेल भी देखने को मिलता है।

यहां से आसपास की हिमालयी चोटियों के खूबसूरत नजारे दिखाई देते हैं। साफ मौसम में नंदा देवी, त्रिशूल और नंदा घुंघुटी जैसी चोटियों के दृश्य पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।

अंग्रेजों ने 1890 में बनवाया था गेस्ट हाउस

ग्वालदम की प्राकृतिक सुंदरता से प्रभावित होकर अंग्रेजों ने वर्ष 1890 में यहां एक सरकारी गेस्ट हाउस बनवाया था। वर्तमान में इसकी देखरेख उत्तराखंड वन विभाग करता है।

गेस्ट हाउस के आसपास का प्राकृतिक वातावरण और पास स्थित झील इस जगह को और खास बनाते हैं। शांत माहौल के कारण यहां प्रकृति के बीच समय बिताने वाले पर्यटकों को अलग अनुभव मिलता है।

क्यों खास है ग्वालदम?

ग्वालदम की खासियत सिर्फ हिमालयी नजारे नहीं हैं। यहां कई ऐसी जगहें और गतिविधियां हैं, जो इसे दूसरे हिल स्टेशनों से अलग बनाती हैं।

- बांज, बुरांश और देवदार के घने जंगल

- नंदा देवी राजजात यात्रा का प्रमुख मार्ग

- प्राचीन बधाणगढ़ी मंदिर

- करीब 200 किलोमीटर लंबा लॉर्ड कर्जन ट्रेक

- ऐतिहासिक मैती आंदोलन से जुड़ा क्षेत्र

- गढ़वाल और कुमाऊं की मिली-जुली संस्कृति

प्रकृति प्रेमियों के लिए शांत जगह

ग्वालदम उन लोगों के लिए खास हो सकता है, जो पहाड़ों में भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से अलग शांत वातावरण तलाशते हैं। यहां घने जंगल, पहाड़ी रास्ते और हिमालयी दृश्य यात्रा को खास बनाते हैं।

ग्वालदम में स्थानीय संस्कृति और पहाड़ी जीवन को करीब से देखने का मौका भी मिलता है।

दिल्ली से ऐसे पहुंच सकते हैं ग्वालदम

दिल्ली से सड़क मार्ग के जरिए ग्वालदम पहुंचने के लिए रूट आमतौर पर मेरठ → मुजफ्फरनगर → रुड़की → ऋषिकेश → देवप्रयाग → कर्णप्रयाग → थराली → ग्वालदम का रहता है।

अगर आप उत्तराखंड में किसी शांत और प्राकृतिक जगह की तलाश में हैं, तो ग्वालदम को अपनी यात्रा की सूची में शामिल कर सकते हैं।